सिवान और शहाब – नजर वाले को हिन्दू और मुसलमान दिखता है…हम अंधे है…

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पटना Live डेस्क। सिवान और मो शहाबुद्दीन किसी परिचय के मोहताज नही है और वर्त्तमान में दोनों कुछ अधूरे अधूरे से लगते है। फ़ासले दो स्थानों का नही है दो जिलो का नही दो राज्यों का नही हज़ारों किलोमीटर का नही है। ये फ़ासले है एक उम्मीद और एक विश्वास के बीच का। कानून अंधा होता है ये हम आप और तमाम दुनिया जानती है और आम आदमी की आंखे भी होती है कान भी होते है और सही गलत अच्छा बुरा तय करने वाला जेहन भी इसलिए तो वो सच और हक़ को पहचानता है। तभी साहबे सिवान मोहम्मद शहाबुद्दीन सिवान से साऊदी तक और प्रतापपुर से कन्याकुमारी तक दुनिया के जिस कोने में भी उनको चाहने वाले है के दिलो में एक खास मुकाम रखते है।भले ही वो तिहाड़ में कैद कर दिए गए है पर चाहने वालो के दिलो में आज भी उसी शानो शौकत और हरदिल अज़ीज़ तरीके से मौजूद है।


तभी तो सिवान का सुबह की अंगड़ाई और जिले की दिन की आखिरी जम्हाई उनके ज़िक्र के बिना पूरी नही होती। उम्मीदें कायम है और चाहने वाले को विश्वास शेर वापस लौट के आयेगा तभी तो हर सिवानी के दिल से आवाज निकलकर शब्दो का रूप ले लेती है – नजर वाले को हिन्दू और मुसलमान दिखता है- हम अन्धे है- हमे हर शख़्स मे- इंसान दिखता हैं। विकास पुरूष जिन्दाबाद..डा मोहम्मद शहाबुद्दीन साहेब जिन्दाबाद……

चाहने वालो के दिन दिखे है लेकिन उम्मीद बाक़ी है। न्यायापालिका पर यकीन है सच साज़िशों और षड्यंत्रो के बीच से निकल कर वापस आएगा। सिवान का और लाखों की दुआओं के बल पर शेर फिर पलट के आएगा।