BiG News – DIG शालीन की सक्रियता और IPS कुमार आशीष की मेहनत का नतीजा- रेप पीड़ित नाबालिक को मिला इंसाफ और बाहुबली विधायक राजवल्लभ यादव को मिली आजीवन कैद की सजा

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#तमाम सियासी दबाव बड़े ऑफर और राजनीतिक दबाव, नहीं आया कार्रवाई के बीच

एफआईआर करने को तैयार नहीं हुई थी महिला थाना पुलिस,शिकायत लेकर पहुंची थी डीआईजी कार्यालय

एसआईटी गठित कर प्रति दिन कार्रवाई की होती रही थीं समीक्षा

सुबूत इकट्ठा करने के दौरान बाहुबली विधायक के गुर्गों ने FSL टीम और पुलिस टीम पर किया था हमला

केस आईओ मृदुला कुमारी को जान से मारने की मिली धमकी, सुबूत इकट्ठा करने नको चने चबाने पड़े

कुल 22 गवाहों की कोर्ट में हुई गवाही,जिसमें सबसे अधिक मेडिकल बोर्ड के 7 डाक्टर

पटना Live डेस्क। IPS अधिकारी का ओहदा और उसके महत्व के बारे में बताने की ज़रुरत नहीं हैं,लेकिन कुछ आईपीएस अधिकारियों की कार्यशैली ऐसी होती है जो उन्हें आवाम के बीच और शासन प्रशासन में एक अलग किस्म की न केवल पहचान देती है बल्कि आम आदमी की नज़रों उन्हें अज़ीम शख्सियत के तौर पर स्थापित कर देती है। यह एक आईपीएस ख़ातिर उसकी कार्यशैली का सबसे बड़ा पुरस्कार होता है जो दुनिया की तमाम अवार्डों पर भारी पड़ता है। जी हां हम बात कर रहे हैं बिहार कैडर के दो आईपीएस अफसरों एक वरीय आईपीएस जो वर्त्तमान में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर है, तो दूसरे है वर्त्तमान में किशनगंज के एसपी के तौर पर आवाम की ख़िदमत कर रहे है, इन दोनों की जिनकी वजह से एक बार फिर आम आदमी के विश्वास की न केवल जीत हुई है बल्कि एक बेहद रसूखदार सियासी बहुबली को तमाम हथकंडे अपनाने के बावजूद उसके दुष्कर्म ख़ातिर कानून द्वारा न केवल आजीवन कैद की सज़ा मिली है बल्कि लोकतंत्र की जड़े और गहरी हुई है।साथ ही आम आदमी की नज़रों में एक बार पुनः कानून के मूल मंत्र “कानून की नज़रों में सब बराबर है” की अवधारणा की जोरदार पुष्टी हुई है।                                                        दरअसल, शुक्रवार को बिहारशरीफ के चर्चित नाबालिग रेपकांड में राजद से निलंबित विधायक राजबल्लभ यादव को उम्रकैद की सजा और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। एमपी-एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश परशुराम सिंह यादव ने सजा सुनाई है। कोर्ट ने पिछले दिनों नाबालिग से रेप के आरोपित विधायक राजबल्लभ यादव सहित सुलेखा देवी, राधा देवी, टुन्नी कुमारी, संदीप सुमन और छोटी कुमार उर्फ अमृता को इस मामले में दोषी करार दिया था। दरअसल, इस जघन्य कांड में राजद से निलम्बित बाहुबली नवादा विधायक तात्कालिक सरकार के घटक दल राजद के मजबूत और दंबग विधायकों में शुमार करते थे। राजद सुप्रीमो से विधायक की गहरी छनती थी। आप अंदाजा लगा सकते है की मामला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले की नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार से पीडि़त परिवार शिकायत को लेकर नालंदा जिले के कई अधिकारियों का चक्कर काट चुकी थीं। जदयू-राजद के गठजोड़ की सरकार थीं। रेप का आरोप राजद के विधायक राजबल्लभ यादव पर लग रहा था। सत्ता से जुड़े पावर कॉरिडोर में हलचल बढ़ी और फिर शुरू हुआ था मामले को दबाने ख़ातिर “प्रेशर पॉलिटिक्स”। सत्ता की गोद मे बैठे विधायक द्वारा धन, मन और बाहुबल के जरिए “अपने कुकर्म” को दबाने की पुरी कोशिश की जा रहीं थीं। महिला थाने ने लड़की की आपबीती सुनने के बावजूद जाँच की बात कह मामले को टरकाने की कोशिश की थी।  लेकिन खुद पर हुए अत्याचार के खिलाफ इंसाफ की जंग लड़ने को ठान चुकी नाबालिक मासूम और पीडि़त परिवार तत्कालीन डीआईजी शालीन से मिलने पटना स्थित उनके दफ्तर जा पहुंचे। लंच टाइम था, तत्कालीन डीआईजी शालीन लंच ख़ातिर घर के लिए निकल रहे थे, की  गैलरी में पीडि़त परिवार से मुलाकात हो गयी। परिजनों के कातर निवेदन और पीड़िता के आंखों से बहते आंसू की धाराए बिना कुछ कहे ही पुरी वारदात की गंभीरता को बयां कर गए। फिर क्या था शालीन ने वारदात के पहलू को जनाने ख़ातिर परिजनों को अपने ऑफिस में बिठाया और मासूम की जुबानी दरिंदगी की कहानी सुनी।

