नीतीश विरोध का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते तेजस्वी,फिर पूछा कि ‘अब आपकी अंतरात्मा क्या बोलती है’?

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पटना Live डेस्क. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर राजद नेता तेजस्वी यादव हमलावर हैं. रोज कोई न कोई बयान देकर या फिर ट्वीट के जरिए वो नीतीश कुमार पर निशाना साधते हैं. नीतीश कुमार की सरकार के खिलाफ तेजस्वी यादव 9 अगस्त से जनादेश अपमान यात्रा निकाल रहे हैं. मतलब है कि तेजस्वी यादव फिलहाल सीएम नीतीश कुमार के खिलाफ विरोध कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते. ताजा मामला दिल्ली हाईकोर्ट से जुड़ा है जिसको लेकर भी तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार पर निशाना साधा है. तेजस्वी ने एक ट्वीट कर नीतीश कुमार से सवाल पूछते हुए लिखा है कि, मुख्यमंत्रीजी बताए, किसी छात्र का शोध पेपर अपने नाम से छापना कौन सी नैतिकता है? नैतिकता का निर्धारण सहूलियत से करने पर अंतरात्मा क्या बोलती है? इस खबर का संदर्भ यह कहते हुए तेजस्वी ने दिया है कि जब नीतीश कुमार ने अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर इस्तीफा दे दिया और अंतरात्मा की आवाज सुनकर भाजपा से गठबंधन कर सरकार बना ली. अब कौन-सी अंतरात्मा की आवाज सुनकर ऐसा किया है.

दरअसल, नीतीश कुमार पर दिल्ली हाईकोर्ट ने 20 हजार रूपये का जुर्माना लगाया है. यह जुर्माना कॉपीराइट उल्लंघन के मामले में लगाया गया है. सीएम नीतीश ने अपना नाम पक्षकारों से हटाने का आग्रह किया था. लेकिन हाईकोर्ट ने राहत देने से इंकार करते हुए जुर्माना लगाया है.

बता दें कि जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व शोधकर्ता अतुल कुमार सिंह ने दायर याचिका में कहा था कि पटना के एशियन डेवलपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट के सचिव शैबल गुप्ता ने अपनी किताब में उसके द्वारा किए गए शोध को इस्तेमाल किया है. यह कॉपीराइट का उल्लंघन है. याचिकाकर्ता का तर्क था कि चूंकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किताब का विमोचन किया था, इसलिए उन्हें भी मामले में पक्षकार बनाया जाए.

हाई कोर्ट के ज्वाइंट रजिस्ट्रार ने अपने आदेश में कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा दायर याचिका साफ तौर पर कानून का दुरुपयोग करने के समान है. शोधकर्ता को जेएनयू में पढ़ाने वाले उसके दोनों पर्यवेक्षकों ने भी 2009 में रिलीज हुई पुस्तक में उपलब्ध जानकारी को प्रमाणित किया है. ऐसे में इस जानकारी के आधार पर याचिकाकर्ता के पास मुख्यमंत्री को पक्ष बनाने का पूरा अधिकार है.