बेधड़क ...बेलाग....बेबाक

FACT फाइंडिंग (VIDEO) गैंगेस्टर या?अमित भैया अमर रहे के नारे और अंतिम यात्रा में हजारों हजार युवाओं का सैलाब!आखिर क्यों?

शव के पीछे सैकड़ों हजारों वाहनों पर सवार हज़ारो हज़ार युवा लगा रहे थे नारा जब तक सूरज चांद रहेगा अमित भैया....अमर रहे नारे की गूंज..... सोशल मीडिया के इस दौर में युवा गैंगेस्टर/ अपराधी के सैकड़ों लाखों की है फैन फॉलोइंग, गैंगेस्टर युवाओं के एक वर्ग के हीरो और आदर्श है बन गए, तभी तो सोशल मीडिया के दौर में युवा गैंगेस्टर बन चुके है नए सेलेब्रेटी जिनके एक अपलोड पर मिनट भर में हजारों लाइक्स व कमेंट होते है।

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पटना Live डेस्क। 18 मई को दिन में 11 बजकर कुछ मिनट पर झारखंड की विश्वप्रसिद्ध बाबा नगरी देवघर में सत्रवाद संख्या-129/2018 के केस में जमानत पर चल रहे एक आरोपी को पुलिस अभिरक्षा के बीच प्रोडक्शन वारंट पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय गरिमा मिश्रा के न्यायालय में लाया गया था। न्यायालय से अपनी हाजिरी देकर वकालतखाना परिसर में आरोपी अपने वकील से मिलने लौटा ही था, तभी एक अपराधी ने उसके सिर में 2 व छाती में 1 गोली मार दी। गोलियां मारने के बाद अपराधी वकालतखाना की ओर भागा और वहां भी दो राउंड फायरिंग कर गली से होते हुए बाइक स्टार्ट कर खड़े साथी संग भाग निकला। हत्या की इस घटना के बाद कोहराम मच गया। इसके बाद देवघर पुलिस मौके पर पहुंची और उसे सदर अस्पताल भेजा गया जहां घायल को मृत घोषित कर दिया गया।

                           देवघर कोर्ट परिसर में मारे गए शख्स की पहचान बिहार के बेउर जेल से पेशी के लिए आये  सजायाफ्ता अमित सिंह के तौर पर हुई।अमित सिंह उर्फ निशान्त पटना जिले के बिहटा के बसौंढ़ा का मूल निवासी था। पटना के बेउर जेल में बिहटा स्थित एक सिनेमा हॉल मालिक निर्भय कुमार सिंह हत्याकांड में आजीवन कारावास का सजायाफ्ता कैदी था।

माँ पहुची देवघर बेटे का लेने शव

झारखण्ड के देवघर कोर्ट से सटे वकालतखाना परिसर में ‘महाकाल’ सरगना अमित सिंह उर्फ निशांत की सरेआम हुई हत्या के बाद इस हत्याकांड को गैंगवार और बदले की कार्रवाई से जोड़ कर देखा जा रहा है। दिन दहाड़े अमित की हत्या के बाद देवघर पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर कानूनी प्रक्रिया के तहत पंचनाम किया और शव को पोस्टमार्टम ख़ातिर लेकर चली गई। इसी बीच मक़तूल की रोती बिलखती माँ परिजनों संग देवघर पहुची ताकि बेटे के पार्थिव शरीर को बिहटा के बसौढा गांव लाया जा सके।

             19 जून को देवघर पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर कानूनी प्रक्रिया पूरी कर मृतक अमित सिंह के शव को उनकी माँ और अन्य परिजनों को सौप दिया। तदुपरांत दोपहर में अमित का शव एम्बुलेंस में लेकर परिजन बिहटा के लिए निकल पड़े।

घर से लेकर घाट तक हजारों हजार की

अमित के शव को एम्बुलेंस से लेकर उसी दिन यानी 19 जून की देर रात परिजन बिहटा स्थित पैतृक गाँव बसौढा पहुचे। शव के घर पहुचने से पहले ही अपने अमित भैया को अंतिम बार देखने ख़ातिर शाम से ही घर के बाहर हजारों हजार की सख्या में दूर दूर से पहुचे युवा,औरते, बुजुर्ग समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण इकट्ठा होकर इंतजार कर रहे थे। अमित के शव पहुचने में लेट होने के बावजूद चाहने वाले मौजूद थे। शव के पहुचते ही महिलाएं चीख मार कर रोने लगी तो वही अपने अमित भैया का ताबूत में शव देखते ही युवकों के द्वारा जिंदाबाद…..जब तक सूरज चांद रहेगा अमित भैया का नाम रहेगा और…. अमर रहे के नारे गूंजने लगे और माहौल पूरी तरह से चीखों व युवकों के बेकाबू भीड़ कि नारेबाजी से उत्तेजना से भर उठा।

कौन था अमित सिंह?