डीआईजी और एसपी नालंदा की जोड़ी 

फिर डीआईजी शालीन ने नालंदा एसपी कुमार आशीष और नवादा पुलिस से घटना के बबात जानकारी लेकर ममाले का सच जाना। ममाले की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी ने नालन्दा एसपी रहे कुमार आशीष को सबसे पहले पीडि़ता के बयान पर बिहारशरीफ महिला थाने में कराकर एफआईआर दर्ज कराने और पीडि़ता का मेडिकल कराने का आदेश दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए तात्कालिक एसपी नालन्दा ने खुद पहल करते हुए पीड़िता के लिखित आवेदन पर महिला थाने में कांड सख्या दर्ज कराया और फिर मासूम का मेडिकल कराने की व्यवस्था की।दरअसल पीड़िता और उसके परिजनों की सुरक्षा भी बेहद जरूरी था, इस तथ्यों को महसूस करते हुए नालन्दा के युवा पुलिस अधीक्षक कुमार आशीष ने उनकी सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था की पहल की।

                   दूसरे दिन तत्कालीन डीआईजी शालीन खुद नालंदा पहुंच गये और पीडि़त नाबालिग लड़की का अपनी और एसपी की मौजूदगी में 164 का बयान दर्ज कराया। तब तक इसकी चर्चा राजनीतिक गलियारें और सूबे में आग की तरह फैल गयी। विपक्षी दलों ने इसे सियासी मुद्दा बनाकर कर सरकार के खिलाफ न केवल मोर्चा खोल दिया बल्कि  शहर को बंद करने की घोषणा करते हुये, माहौल में तुर्शी ला दी। इस वाकये ने एसपी नालन्दा को पीड़िता की सुरक्षा, मामले के अनुसंधान और अकाट्य सुबूतों को कलेक्ट करने की महती भूमिका के अलावे अब शहर की सुरक्षा और माहौल को शान्तिपूर्ण बनाये रखने की कवायद को भी निभाने की चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी से दो चार करा दिया। लेकिन तात्कालिक युवा एसपी नालंदा ने तमाम हालात पर नियंत्रण पाते हुए पीड़िता को न्याय दिलाने के जज़्बे को और मजबूत कर दिया।

जिले समेत राजधानी तक मे सियासी पारा तपने लगा। सत्ता के गलियारों में एक ओर सियासी बयानबाजियों का दौर शुरू हुआ तो दूसरी तरफ धरना प्रदर्शन भी शुरू हो गए। एसपी नालन्दा और डीआईजी शालीन पर सियासी दबाव बढ़ना शुरू हो गये ,बड़े ऑफर साथ ही पावर ब्रोकर लॉबी जबरदस्त ढंग से एक्टिव हो गई। लेकिन तमाम हथकण्डों और सियासी प्रेशर पॉलटिक्स को दरकिनार करते हुए। डीआईजी शालीन नेतृत्व में एसपी नालन्दा ने जांच शुरू किया और एफआईआर की प्रक्रिया पुरी होने के महज 48 घंटे के अंदर ही एसआईटी गठित कर कार्रवाई तेज करने का आदेश दिया।

                  सभी आरोपियों के गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कार्रवाई तेज हो गयी । फरार रहने के स्थिति में राजबल्लभ यादव के ठिकाने पर छापेमारी और कुर्की-जब्ती की कार्रवाई की गयी। तत्कालीन डीआईजी शालीन और एसपी की जोड़ी ने ताबड़तोड कार्रवाई और आरोपियों की गिरफ्तारी का अभियान चलाया की आखिरकार फरार राजबल्लभ यादव को कोर्ट में सरेंडर करना पड़ गया।

                          तत्कालीन डीआईजी शालीन ने केस को मजबूत करने के लिए बिहार अपराध एवं अनुसंधान विभाग (सीआईडी)  से मदद लिया । सीआईडी के सुझाव से मेडिकल बोर्ड गठित हुई ,जिसमें 7 डाक्टर शामिल हुये ।सीआईडी के विपीन कुमार चौधरी और राज कुमार भारती ने ठोस साक्ष्य इकट्ठा कराया और केस डायरी को मजबूती से तैयार हुआ । केस की अनुसंधानकर्ता मृदुला कुमारी सहित चार पुलिसकर्मी की गवाही हुई। इसके साथ ही वोडाफोन, एयरटेल ,आइडिया के नोडल ऑफिसर की गवाही हुई । पीडि़त ,नाबालिग लड़की सहित तीन परिजनों की गवाही हुई। दो ज्यूडिसियल ऑफिसर की गवाही हुई। कुल 22 गवाहों की गवाही और उनकी सुरक्षा का नालन्दा एसपी का प्रयास रंग लाया और रेप के आरोपी राजबल्लभ यादव अन्य आरोपियों को कोर्ट ने न केवल दोषी करार दिया बल्कि सज़ा भी तजवीज़ कर दी। इस तरह पीडि़त परिवार को अंततः न्याय मिला और दोषियो को उनके किये की सज़ा।

सच की जीत के नायक अब भी अपने कर्तव्यों को निभा रहे है। तेज-तर्रार और युवा आईपीएस कुमार आशीष वर्त्तमान में किशनगंज के आवाम की सुरक्षा की जिम्मेदारी बातौर एसपी निभा रहे है। वही सीनियर आईपीएस अधिकारी शालिन केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर देश की सुरक्षा से संबंधित बड़ी जिम्मेवारी संभला रहे है। लेकिन दोनो के अतुलनीय प्रयास ने  पुनः एक बार साबित कर दिया है कि सत्य परेशान हो सकता है पराजित नही।

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