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Video-Shahjahanpur Celebrates Juta Maar Holi:करीब 190 वर्ष पुरानी यह होली पहचान है शाहजहांपुर जिले की

Shahjahanpur में जूता मार होली से पहले प्रशासन अलर्ट, कड़ी सुरक्षा के बीच ढकीं गईं 40 मस्जिदें

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पटना Live डेस्क। देश भर में होली आई रे की गूंज सुनाई देने लगी है।होली एक ऐसा त्योहार है,जिसे कई अनोखे तरीकों से मनाया जाता है। वही देवी  देवताओं की भूमि पर तो होली ऐसे अनोखे तरीके से मनाई जाती है, कि आप भी जानकर हैरान रह जाएंगे। कृष्ण जन्मभूमि मथुरा में बरसाने की लड्डू और लठमार होली से तो हर कोई वाकिफ है। वहीं, शिव नगरी काशी में लोग चिता की राख से होली खेलते हैं। इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।

                 ये एक ऐसा जिला है जहां पूरे देश की सबसे अनोखी होली (shahjahanpur special holi celebration) मनाई जाती है। जहां जूते मार होली (Juta Maar Holi) खेली जाती है। मस्जिद में रंग ना पड़े और कोई सांप्रदायिक विवाद ना हो इसके लिए शहर में निकलने वाले लॉट साहब के जुलूस के रास्ते में पड़ने वाली 40 मस्जिदों को ढक दिया जाता है। सुरक्षा के लिए मस्जिद के बाहर पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाती है।

करीब 190 वर्ष पुरानी हैं यह अनोखी होली

मथुरा,अयोध्या और काशी में तो होली की तैयारियां एक हफ्ते से शुरू हो चुकी हैं। यूपी में हर इलाके की अपनी-अपनी होली हैं और वो सभी विश्व प्रसिद्ध हैं। जैसे मथुरा की लठ्ठमार होली और काशी के मसाने की होली। वैसे तो होली खेले रघुवीरा और बुंदेलखंड की होली भी किसी से कम नहीं है। पर कभी ‘जूता मार होली’ का नाम सुना है। चौंकिए नहीं। करीब 190 वर्ष पुरानी यह होली शाहजहांपुर जिले की पहचान है। फागुन के महीने के इंतजार में शाहजहांपुर के होरियार व्याकुल रहते हैं। कब होली आए और ‘लाट साहब’ (Laat Sahab) को जूते से मारे और भैंसा गाड़ी पर उनका जुलूस पूरे शहर में निकलें। ‘जूता मार होली’ की तैयारियां में जहां जिला प्रशासन जुटा हुआ है। वहीं पुलिस प्रशासन इसकी सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने की रणनीति बना रहा है।

अबतक आपके अंदर भी ‘जूता मार होली’ और ‘लाट साहब’ दोनों को लेकर एक जिज्ञास जागृत हो गई होगी। इस बारे में स्वामी शुकदेवानंद कॉलेज के इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ. विकास खुराना ने बताया कि, ‘यहां होली वाले दिन भैंसा गाड़ी में ‘लाट साहब’ का जुलूस बड़े ही गाजे-बाजे के साथ निकलता है। जुलूस में सभी होरियार, लाट साहब की जय बोलते हुए उन्हें जूतों से मारते हैं।’ आयोजकों ने बताया है कि, इस बार ‘लाट साहब’ दिल्ली से आएंगे जबकि पिछली बार ‘लाट साहब’ रामपुर से लाए गए थे। हर वर्ष ‘लाट साहब’ अलग-अलग शहर से आते है।

