बेटी बचेगी तभी तो पढ़ेगी न साहब – ये बीएचयू में पढ़ने वाली बेटियों के “मन की बात” प्रधानमंत्री जी

पटना Live डेस्क। बीएचयू में छेड़खानी का विरोध कर रही छात्राओं पर  पुलिस ने बरपाया कहर लाठियों से पीट कर कइयों को पहुचा दिया है। पीएम नरेन्‍द्र मोदी कल अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में देशवासियों के साथ विचार साझा करेंगे। लेकिन इससे पहले ही बीएचयू में पुलिस ने छेड़खानी का विरोध कर रही छात्राओं पर लाठी चार्ज कर “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” के पीएम के नारे की कलई खोल कर रख दी है।

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में देर रात करीब 11 बजे वीसी हाउस पर प्रदर्शन कर रही छात्राओं पर पुलिस ने लाठी चार्ज किया। पुलिस ने बीएचयू मेन गेट पर बैठी छात्राओं को बलपूर्वक हटाया। वीसी से मिलने जा रही थीं।सभी छात्राएं वीसी से मिलने छात्र उनके आवास पर जा रहे थे। तभी सुरक्षा कर्मियों से उनकी झड़प हुई। पुलिस के इस बलप्रयोग में मीडियाकर्मी समेत कई घायल हो गए। एक छात्रा की हालत गंभीर बतायी जा रही है।

            देर रात अधिकारियों ने की मीटिंग बीएचयू में छात्राओं के प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन हरकत में आ गया रात 3.30 बजे आईजी, कमिश्नर और डीएम ने बीएचयू के कुलपति गिरीश चंद्र त्रिपाठी के साथ बैठक की।

हवाई फायरिंग की भी खबर

बवाल तक शुरू हुआ जब पुलिस प्रशासन की टीम बीएचयू के मेनगेट पर प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं को हटाने पहुंची। छात्र-छात्राओं के विरोध करने पर दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया। खबर है कि पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में लेने के लिए हवाई फायरिंग भी की।

दो अक्टूबर तक बंद रहेगा कैंपस 

प्रदर्शन को देखते हुए बीएचयू कैंपस को 2 अक्टूबर तक बंद रखने का फैसला किया गया है। वहीं छात्राओं का कहना है कि प्रदर्शन जारी रहेगा। पूरे कैंपस को छावनी में तब्दील कर दिया गया है।पुलिस और पीएसी के करीब 1500 जवान कैंपस में तैनात किए गए हैं।

क्यों हो रहा है प्रदर्शन? 

बनारस हिंदू विश्विद्यालय में पढ़ने वाली एक छात्रा के साथ छेड़खानी हुई थी। छेड़खानी की घटनाओं के विरोध में बीएचयू की छात्राएं पिछले तीन दिन से प्रदर्शन कर रही हैं।प्रदर्शन कर रही छात्राएं कुलपति से आश्वासन की मांग कर रही हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में विश्व प्रसिद्ध बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू)की छात्राएं छेड़खानी के खिलाफ आंदोलनरत हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जिन्हें गंगा ने बनारस बुलाया था, लंबे समय के बाद वाराणसी पहुंचे थे लेकिन आंदोलनरत इन गंगापुत्रियों से बिना मिले भाषण झाड़कर लौटकर दिल्ली आ गए।