वीडियो -सीएम योगी के फ्लीट के आगे कूदकर काले झंडे दिखाना पड़ा महंगा, नहीं मिली जमानत

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पटना Live डेस्क। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के काफिले के सामने काले झंडे लहराने वालों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। इस मामले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुनील कुमार ने 11 छात्र-छात्राओं की जमानत याचिका खारिज कर दी है। हसनगंज पुलिस द्वारा अदालत में केस डायरी प्रस्तुत करने के बाद शुक्रवार को मजिस्ट्रेट ने जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने माना कि छात्रों का अपराध गंभीर प्रकृति का है इसलिए जमानत नहीं दी जा सकती।

उल्लेखनीय है कि सात जून की शाम लखनऊ विश्वविद्यालय में छत्रपति शिवाजी पर एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे मुख्यमंत्री को छात्र छात्राओं ने काले झंडे दिखाए थे और उनके काफिले के सामने हंगामा किया था। आठ जून को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संध्या श्रीवास्तव ने 11 छात्र छात्राओं को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। छात्रों की जमानत पर सुनवाई के लिये अदालत ने शुक्रवार को केस डायरी तलब की थी। इस बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने मुख्यमंत्री का सुरक्षा चक्र तोड़ने तथा उन्हें काले झंडे दिखाने पर आठ छात्रों को निलंबित कर दिया। इनको विश्वविद्यालय द्वारा दी जाने वाले सुविधाओं से वंचित कर दिया है। विश्वविद्यालय के सूचना प्रकाशन और जनसंपर्क विभाग के निदेशक एनके पांडे के बयान के मुताबिक निलंबित किए गए छात्रों में सतवंत सिंह, नितिन राज, पूजा शुक्ला, अनिल कुमार यादव, अंकित कुमार सिंह, राकेश कुमार, माधुर्य सिंह और अपूर्वा शर्मा शामिल हैं।
सनद रहे कि 7 जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ विश्वविधालय में छत्रपति शिवाजी के एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान गेट नंबर एक के पास छात्र-छात्राएं काले झंडे दिखाते हुए सीएम की फ्लीट के आगे कूद गए। वे समारोह में छात्रों के धन का दुरुपयोग करने का आरोप लगाकर प्रदर्शन व नारेबाजी कर रहे थे। सीएम को काले झंडे दिखाने वाले छात्र-छात्राओं ने दावा किया था कि वे समाजवादी छात्र सभा तथा अन्य छात्र संगठनों से ताल्लुक रखते हैं।