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कोरोना के कहर के बीच इंसानियत ने थाम लिया है उम्मीद का दामन- पटना की भौतिकी की प्रोफेसर की सेवाभाव ने छुआ लोगों का दिल

Corona रोगियों को खुद घर मे खाना बनाकर फिर उसे पैक कर मुफ्त में भोजन पहुचा रही, भौतिकी की प्रोफेसर की इस सेवाभाव ने छुआ लोगों का दिल, नेकदिली की चहु ओर चर्चा

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पटना Live डेस्क। देश एक बार फिर कोरोना वायरस ( Coronavirus In India ) की सुनामी से जूझ रहा है। दूसरी लहर का कहर कई राज्यों में देखने को मिल रहा है। यही वजह है कि केंद्र सरकार के साथ राज्य सरकारें भी इससे निपटने के लिए कई कदम उठा रही हैं। लेकिन इन मुश्किल हालातों में राहत तब मिलती है जब मदद के लिए कोई हाथ आगे आता है। कोरोना के जंग के बीच सबसे बड़ी लड़ाई दवा और भोजन की परेशानी की भी आ रही है।ऐसे में बिहार की राजधानी पटना की एक महिला प्रोफेसर ने मदद का हाथ आगे बढ़ाया और साबित कर दिया कि कोरोना काल में भी इंसानियत जिंदा है।

इस महिला प्रोफेसर ने सैकड़ो कोरोना मरीजों को मुफ्त भोजन देने का बीड़ा उठाया है। इस तरह की पहल तो कई लोगों ने की है लेकिन इस महिला के तरीके ने ना सिर्फ लोगों को बल्कि कई सामाजिक संगठनों के दिल को भी छू लिया।बिहार की राजधानी पटना में कोरोना के दौरान कई लोग मरीजों के लिए मसीहा बनकर सामने आए हैं। कोई लोगों को फ्री में ऑक्सिजन दे रहा है तो कोई उनके घर तक खाना पहुंचा रहा है। उन्हीं में से एक पटना वीमेंस कॉलेज की प्रोफेसर अपराजिता कृष्णा हैं, जो अपनी बेटी के साथ मिलकर पटना में कोविड मरीजों को खाना पहुंचाने का काम कर रही हैं।

कोरोना के कहर के बीच तस्वीर में जो महिला आपको खाना बनाते दिख रही हैं इनका नाम है ‘अपराजिता कृष्णा’।ये पटना वीमेंस कॉलेज में भौतिकी (Physics) विभाग की प्रोफेसर हैं। लेकिन वर्त्तमान में विज्ञान को छोड़ अन्नपूर्णा की भूमिका में आ गई है। एक माँ के रूप में एक बहन के रूप में एक बेटी के रूप में ये पटना के सैकड़ो कोरोना मरीजों को मुफ्त में खाना बनाकर घर तक डिलीवर कर रहीं हैं। इनका यह काम पीड़ितों व उनके परिजनों को राहत दे रहा है और उनके दिल को छू रहा है। संकट की इस घड़ी में पटना के प्रतिष्ठित वीमेंस कॉलेज में फिजिक्स की हेड अपराजिता कृष्णा लोगों की मदद कर रही हैं। अपराजिता के साथ उनकी बेटी कृतिका रम्या भी लोगों की मदद के लिए आगे है, वह भी एक प्राइवेट कॉलेज में प्रोफेसर है। दोनों मां-बेटी कोविड संक्रमित मरीजों के घर तक मुफ्त में खाना पहुंचाती हैं।

प्रोफेसर साहिब ना सिर्फ कोरोना मरीजों को भोजन दे रही है। बल्कि हाइजीन का भी पूरा ध्यान रख रहे हैं। स्वयम भोजन तैयार कर रही है बल्कि तमाम इंग्रेडिएंट्स की गुणवत्ता का भी पूरा ख्याल रख रही है। खास बात यह है कि जहां एक ओर लोग कोरोना से जुड़ी छोटी से छोटी मदद के जरिए सुर्खियों में आना चाहते हैं। वहीं अपराजिता मैडम किसी भी तरह के सुर्खिया की बजाय निःस्वार्थ भाव से खुद भोजन बनाकर कर विपदाकाल में भूख के खिलाफ यथा शक्ति जंग लड़ रही है। लेकिन इनकी नेक दिली की चर्चा आखिर कब तक छुपी रह सकती है।

पटना Live को जब इनके भगीरथ प्रयास की जानकारी हुई तो हम नेपथ्य में रहकर इनकी नेकदिली को शब्दों में बया करने से खुद को रोक नही पाए। सैकड़ो कोरोना मरीजों को मुफ्त में खाना बनाकर घर तक डिलीवर कर रहीं हैं। ऐसे आपदा के वक्त में जब हर तरफ निराशा तारी है ऐसे भी कुछ लोग हैं जो उम्मीदों का दिया जलाएं हैं। माना ये हर दरवाजे पर दीया न जला रहे हो पर कुछ चौखटों को रौंशन तो कर अंधेरे के घने होने के बावजूद उम्मीद का दीपक जला घुप्प अंधेरे को चुनौती जरूर दे रहे है। सलाम है अपराजिता मैम आपको! आपके ज़ज़्बे को ….

 

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