स्वागत में निकाला जुलूस बन गई परंपरा

लाट साहब कौन थे इनका होली क्या सम्बंध है इस पर डाक्टर खुराना ने बताया कि, शाहजहांपुर शहर की स्थापना करने वाले नवाब बहादुर खान के वंश के आखिरी शासक नवाब अब्दुल्ला खान पारिवारिक लड़ाई से ऊब कर फर्रुखाबाद चले गए थे। वर्ष 1729 में 21 साल की उम्र में शाहजहांपुर लौटे। नवाब अब्दुल्ला खान हिंदू-मुसलमानों के बड़े प्रिय थे। जब लौटे तो होली का अवसर था। सबने नवाब साहब के संग होली खेली। और ऊंट पर बैठाकर उनका एक जुलूस निकाला, बाद में यह परंपरा बन गई।

अंग्रेजों को हिंदू मुस्लिम सौहार्द रास नहीं आया

डाक्टर खुराना ने आगे बताया कि, वर्ष 1857 तक हिंदू-मुस्लिम दोनों साथ-साथ होली धूमधाम से मनाते थे। पर जब इसकी सूचना अंग्रेजों को हुई तो उनको हिंदू मुस्लिम सौहार्द रास नहीं आया। इसके बाद वर्ष 1858 में बरेली के सैन्य शासक के सैन्य कमांडर मरदान अली खान ने शाहजहांपुर में हिंदुओं पर हमला कर दिया। जिसमें तमाम हिंदू मुसलमान मारे गए। शहर में सांप्रदायिक तनाव हो गया। यहीं अंग्रेजों की नीति थी।

नाम से बदल कर ‘लाट साहब’ रखा

डाक्टर खुराना ने बताया कि साल 1947 में आजादी के बाद शाहजहांपुर के गुस्साए लोगों ने जुलूस का नाम नवाब साहब के नाम से बदल कर ‘लाट साहब का जुलूस’ कर दिया और तब से यह लाट साहब के नाम से जाना जाने लगा। यह जुलूस चौक कोतवाली स्थित फूलमती देवी मंदिर से निकल पुन यही समाप्त हो जाता है।

सुरक्षा व्यवस्था मुस्तैद

शाहजहांपुर मे होली (shahjahanpur special holi celebration) का लॉट साहब का जुलूस भारी सुरक्षा के बीच निकलता है। मस्जिदों को ढक दिया जाता है। मस्जिदों के बाहर भारी सुरक्षा बल तैनात रहता है। ड्रोन के ज़रिए निगरानी की जाती है।

शाहजहांपुर पुलिस अधीक्षक एस आनंद ने बताया कि, होली पर लाट साहब के छोटे और बड़े कई जुलूस निकलते हैं। पुलिस प्रशासन की तैयारियां पूरी हैं। दो ड्रोन कैमरों से इन जुलूसों पर नजर रखी जाएगी। इसके अलावा पांच पुलिस क्षेत्राधिकारी, 30 थाना प्रभारी, 150 उपनिरीक्षक, 900 सिपाही के साथ दो कंपनी पीएसी, दो कंपनी आरपीएफ मुस्तैद रहेंगी।

दशकों पुरानी है परंपरा प्रशासन रहता है मुस्तैद

सांप्रदायिक सौहार्द ना खराब हो इसके लिए पुलिस और प्रशासन हर थाना स्तर पर पीस मीटिंग का आयोजन करता है और आपसी सहमति के बाद मस्जिदों को पूरी तरीके से ढक दिया जाता है। फिलहाल यहां जूते मार होली खेलने की परंपरा दशकों पुरानी है। पुलिस अधीक्षक आनंद का कहना है कि शहर में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी संख्या में पैरा मिलिट्री फोर्से, पीएसी और कई जिलों की पुलिस फोर्स बुलाई गई है जो मस्जिदों और पूरे शहर की सुरक्षा करेगी साथ ही ड्रोन के जरिए भी जुलूस पर नजर रखी जाएगी। अब हम आपको दिखाते है … फाइल फुटेज के माध्यम से Shahjahanpur Celebrates Juta Maar Holi जो करीब 190 वर्ष पुरानी यह होली पहचान है शाहजहांपुर जिले की …..

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