मर्सिडीज,मौजमस्ती,मोहब्बत और एक मैग्जीन ने जगजीवन राम की महत्वाकांक्षा को असमय मौत दे दी थी …. आखिर कैसे पढ़े

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पटना Live डेस्क। आज़ाद भारत की पहली गैर कॉंग्रेसी सरकार को असमय लील लेने वाले तथा भारतीय राजनीति के बेहद सशक्त हस्ताक्षर बाबु जगजीवन राम की सियासी उरुज़ एक झटके में समाप्त कर देने का कारण एक सेक्स स्कैंडल माना जाता है।देश की तथाकथित दलीय राजनीति और ऊंचे मापदंडों की पोल खोलने वाले इस सेक्स स्कैडल ने पूरे देश को सकते ले ला दिया था। इस स्कैंडल ने आजाद भारत की पहली गैरकांग्रेसी सरकार को गिरा दिया था। बाबू जगजीवन राम के नेतृत्व जनता पार्टी ने 1977 की केन्द्र में सरकार का गठन किया था। कुछ ही समय बाद एक मैग्जीन में उनके पुत्र सुरेश राम की न्यूड फोटो एक छपे। मैग्जीन के इस अंक का प्रकाशन इंदिरा गांधी की बहू मेनका गांधी ने किया था। देखते ही देखते बाबू जगजीवन राम की सरकार ने सदन में बहुमत खो दिया और उनकी सरकार गिर गई। बाद में चौधरी चरण सिंह कांग्रेस के सपोर्ट से प्रधानमंत्री बने।

जगजीवन राम की सियासत को “झटका”

बात सन 1978 की है। कहते हैं कि दिल्ली के राजनीतिक हलकों में सबको मालूम था कि सुरेश का उठना-बैठना संदिग्ध लोगों के साथ है। पर बाबू जी का कद इतना बड़ा था कि किसी की हिम्मत नहीं होती थी कि वह सुरेश की हरकतों की उन्हें जानकारी दे। उसी दौरान सुरेश राम की एक लड़की के साथ आपत्तिजनक तस्वीरें सामने आ गईं थीं। सुरेश राम और दिल्ली यूनिवर्सिटी के सत्यवती कॉलेज में ग्रेजुएशन की छात्रा सुषमा चौधरी के अंतरंग पलों की तस्वीरें जब सबके सामने आ गईं तो पूरे देश में हंगामा मच गया। इन तस्वीरों को मेनका गांधी ने अपनी पत्रिका ‘सूर्या’ में प्रकाशित कर दिया था। हालांकि, सुरेश राम ने कहा था कि उनका अपहरण कर लिया गया था और ये तस्वीरें जबर्दस्ती खींची गई थीं।

मेरी मर्सिडीज …

इस घटना के बाद सुरेश राम ने एक एफआईआर दर्ज कराया था। इसमें कहा गया था कि वे एक महिला के साथ अपनी मर्सडीज कार में बैठे, तभी दो टैक्सियों पर सवार 10 की संख्या में हथियारबंद लोगों ने उनकी गाड़ी को रोक दिया। 21 अगस्त को यह घटना हुई थी, वहीं इस मामले में एफआईआर के बाद 25 अगस्त को पुलिस ने इस मामले में ओमप्रकाश और त्यागी नाम के दो लोगों को गिरफ्तार किया था। ओमप्रकाश किसान सम्मेलन का ऑफिस सेक्रेटरी था और के.सी त्यागी युवा जनता पार्टी का महासचिव।

इसे जगजीवन राम के खिलाफ एक राजनीतिक षड्यंत्र भी कहा जाता है। लेकिन यह भी सच है कि सुरेश राम पाक-साफ चरित्र के आदमी नहीं थे। वे शराब पीने के आदी थे और लड़कियों के साथ उनके संबंधों की कई कहानियां प्रचलित थीं। कहा जाता है कि अपनी पत्नी के साथ उनके संबंध अच्छे नहीं थे। जहां तक उनका यह कहना कि जोर-जबरदस्ती कर उनकी अश्लील तस्वीरें ले ली गईं, सही नहीं साबित हुआ, क्योंकि सुषमा चौधरी ने यह स्टेटमेंट रिकॉर्ड करवाया कि उन्होंने उन तस्वीरों के लिए पोज़ दिया था। यही नहीं, दोनों के प्रेमपत्र भी पकड़े गए। स्पष्ट है कि दोनों के बीच प्रेमसंबंध थे।

सुषमा चौधरी ने कुबूला था सच

वह अगस्त-सितंबर का महीना था, जब 1978 में 21 वर्षीय सुषमा चौधरी से उनके किसी मित्र ने परिचय कराया था। सुषमा चौधरी उन दिनों दिल्ली यूनिवर्सिटी के सत्यवती कॉलेज में पढ़ती थीं। वह बहुत ही सुंदर थीं। उस जमाने के हिसाब से वह काफी फैशनपरस्त भी थीं। वह हिचहाइकिंग अनजान लोगों से लिफ्ट लेना) कर कॉलेज आया-जाया करती थीं। सुरेश राम से उनका अफेयर जल्दी ही शुरू हो गया और यह लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।उनका एक जानने वाला रविन्द्र सिंह कहता है कि सुरेश राम अक्सर सुषमा को लेने या छोड़ने उनके घर पर आया करते थे। कभी-कभी तो वे शराब के नशे में रहते थे।

