बेधड़क ...बेलाग....बेबाक

Fact Finding-CCtv फुटेज ने खोला PMCH के जूनियर डॉक्टरों की गुंडई की पोल बेरहमी से पीटने के बाद हड़ताल

डॉक्टरों को धरती का कहा जाता है भगवान लेकिन बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल के जूनियर डॉक्टर आए दिन मरीजों के परिजनों के साथ करते है मारपीट फिर दंबगई दिखाते हुए कर देते है हड़ताल, करने लगते है सुरक्षा की मांग गुंडई भी और सीनाजोरी करते है ब्लैकमेल,PMCH के जूनियर डॉक्टरों की गुंडई का आया सामने वीडियो फुटेज,

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पटना Live डेस्क। डॉक्टर धरती के भगवान कहे जाते है। लेकिन सूबे के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल PMCH में अपनी सुरक्षा ख़ातिर जूनियर डॉक्टर 5 दिन से हड़ताल पर थे जो अब स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और पीएमसीएच के प्राचार्य के आश्वासन के बाद जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल खत्म हो गयी है। इसके बाद जूनियर डॉक्टर फिर से अपने-अपने काम पर लौट आए हैं।लेकिन सवाल उठता है कि आखिर हड़ताल हुई क्यो? और सबसे बड़ा सवाल है कि विगत 5 दिनों में सूबे के सुदूर जिलों से अपने इलाज ख़ातिर PMCH आए मरीजों को जो परेशानी झेलनी और कुछ का असमय निधन हुआ उसका जिम्मेदार कौन है?

                            जूनियर डॉक्टरो के हड़ताल के कारण राज्य के अलग-अलग जिलों से PMCH में इलाज के लिए आने वाले बच्चे-बुजुर्गों समेत तमाम गंभीर हालत वाले मरीज व उनके तीमारदारों को विगत 5 दिन जो पीड़ा व परेशानियों का सामना करना पड़ा उसकी जिम्मेदार कौन लोग है? आखिर बार बार होने वाले हड़ताल व कार्य बहिष्कार के हथियार से सरकार से अपनी बात मनवाने वाले जुनियर डॉक्टरों की वजह से जो इंसानी जिंदगिया असमय जिंदगी की जंग हार जाते है उनका कसूर क्या होता है? हर बार बार बार लगातार आम आदमी PMCH के जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल की चक्की में पिसता आ रहा है और कब तक पिसता रहेगा?

गुंडई दबंगई फिर हड़ताल कर ब्लैकमेलिंग भी

गौरतलब है कि पिछले दिनों मरीज के परिजनों के साथ हुई मारपीट के बाद से पीएमसीएच के जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे। इसके बाद अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था पर खासा असर भी पड़ा था। हर दिन तकरीब दूर दराज से अमूमन 1200 मरीज बिना इलाज के वापस लौटते रहे। मिली जानकारी के अनुसार 60 से अधिक ऑपरेशन टाल दिए गए। सूबे के विभिन्न जिलो से आए हजारो हजार मरीज व उनके परिजन बेबसी के आँसू बहाते रहे और इन्ही आमआदमी के दर्द व मजबूरी को अपना हथियार बनाकर जूनियर डॉक्टर अपनी बात भी सरकार से मनवा लेते है मतलब पीटे भी मरीज और मरीज ही सरकार को ब्लैकमेल का जरिया भी बने डॉक्टरों ख़ातिर है न ग़ज़ब!

