जानिए अगर आरोप सच साबित हो गए तो कैसे जा सकती है तेजस्वी यादव की विधानसभा की सदस्यता

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पटना Live डेस्क. लालू प्रसाद परिवार के खिलाफ जैसे-जैसे जांच एजेंसियों का शिकंजा कसता जा रहा  है..वैसे-वैसे उऩके परिवार की मुश्किलें भी बढ़ती जा रही हैं..पिछले दिनों ही आयकर विभाग ने तेजस्वी यादव की दिल्ली की करोड़ों की बेनामी संपत्ति को जब्त कर लिया था…अब ताजा मामले में जांच एजेंसियों ने उनकी धोखाधड़ी का भी पता लगाया है…अगर यह मामला सच साबित हो जाता है तो एबी एक्सपोर्ट लिमिटेड में लाभ का पद संभालने के चलते उनकी विधानसभा की सदस्यता भी जा सकती है.. जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि एबी एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड के 98 प्रतिशत शेयर हासिल करने वाले तेजस्वी यादव ने विधानसभा का चुनाव जीतने के बाद उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले 9 नवंबर 2015 को कंपनी के डाइरेक्टर पद से इस्तीफा दिया…एबी एक्सपोर्ट के 98 प्रतिशत शेयर के मालिक होने के नाते वे 10 जनवरी 2011 से ही वे इसके डाइरेक्टर थे.. तेजस्वी बिहार के उपमुख्यमंत्री का पद संभालने के दौरान भी बतौर कंपनी निदेशक चेक जारी करते रहे…

लालू यादव के करीबी सांसद प्रेम गुप्ता के एक कर्मचारी विजयपाल त्रिपाठी के आवास पर हुई छापेमारी में तेजस्वी के हस्ताक्षर से 9 फरवरी 2016 को मेसर्स ओलिव ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स नक्षत्र बिजनेस लिमिटेड और मेसर्स यश वी ज्वेल लिमिटेड को दिए गए चेक मिले हैं.. इससे स्पष्ट है कि कंपनी के डाइरेक्टर पद से इस्तीफा देने के बाद भी वह कंपनी का कामकाज करते रहे और लाभ लिया.. इसी तरह जब तेजस्वी से पूछा गया कि एबी एक्सपोर्ट के लिए अमित कात्याल कौन सा काम करते हैं, तो वह कोई जवाब नहीं दे पाए…  कॉरपोरेट मंत्रालय के रिकॉर्ड बताते है कि वह कंपनी की ओर से हस्ताक्षर के लिए अधिकृत व्यक्ति हैं…

 

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