बेधड़क ...बेलाग....बेबाक

बड़ी खबर – लीजिये अब 3608 करोड़ के तटबंध घोटाले कि जांच का पटना हाइकोर्ट ने दे दिया है आदेश,72 अफ़सरो की 7 टीम को मिला है जाँच का जिम्मा

260

पटना Live डेस्क। बिहार में पिछले 3 टर्म से नीतीश कुमार की सुशासन सरकार है बस पार्टनर बदले सीएम की कुर्सी नीतीश कुमार के कब्जे में ही रही महज़ कुछ महीनों के अलावे। लेकिन सुशासन के तमाम दावे अब घपलों घोटालों के खुलासे से फीके पड़ते जा रहे है।दिन ब दिन बिहार घोटालेबाजों का चारागाह बनता प्रतीत होने लगा हैं।एक पर एक ऐसे मामले सामने आए हैं जिसने मौजूदा सरकार की नींद उड़ा दी है।चर्चित सृजन घोटाला खुला तो लगे हाथ शौचालय घोटाले भी खुल कर सामने आ गया। ये दोनों मामले अभी तक ठंडे भी नहीं पडे है कि एक और करोड़ों करोड़ का घोटाला सामने आ रहा है। घोटाला तटबंध निर्माण कार्य से संबंधित है,जिसमें 3608 करोड़ रुपए खर्च होने के बाद भी तटबंधों की हालत बेहद खराब है।
इस मामले को लेकर एक सामाजिक कार्यकर्ता ने हाईकोर्ट में मामला दर्ज किया था। जिसमें आरोप लगाया गया था कि बिहार सरकार द्वारा लगातार पैसे खर्च करने के बाद भी तटबंधों की हालत इतनी  खराब क्यो है।सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने पूरे निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जांच कराने का आदेश दिया है।  फिलहाल इस मामले की जांच 72अधिकारी कर रहे हैं।
मामला जुड़ा है बिहार के बेहद बाढ़ प्रभावित जिलों में शुमार सीतामढ़ी और शिवहर जिलों का है।जहां के रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता शिवेश भारती ने पटना हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी। जिसमें हाईकोर्ट के आदेश पर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश जारी किए गए है। जिसके बाद जल संसाधन विभाग की कुल 7 टीम के 72 अधिकारी सीतामढ़ी जिले और शिवहर पहुंचकर निर्माण कार्य की जांच में लगे हुए हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक पटना हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता ने एचएससीएल कंपनी पर ये आरोप लगाया था कि तटबंध निर्माण कार्य में विभागीय दिशा निर्देशों का उल्लंघन किया गया है। मनमानी तरीके से तटबंध का निर्माण करवाया गया है।जिसमें तकरीबन एक हजार करोड़ के घोटाले की संभावना है। तटबंध निर्माण कार्य का निविदा वर्ष 2002 में प्रकाशित किया गया था। जिसमें 793 करोड़ रुपए की लागत से तटबंध का निर्माण पूरा किया जाना था लेकिन फिर से 2012 में उसी निर्माण कार्य की निविदा द्वारा प्रकाशित की गई और पुनः निविदा कर उसकी लागत 3608 करोड़ रुपए कर दिया गया।

             हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता शिवेश भारती ने आरोप लगाते हुए कहां की इस पूरे मामले की जांच निष्पक्ष एजेंसी से कराना चाहिए क्योंकि जल संसाधन विभाग के अधिकारी ही मामले की जांच कमेटी में हैं और जांच के नाम पर महज कागजी खानापूर्ति की जा रही है। वही हकीकत तो ये है कि अब तक स्पॉट वेरिफिकेशन भी नहीं किया गया है।
उल्लेखनीय है कि इस बार भी आई बिहार में प्रलयकारी बाढ़ ने सीतामढ़ी जिले में जमकर तबाही मचाई थी। बाढ़ में पांच जगहों पर तटबंध टूट गया था और जान माल को काफी नुकसान हुआ था। ऐसा इसलिए हुआ कि यहां गलत निर्माण कार्य कराया गया था। कई जगहों पर तटबंध बालू की रेत की तरह ढह गया, जिसे लोगों ने अपनी आंखों से देखा था। इसी को मुद्दा बनाते हुये जब मामले की जानकारी इकट्ठा की गई तो गड़बझाले का पता चला।

 

Comments are closed.