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Siwan News-26 साल के हुए ओसामा शहाब सोशल मीडिया पर देश विदेश से जन्मदिन की बधाई देने वालो का तांता

कर्नल सत्संगी के क्लास रूम से लंदन के लॉ कॉलेज तक के सफ़र में ओसामा शहाब और अब सिवान की आवाम के उम्मीदों का सरबरा दिवंगत कायद शहाबुद्दीन का लाल ओसामा शहाब के जन्मदिन पर मिलिए एक बेहद जहीन शांत शर्मीले और सादगी पसंद बाबू से

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पटना Live डेस्क। विरासत में जब लाखो लाख लोगों की दुआएं हो और उम्मीदों का पहाड़ सामने हो तो उम्र तो बस महज एक सख्या मात्र रह जाता है। ये वो सच्चाई है जिससे हरदिल अजीज गरीबों, मजलूमों की आवाज़ और सिवान की अवाम के कायद रहे पूर्व सांसद शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा शहाब दो चार हो रहे है।ओसामा का आज जन्मदिन है। सोशल मीडिया के तमाम मंचो पर ओसामा के 26वें जन्मदिन की बधाई संदेश देने वालो का तांता लगा हुआ है।क्या सिवान क्या सूरत क्या सहरसा और क्या सियोल देश विदेश में पूर्व सांसद मो. शहाबुद्दीन के चाहे वालो ने ओसामा को अपनी दुआओं और शुभकामनाओ से दिल खोल कर नवाजा है। साहेब को अपना कायद मानने वालों ने शहाब को छोटे साहेब का खिताब अता करते हुए अब अपने भविष्य व वर्त्तमान का सरबरा मान लिया है। आसमान छूती उम्मीदों के खेवनहार और सिवान के साहेब के चश्मों चराग ओसामा शहाब अब महज 26 साल के युवा भर नही रह गए है बल्कि हजारों लाखों लोगों के हकों हुक़ूक़ और भविष्य के सपनो के प्रतिबिम्ब बन चुके है। आइए आपको बताते है इस खास मौके पर ओसामा शहाब के बाबत ..

सिवान से कर्नल सत्संगी से लंदन का सफर

बिहार के युवाओं के यूथ आइकन ओसामा शहाब को योमे पैदाइस के मौके पर आपकी मुलाकात करते है उस शर्मीले और सादगी पसंद बाबु से जो अमूमन बेहद कम बोलता है पिता जैसे नैन नक्स है जो साहेब के चाहने वालो को दिवंगत कायद की झलक देता है। ओसामा शहाब का जन्म सिवान में 12 जून 1995 को हुआ तदुपरांत शुरुआती पढ़ाई घर के माहौल में होने के बाद बाबू ने दिल्ली का रुख किया और दिल्ली के ख्यातिनाम पब्लिक स्कूल कर्नल सत्संगी से 10वीं तक कि पढ़ाई पूरी की तदुपरांत 12वीं की परीक्षा जी डी गोयनका नई दिल्ली से पास करने के बाद आगे की पढ़ाई ख़ातिर लंदन का रुख किया। ओसामा लंदन में अपनी वकालत की पढ़ाई कर रहे थे इधर शहाबुद्दीन कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। समय अपनी रवानी पर था सज़ावार होकर पूर्व सांसद चुनाव लड़ने के अयोग्य हो गए तो अबतक प्रतापपुर में घर संभाल रही साहब की शरीक-ए- हयात हीना शहाब ने घर की चौखट लांघ चुनावी मैदान में शिरक़त करने की तैयारी करने लगी।उधर, लंदन में ओसामा वकालत की पढ़ाई करते हुए आखरी सेमेस्टर से पहले वालिदा को चुनावी समर में साथ देने को सिवान आ गए।

LLB के आखरी सेमेस्टर की पढ़ाई करेंगे पूरी!

वक्त अपनी रवानी पर आगे बढ़ रहा था। दिन महिनों में और महिने सालों में तब्दील होते रहे। ओसामा दिल्ली पटना और प्रतापपुर के बीच परिवार और सियासी विरासत को सँभालने में मुतमइन रहे। इसी बीच वो मनहूस दिन भी आया जब सिवान का कायद इस दुनिया को अलविदा कह गया। संकट की घड़ी में अपने परिवार और समर्थकों के बीच तूफानी खमोशी के बीच अदम्य धैर्य और मजबूत इरादों के साथ हर पल हालात को जिस तरह से ओसामा ने हैंडल किया। उससे समर्थकों और बिहार की अवाम में इनकी मकबूलियत नए आयाम तक जा पहुची है। इसी बीच लंदन न लौट पाने की वजह से आखरी सेमेस्टर की परीक्षा न देने से उनकी LLB की डिग्री मुकम्मल नही हुई है। पारिवारिक सूत्रों के कहना है कि ओसामा अपनी LLB की डिग्री पूरी करेंगे लंदन एक बार जाएंगे।

उत्तराधिकारी कौन होगा?

राजद के बाहुबली नेता और सिवान संसदीय क्षेत्र से सांसद रह चुके मोहम्मद शहाबुद्दीन की मौत के बाद उनके राजनीतिक विरासत को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। शहाबुद्दीन का चालीसवां समाप्त होने के बाद सभी की नजर पूर्व सांसद के परिवार पर है कि अब वे राजनीति को लेकर क्या कदम उठाएंगे। शहाबुद्दीन की राजनीतिक विरासत का उत्तराधिकारी कौन होगा? उनके इसी फैसले के ऊपर शहाबुद्दीन समर्थकों और बिहार के कई अन्य नेताओं की नजरें टिकी हुईं हैं।

बेटे ओसामा शहाब पर सबकी नजरें

सूत्रों की मानें तो दिवंगत नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा शहाब जल्द गृह जिले सिवान समेत बिहार के अन्य जिलों का दौरा शुरू सकते हैं। इनमें गोपालगंज और छपरा जिले की संभावना अधिक है। सूत्रों के मुताबिक, दौरा कर ओसामा राय मशविरा करेंगे, जिसके बाद वे फैसला करेंगे कि आगे क्या करना है।

गौर करने वाली बात है कि शहाबुद्दीन के निधन के बाद से कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। लालू परिवार के रवैये के प्रति समर्थकों में नाराजगी है। ऐसे में मौका देखकर शहाबुद्दीन परिवार को अन्य राजनीतिक दलों के नेता पार्टी में शामिल होने की न्यौता दें रहे हैं, लेकिन इस संबंध में परिवार की तरफ से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। ऐसे में सबकी निगाहें शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब और बेटे ओसामा शहाब पर टिकी हुई हैं।

बिहार में बदलाव की जरूरत

वहीं, कई समर्थकों ने बताया कि शहाबुद्दीन का परिवार जो भी निर्णय लेगा, वो उनके साथ हैं। अब वो समय आ गया है जब बिहार में बड़े बदलाव की जरूरत है। बदलाव के बाद ही बिहार विकास होगा।

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