देवघर कोर्ट परिसर में गोलियों से बिंध दिए गए युवक का नाम अमित कुमार सिंह उर्फ निशांत था। मूल रूप से पटना जिले के बिहटा थाना क्षेत्र के बसौड़ा का रहने वाला था। पिता पप्पू सिंह इलाके के बेहद दबंग व पसौढ़ा पंचायत के पूर्व मुखिया है। पिता की दबंगई का असर बेटे पर भी पड़ा और बेटे को भी दबंगई का खुमार चढ़ गया। धन संपत्ति की कमी नही थी। अमित सिंह ने बाइक सवार बदमाशों का गिरोह बनाया। जिसका नाम उसने महाकाल रखा। अपने इलाके में कम उम्र के बाइकर्स की धूल उड़ाती गैंग के साथ ये दबंगई, गुण्डई, मारपीट और  रंगबाजी को अंजाम दिया करता। धीरे धीरे इलाके में नामवर होने लगा। साल 2012 से लेकर 2017 के बीच अमित कुमार सिंह उर्फ निशांत ने बिहार और झारखंड में दर्जनभर से ज्यादा हत्या और अपहरण समेत रंगदारी की वारदातों को अंजाम दिया था। मतलब जरायम की दुनिया मे दाख़िल हो चुका था।

अमित सिंह के पिता पप्पू सिंह ने दो शादियां की हैं। दूसरी पत्नी और बच्चे भी जब अमित की मां के साथ ही रहने लगे तो अमित ने घर ही छोड़ दिया। घर छोड़ने के बाद अमित अपराध की दुनिया में पूरी तरह रम गया। अब अमित सिंह के महाकाल गैंग ने बिहटा बाजार और इलाके के दुकानदारों से रंगदारी मांगना शुरू कर दिया और न देने पर गोलीबारी मारपीट व उपद्रव मचाना शुरू कर दिया। 

महज 5 साल में खौफ़ का खड़ा किया साम्राज्य

जानने वाले कहते है वैसे तो अमित ने जरायम की दुनिया मे तो वर्ष 2010 में ही एंट्री लेली थी। इसका गिरोह महाकाल गैंग भी लगातार इलाके में उत्पात मचा सुर्खियों में आने लगा था। लेकिन पाताललोक में इसके नाम का डंका तब बजा जब इसने 15 सितम्बर 2017 को दिनदहाडे बिहटा के प्रसिद्ध उदयचित्र मंदिर नामक सिनेमा हॉल मालिक व इलाके बेहद चर्चित परिवार के चश्मों चराग निर्भय कुमार सिंह को बिहटा के ही एक डेकोरेटर्स व्यवसायी के बेटे गोलू से 2 लाख की सुपारी लेकर हत्या करवाई थी। इस हत्याकांड में अमित ने निर्भय सिंह को रास्ते से हटाने के लिए पटना से शूटर्स बुलवाए थे और दिनदहाड़े हत्याकांड को अंजाम दिया व दिलवाया था। इस दुःसाहसिक वारदात ने बिहटा के व्यापारियों को दहशतज़दा कर दिया। निर्भय सिंह की हत्या की घटना से कोहराम मच गया था और अमित का नाम पटना पुलिस की टॉप टेन लिस्ट में शामिल हो गया। ताबड़तोड़ एक्शन लेते हुए इसके पिता पप्पू सिंह और महाकाल गैंग के दर्ज़नो को गिरफ्तार कर लिया और अमित के घर की कुर्की कर ली। लेकिन पटना पुलिस की तामम कोशिशो को बाद भी लगभग एक साल तक अमित पुलिस के हत्थे नही चढ़ा।

                  फरारी के दौरान सिनेमा मालिक हत्याकांड को अंजाम देने के बाद इसने अपराध जगत में अपनी गहरी पैठ बना ली और इसका महाकाल गैंग कुख्यात होता चला गया। रंगदारी ख़ातिर फोन फिर गोलीबारी के तमाम कांड को इसने अंजाम दिया व दिलाया। इसी बीच इसने एक बाजार में एक मेडिकल शॉप पर रंगदारी ख़ातिर दिनदहाड़े अन्धाधुन्ध फायरिंग करा दी। इसके बाद तो कुख्यात अमित सिंह के घर की पटना पुलिस ने दोबारा कुर्की जब्ती की एवं इसके दबंग पिता पप्पू सिंह का जमानत खारिज हों गया।

वही निर्भय सिंह हत्याकांड को अंजाम देकर अमित लगभग एक साल तक फरार रहा है।बड़ी मशक्कत के बाद पकड़ा गया। लेकिन बीच मे बिहटा आता जाता रहता कई बार स्पॉट किया गया। उधर पटना पुलिस इसकी तलाश में दर दर भटक रही थी। इसी बीच एक वरीय पुलिस पदाधिकारी को सूचना मिली की कुख्यात अमित सिंह बिहटा के आसपास ही लगातार स्पॉट किया जा रहा है। पुलिस टीम को सक्रिय किया गया। पुलिस को यह सूचना मिली की वह अपने बुआ के घर रह रहा है और नवरात्रा का पाठ कर रहा है। तब पुलिस टीम अहले सुबह करीब 3 बजे भोजपुर जिले के संदेश थाना क्षेत्र स्थित छछरी गांव में छापेमारी कर कुख्यात अमित कुमार सिंहको गिरफ्तार कर लिया।तत्कालीन एसएसपी मनुमहाराज तब स्वयं बिहटा थाना पहुचे थे और पब्लिक में इसके दहशत को कम करने ख़ातिर इसको नंगे बदन बिहटा बाजार में घुम वाया भी था।