सुषमा एक निम्नमध्यवर्गीय जाट परिवार की लड़की थी,पर काफी ऊंची उड़ान भरना चाहती थीं। सुषमा के परिवार वालों का कहना था कि सुरेश राम के साथ उसकी शादी हो गई थी और वह जगजीवन राम के साथ ही उनके 6, कृष्ण मेनन मार्ग वाले सरकारी बंगले पर रहती थीं। वैसे, सुरेश राम ने अपनी बीवी को तलाक नहीं दिया था और इस कांड के सामने आने के बाद उन्हें अपने पिता का घर छोड़ना पड़ा था।

बेटे की अय्याशी बाबू जी पर पड़ी भारी

इस स्कैंडल ने जगजीवन राम के पॉलिटिकल करियर को डुबो डाला। यह साफ दिखाई पड़ता था कि वे मोरारजी देसाई के बाद प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदारों में थे। कहा जाता है कि चौधरी चरण सिंह के कहने पर सुरेश राम को फंसाने के लिए यह साजिश रची गई थी। सुरेश राम आसान शिकार था, क्योंकि वह शराब का बुरी तरह से आदी होने के साथ ही अय्याश तबीयत का भी था। कहते हैं कि उसके पास अश्लील चित्रों का बहुत बड़ा भंडार था। उन दिनों इंटरनेट नहीं होने के कारण इस तरह के लोग अश्लील तस्वीरों के एल्बम रखा करते थे।यह जगजीवन राम को फंसाने की साजिश थी, ऐसा कई लोगों का मानना है।

वरिष्ठ पत्रकार इंदर मल्होत्रा का कहना है कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को सेक्स स्कैंडल में फंसा देना कोई नई बात नहीं है। यह शक और ज्यादा पुख्ता इसलिए लगता है कि सारी तस्वीरें इंदिरा गांधी की बहू मेनका गांधी के संपादन में निकलने वाली मंथली मैगजीन में प्रकाशित हुईं थीं। इंदर मल्होत्रा उन दिनों एक अंग्रजी डेली के एडिटर थे। वे कहते हैं कि तस्वीरें उनके अखबार को भी भेजी गई थीं, पर उन्हें छापने से इनकार कर दिया गया, क्योंकि वे अश्लील थीं और जिस तरह से उन्हें लिया गया था, उसका मकसद सही नहीं लगता था। इंदर मल्होत्रा कहते हैं कि वह समय भारतीय राजनीति में संक्रमण का समय था। जनता पार्टी में बिखराव स्पष्ट दिखाई पड़ रहा था। ऐसे में नंबर-1 कुर्सी के लिए जगजीवन राम का नाम सामने आ रहा था, वहीं चौधरी चरण सिंह की लोलुप दृष्टि भी इस पद पर लगी हुई थी।

वरिष्ठ पत्रकार और लेखक खुशवंत सिंह का कहना है कि उन दिनों वे कांग्रेस के अखबार नेशनल हेराल्ड के संपादक थे। फंड की कमी के काऱण उन दिनों उन्हें और स्टाफ को सैलरी भी नहीं मिलती थी। वे कहते हैं कि एक बार मेनका गांधी की मां अमतेश्वर आनंद और इंदिरा जयसिंह उनसे मिलने आई थीं और कहा था कि वे ‘सूर्या’ के प्रकाशन में मेनका की मदद करें। खुशवंत सिंह कहते हैं कि एक दोपहर जब वे नेशनल हेराल्ड के अपने ऑफिस पहुंचे तो मेज पर एक लिफाफा पड़ा देखा। जब उन्होंने लिफाफा खोला तो कई तस्वीरें थीं। उन्होंने देखते ही पहचान लिया सुरेश राम को। खुशवंत सिंह कहते हैं कि कामसूत्र में 64 तस्वीरें होती हैं, पर यहां 10 थीं।

खुशवंत सिंह कहते हैं कि शाम को उनके पास जगजीवन राम का एक आदमी आया और उसने कहा कि अगर ये तस्वीरें न छापी जाएं तो बाबू जी मोरारजी को छोड़कर इंदिरा गांधी के साथ आ जाएंगे। खुशवंत सिंह ने यह संदेश इंदिरा गांधी तक पहुंचा दिया। इंदिरा गांधी का कहना था कि पहले वे मोरारजी को छोड़ें। जब तक ऐसा नहीं करते, तस्वीरें नहीं छापने की गारंटी नहीं दी जा सकती।

ऐसा नहीं हो सका। सारी तस्वीरें ‘सूर्या’ में छपीं और इसके बाद भारी बवाल हुआ। खुशवंत सिंह सूर्या के कन्सलटेंट एडिटर हुआ करते थे। खुशवंत सिंह कहते हैं कि इन तस्वीरों को हासिल करने के लिए जाल डाला गया था। उनके अनुसार ये इतनी ग्रफिक थीं कि इसे छापने पर अश्लीलता के आरोप में मुकदमा तक चल सकता था। वे यह भी कहते हैं कि स्वयं सुरेश राम ने इन चित्रों को उपलब्ध कराने में सहयोग किया था। उनके अनुसार उसने कमरे में सेल्फ टाइम्ड पोलरॉयड कैमरा लगा रखा था।
जब यह स्कैंडल सामने आया, तब जगजीवन राम के बेटे सुरेश राम की उम्र 40 साल थी और सुषमा का 21 साल। कहा जाता है कि बाद में दोनों साथ रहते थे। 46 साल की उम्र में सुरेश राम की हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई। इसके बाद सुषमा का क्या हुआ, यह शायद ही कोई जानता हो।