बेरहम व सामूहिक गुंडई की खुली पोल

5 दिन तक हड़ताल करने के बाबत PMCH के जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि मरीज की मौत के बाद उसके परिजनों द्वारा उस वक्त ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर के साथ न केवल गालीगलौज किया गया बल्कि मारपीट किया गया। इतने से भी जब उनका दिल नही भरा तो बाकायदा बाहर से असामाजिक तत्वों को बुलाकर गोली मारने की धमकी भी दिलाई गई। और तो और यही नही घटना के अगले दिन गुरुवार 23 सितम्बर 2022 को सैकड़ों लोगों ने अस्पताल परिसर में मौजूद जीवक हॉस्पिटल पर पथराव कर दिया। इसी वजह से अपनी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम ख़ातिर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए। लेकिन अब सुरक्षा को लेकर हड़ताल करने के डॉक्टरों के तर्क की पोल पट्टी खुल गई है।

                  दरअसल,अब उस विवाद का वीडियो सामने आया है,जिस विवाद की वजह से बकौल जूनियर डॉक्टर अपनी सुरक्षा को लेकर हड़ताल पर गए थे। लेकिन PMCH में लगे CCTv कैमरों द्वारा रिकॉर्ड घटना की वीडियों में साफ साफ दिख रहा है कि जूनियर डॉक्टरों ने कितनी बेहरमी से उस परिवार के सदस्यों को पीटा जिन्होंने ने अपना सगा खोया और अपने परिजन की मौत से बदहवास थे।

वीडियो में दिख रहा है कि अस्पताल के टाटा वार्ड में जूनियर डॉक्टर मरीज के परिजनों को बुरी तरह पीट रहे हैं। परिजन डॉक्टर को रोकने की भी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वो किसी की नहीं सुन रहे हैं। सुरक्षाकर्मी भी मामले को शांत कराने की कोशिश करते हैं। मगर डॉक्ट परिजन को लगातार पीटते जा रहे हैं।

गुण्डई भी फिर जबर सीनाज़ोरी भी

दरअसल, बुधवार (21 सितम्बर 2022) की दरमियानी रात एक 70 वर्षीय बुजुर्ग को उसके परिजनों ने PMCH के इमरजेंसी वार्ड में एमडिट कराया। एडमिट होने के कुछ ही देर बाद बुजुर्ग की मौत हो गई।शख़्स की मौत से बदहवास परिजन इसके लिए डॉक्टर को जिम्मेदार ठहराने लगे। उनका आरोप था कि लगातार इलाज़ की गुहार लगाने के बावजूद ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों की लेटलतीफी व लापरवाही की वजह से उनके परिजन की मौत हो गई। गर वक्त रहते इलाज शुरू कर देते तो उनकी जान बच जाती। परिजनों के बारंबार आरोप लगाने से डॉक्टर गुस्साए और फिर विवाद बढ़ गया।

                CCTv में कैद फुटेज मे साफ साफ दिख रहा है कि एक ब्लू शर्ट पहने डॉक्टर और युवक में धक्का मुक्की होती है फिर हाथापाई होती है। उक्त डॉक्टर मृतक के परिजन से लप्पड़ थप्पड़ करने लगता है। बीच बचाव में अन्य लोग शामिल होते है। इसी बीच अन्य डॉक्टर भी आ धमकते है और फिर …..

ये गुण्डई और सीनाज़ोरी का चरम है

आप वीडियों देख कर समझ गए होंगे कि PMCH में डॉक्टरों ने न केवल बेहरमी से दोनों युवकों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा और फिर पूरी सीनाज़ोरी करते हुए खुद की सुरक्षा ख़ातिर हड़ताल भी कर दिया। यह न पहली बार हुआ है न आखरी बार होने वाली घटना है। अमूमन हर बार यही होता है कि पीटते है मरीज के परिजन और पीटने वाले होते है डॉक्टरों और फिर पीटने वाले ही विक्टिम कार्ड खेलते हुए हड़ताल कर देते है कि हमारी सुरक्षा बढ़ाओ।

हड़ताल होते ही स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा जाती है। मरीज असमय दिवंगत होने लगते है। सुदूर जिलो से इलाज़ को PMCH पहुचने वाले मरीज और उनके परिजनो की दशा और बेबसी की वजह से सरकार पर दबाव में आ जाती है। तभी तो जूनियर डॉक्टर हड़ताल को ब्लैकमेलिंग टूल की तरह इस्तेमाल करते है। यानी पीटता भी मरीज का परिजन है और मरीज ही बन जाते है सरकार के इन कथित धरती के भगवानों के आगे घुटने टेकने वजह।

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