Super Exclusive – नवरुणा को न्याय – सीबीआई ने पप्पू को दबोचा तो मुजफ्फरपुर से जुड़े 18 सफेदपोशो जिनमे एक कद्दावर पुलिस अधिकारी और एक पूर्व विधायक की सांसे भी अटकी,जागते हुए कटी रात

पटना Live डेस्क। एक मजबूर माँ बाप जो अपनी लाडली बिटिया के गुडियों, साइकल, किताबो और तस्वीरो में उसकी यादें संजोए है। वो पल पल हर पल  दरिंदो को बेनकाब करने की 5 साल से लंबी लड़ाई जारी रखे हुए है ताकि उनकी नन्ही गुड़िया को बड़े ही शातिराना ढंग से महज़ ज़मीन के एक टुकड़े ख़ातिर बेहद रहस्मयी हालातो में सदा के लिए खामोश करवाने वाले चेहरों से शराफ़त का नकाब नोच सके और उनकी घिनौनी हक़ीक़त दुनिया को दिखा सके।अब वो वक्त नज़दीक आ गया है।सिसकती यादों और छलकते आंसू अब विराम पाने को है,तकरीबन 5 साल के अथक प्रयास और प्रार्थना का फलाफ़ल मिलने ही वाला है। मुजफ्फरपुर शहर के बहुचर्चित नवरुणा कांड की गुत्थी अब महज कुछ वक्त में सुलझने वाली है।

                        घटना के लगभग पांच साल पूरे होने को हैं। बिहार में अबतक के सबसे हाई प्रोफाइल अनसुलझे मामलों में से एक मुजफ्फरपुर में वर्ष 2012 में हुए नवरुणा हत्याकांड में सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई की है। तकरीबन पांच साल पुराने मामले में साढ़े 3 साल से मामले की जांच कर रही सीबीआई ने पहली गिरफ्तारी की है वो एक बहुत बड़ी गिरफ्तारी की है। गिरफ्तार शख्स शहर की सियासत और ज़मीन कारोबार का एक अहम किरदार है। गिरफ्तारी पटना के सीबीआइ दफ्तर में पूछताछ के बाद की गई। इसके पहले उन्‍हें सीबीआइ ने पूछताछ के लिए हिरासत मे लिया था।कांड के आइओ कुमार रौनक ने राकेश कुमार सिन्हा उर्फ पप्पू की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। हालांकि, वार्ड 23 के पार्षद की गिरफ्तारी के बाबत और कुछ बताने से इन्कार कर दिया है।

आखिर नवरुणा के हत्यारे कौन-कौन लोग है?

वार्ड 23 के पार्षद की गिरफ्तारी के बाद सूत्रों की मानें तो जल्द ही सीबीआइ के अधिकारी पूरे मामले का राज खोलेंगे। इस दिशा में आरोपितों के विरुद्ध सीबीआइ की टीम ने ठोस साक्ष्य इकट्ठा कर लिए हैं।अब आरोपितों की गिरफ्तारी की शुरूआत हो गई है। अगले कुछ दिनों में ही और कई और लोग सीबीआइ के शिकंजे में होंगे। सोमवार को सीबीआइ की टीम ने निगम की सशक्त स्थायी समिति सदस्य वार्ड पार्षद राकेश कुमार सिन्हा उर्फ पप्पू को गिरफ्तार कर लिया है। सीबीआइ की टीम उनसे पूछताछ कर रही है। शुरुआती ऐंठन दिखाने के बाद सीबीआई दस्ते द्वारा दिखाए गए सुबूत और अकाट्य तर्कों के आगे पप्पू की बोलती बंद हो गई और उसने फिर सहयोग करना शुरू कर दिया। साथ ही हर सवाल का जवाब भी देने लगा।

पुलिस,भूमि माफिया और सफेदपोशों की तिकड़ी

तकरीबन साढ़े तीन साल से नवरुणा मामले की जांच कर रही सीबीआई टीम में शामिल जांच अधिकारी रौनक कुमार,सीबीआई के एसपी रोहित कपूर समेत आठ सदस्यीय इस टीम ने इस मामले के हर बिन्दु को खंगालने के बाद सीबीआई ने नवरूना कांड की जांच व कार्रवाई को पूरी करने के लिए सितंबर 2017 तक का समय सुप्रीम कोर्ट से ले चुके हैं। यानी यह महीना निर्णायक साबित होने वाला है।
वही नवरूणा के अपहरण में पुलिस,भूमि माफिया और सफेदपोशों का हाथ होने की बात अतुल्य चक्रवर्ती सीबीआई के अधिकारी और सुप्रीम कोर्ट को  बता चुके हैं। साथ ही इस जघन्य और रहस्यमय कांड में एक कद्दावर पुलिस अधिकारी समेत 18 लोगों में भूमि माफिया और सफेदपोशों की तिकड़ी का अहम रोल है जिनके नाम अतुल्य चक्रवर्ती सीबीआई के अधिकारी और सुप्रीम कोर्ट को बता चुके हैं।इस में कई पुलिस अधिकारियों से सीबीआई पूछताछ कर चुकी है।अब तक हालांकि किसी पर कार्रवाई नहीं हुई है।

भूमि माफिया व पुराने अपराधी रडार पर

इस मामले में शहर के कई भूमि माफिया, सियासी सफेदपोश व जनप्रतिनिधि भी संदेह के घेरे में हैं। इसमें ऐसे भूमि माफिया शामिल हैं जो पूर्व में अपराध कर चुके हैं।अपराध की दुनिया से उनका पुराना नाता रहा है। सीबीआइ की जांच में ऐसे लोग भी संदेह से घिरे हैं। इन सभी के रिकॉर्ड सीबीआइ जुटा चुकी है।

सीबीआइ द्वारा जल्द होगी बड़ी गिरफ्तारी

नवरुणा कांड में कई सफेदपोश सीबीआइ के रडार पर हैं। जिला पुलिस व सीआइडी की विफलता के बाद देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआइ मामले की गुत्थी सुलझाने में जुटी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लगभग साढ़े तीन साल पूर्व सीबीआइ ने जांच की जिम्मेवारी संभाली।इसके बाद जांच दर जांच कई बातें सामने आई। सीबीआइ की जांच में ही यह खुलासा हुआ कि नाले से मिले मानव कंकाल नवरुणा का ही है।सीबीआइ ने यह कहा कि नवरुणा की हत्या हो चुकी है। संदेह के तहत आए कई लोगों का ब्रेन मैपिंग व पॉलीग्राफी कराई जा चुकी है। अब सीबीआइ के रडार पर कई सफेदपोश हैं। वार्ड पार्षद राकेश पप्पू की गिरफ्तारी के बाद सफेदपोश व जनप्रतिनिधियों में बेचैनी बढ़ गई है। सीबीआइ सूत्रों की मानें तो हत्या में शामिल लोगों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इसमें कई बड़े लोग भी सीबीआइ के निशाने पर हैं।