बेधड़क ...बेलाग....बेबाक

एक तस्वीर के मायने … आखिर क्यों एक बावर्दी ख़ाकीवाला बीच सड़क पर हाँथ जोडे खड़ा है ? जानिए

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पटना Live डेस्क। कहते है आसमा में भी सूराख हो सकता है बशर्ते एक पत्थर तबीयत से उछाला जाए ……अमूमन ख़ाकीवालो कि तस्वीर ग़लत कारणों से ही समाचारों की सुर्ख़िया बनती है।लेकिन कहते है न बुरे कर्म जंगल के आग की तरह फैलती है पर अच्छाइयों को बड़ा वक्त लगता है पब्लिक डोमेन में पहुचने में।

विगत कुछ घंटे से सोशल मीडिया के विभिन्न मंचो पर बिहार पुलिस के एक बावर्दी पदाधिकारी को बीच सड़क पर हाथ जोड़े खड़े होने की तस्वीर जमकर वायरल हो रहा है। साथ ही लिखा है … ये तस्वीर ढाका थाना क्षेत्र का है बांग्लादेश वाला ढाका नही बिहार के मोतिहारी वाला है।..

दरअसल, तस्वीर में दिख रहा है कि एक शख्स पूरे परिवार पर मोटरसाइकिल एडजस्ट कर कही जा रहा है। हद तो देखिए बाइक पर 3 लोगो की मनाही है और जनाब 7 सदस्यों (मियां बीवी व बच्चे) के साथ सवारी कर रहे है। इसे देखकर ही रूटीन चेकअप पर निकले दारोगा जी खुद को रोक नही पाते है बल्कि हाँथ जोड़ भी लापहरवाह शख़्स जो खुद अपनी अपने परिजनों की और सड़क पर चलने वाले अन्य लोगो के जिंदगी ख़तरे में डाले है को जागरूक करने का प्रयास करने की कवायद में जुट जाते है। अमूमन पुलिसवाले के हाथ कुछ और ही करने को उठते है को जुड़ा देख किसी ने मोबाइल से क्लिक कर लिया और सोशल मीडिया पर साझा कर दिया है।जो वायरल हो रहा है।

खैर,आए आपका तारूफ़ हाथ जोड़े खाकी वाले से कराते है। नाम है चंदन कुमार।हज़रत बिहार पुलिस के दारोगा है।जनाब वर्त्तमान में मोतिहारी के ढाका थाने में तैनात है। मूल रूप से मुजफ्फरपुर जिले के ही मूल निवासी है। बेहद स्पष्टवादी और धुन के पक्के है। दरअसल समाज मे प्रचलित ख़ाकीवालो की नकारात्मक छवि के बावजूद अपनी ड्यूटी के दौरान भी जनसेवा और परमार्थ करने से नही हिचकते है। वही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के जोरदार हिमायती चंदन कुमार सामाजिक, जनकल्याण व विभिन्न विषयों पर अपने सोशल मीडिया पेज के माध्यम से बेबाक और बेलाग ढंग से न केवल टीका टिप्पणी करते है बल्कि अपने विचारों व्यक्त करते है। एक बेहद सकारात्मक व्यक्तित्व के धनी चंदन आमआदमी को जागरूक करने का कोई भी मौका नही गवाते है।

चंदन कही भी तैनात रहे है अपने ड्यूटी के दौरान आमलोगों के बीच जागरूकता बढ़ा के व्यवहारिक परिवर्तन का प्रयास करते रहें है। ताकि एक सुरक्षित सजग और बेहतर समाज के निर्माण में अपनी सहभागिता भी निभा सके। कहने को तो ये महज एक ख़ाकी का भगीरथ प्रयास है पर इसका संदेश और प्रभाव अगर एक अमूल्य जीवन को बचाने में कामयाब रहा तो यह चंदन कुमार का अपने सूबे और अपने लोगो को एक अमूल्य तोहफे के मानिंद होगा।

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