                    लेकिन जेल पहुचने के बाद अमित ने महज 5 साल में ही अपराध की दुनिया में विशेष कर पटना पश्चिमी के बेहद तेजी से विकसित हो रहे नौबतपुर, बिहटा, विक्रम-पाली होते हुए भोजपुर जिले तक अपने अपराध से कोहराम मचा दिया। यानी अब इसके नाम का सिक्का चल पड़ा। लेकिन ये निर्भय सिंह हत्याकांड दोषी होकर सज़ावार भी हो गया।

                       अमित कुमार सिंह जेल में रहते हुए बिहार के बाहर के भी बड़े अपराधियों के संपर्क में आया और फिर इसने कांट्रेक्ट किलिंग को अपना पेशा बना लिया। उल्लेखनीय है कि उस वक्त पटना पुलिस ने भी सिनेमा हॉल मालिक निर्भय सिंह हत्याकांड को भी कॉन्ट्रैक्ट किलिंग के द्वारा किया गया कांड बताया था। अमित अब सिर्फ पैसे को अहमियत देने लगा। अपना नेटवर्क दूर दूर तक फैलता गया और ज़मीन के कब्जे के धंधे से लेकर वसूली के धंधे का मास्टर बन गया।

शव यात्रा में बेकाबू भीड़!

20 जून को बिहटा के बसौड़ा गाँव से अमित के शव को अंतिम सस्कार ख़ातिर गंगा घाट ले जाया गया। शव यात्रा में हज़ारो हज़ार की संख्या में युवाओं ने न केवल शिरकत की बल्कि लगातार शव के पीछे सैकड़ों बाइक व अन्य वाहनों पर सवार हज़ारो हज़ार युवाओं द्वारा….जब तक सूरज चांद रहेगा अमित भैय…अमर रहे अमर रहे नारे लगाए जाते रहे …..

गैंगेस्टर या ?

                       सोशल मीडिया के इस दौर में युवा गैंगेस्टर/अपराधी के सैकड़ों लाखों की फैन फॉलोइंग है। हद तो ये की गैंगेस्टर युवाओं के एक वर्ग के हीरो और आदर्श बन गए है। तभी तो सोशल मीडिया के दौर में गैंगेस्टर बन चुके है नए सेलेब्रेटी। जिनके एक अपडेट/अपलोड पर मिनट भर में हजारों लाइक्स व कमेंट होते है।इनके हजारों हज़ार रील और शॉट वीडियों दिखाई दे जाएंगे जिनपर लाखो हिट्स होते है। हद तो ये की इनके बड़ी संख्या में फैन पेज तो है ही बाकायदा गैंगेस्टर का एक ऑफिसियल पेज भी होता है जिनपर उसका फरमान जारी होता है। कई तो बाकायदा सोशल मीडिया के जरिए अपना गैंग तक ऑपरेटर कर रहे साथ ही नए गुर्गों को गैंग के भर्ती भी कर रहे है।

आख़िर क्यो?

देवघर कोर्ट में कत्ल कर दिया गया अमित सिंह कोई संत नही था। अपराध की दुनिया का एक नाम भर ही तो था। जो एक हत्याकांड का दोषी था। एक सज़ायाफ्ता मुजरिम था।इंसानी जिंदगियों को खत्म करने का आरोपी और दोषी भी था। फिर भी आखिर क्यों उसकी शव यात्रा में हजारों हजार लोग विशेष कर युवाओं का हुजूम शामिल होकर जब तक सूरज चांद रहेगा अमित भैया का नाम रहेगा के नारे बुलंद कर रहा था ? यह दृश्य कई सवाल खड़े करता है।

                 क्या यह … यह भटकाव के शिकार युवाओं का एक झुंड भर हैं? या बेरोजगारी का दंश है? या इंसान के अंदर मौजूद दबंगई की भावना का प्रदर्शन मात्र है? या शॉर्ट कट से जल्द से जल्द बोल्ड एन्ड ब्यूटीफुल एय्याशी भरी जिंदगी जीने का जरिया है? या अपने दबंग और कुख्यात बॉस के प्रति आभार का प्रदर्शन है? या कानून तोड़ने वाले के प्रति उम्र के एक पड़ाव में पैदा होने वाला आकर्षण है? या फिर क्या यह सड़ते सिस्टम से होते मोहभंग का चरम प्रदर्शन है?

सोचिएगा जरूर और अपनी सोच को हमसे भी साझा करिए ताकि हम भी समझ सके कि …आख़िर क्यो अपराध और अपराधी युवाओं को आकर्षित करते है?

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