लगन हो तो उम्र भी नहीं आते आड़े, राजकुमार वैश्य ने 98 साल की उम्र में पास की एमए की परीक्षा,लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्डस में नाम दर्ज

पटना Live डेस्क. कहते हैं लगन और जज्बा हो तो उम्र कोई मायने नहीं रखती…जी हां..यह सच कर दिखाया है 98 साल के राजकुमार वैश्य ने…जिस उम्र में लोग अपनी जिंदगी से हार चुके होते हैं और और दूसरों के भरोसे ही अपनी जिंदगी चलाते हैं..उस उम्र में राजकुमार वैश्य ने वो कारनामा कर दिखाया जो शायद जवां उम्र के लड़के भी ना कर पाएं….दरअसल राजकुमार वैश्य ने एलएलबी की पढ़ाई करने के बाद करीब 79 साल बाद एमए की परीक्षा सेकेंड डिविजन में पास की…जब नालंदा विश्वविद्याल के रजिस्ट्रार खुद उनके घर परिणाम की जानाकारी देने पहुंचे तो उन्हें खुशी का ठिकाना नहीं रहा…राजकुमार वैश्य ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि परीक्षा में बेहतर नंबर आएंगे…इस उम्र में जब उन्होंने पढ़ार्ई की इच्छा जाहिर की थी तो नालंदा ओपन युनिवर्सिटी के अधिकारियों ने उनके घर पर आकर उनका दाखिला लिया था…राजकुमार वैश्य का भरा पूरा परिवार है…पुत्रवधू प्रोफेसर भारती एस कुमार पटना विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग की पूर्व अध्यक्ष रह चुकी हैं…वैश्य के एक बेटे संतोष कुमार एनआईटी से प्रोफेसर की पद से रिटायर हो चुके हैं…खुद राजकुमार वैश्य कोडरमा स्थित माइका कंपनी में सालों तक जीएम के पद पर रहने के बाद रिटायर हुए हैं..संतोष बताते हैं कि उनके पिता को रिटायरमेंट के बाद पढ़ने और पढ़ाने का शौक बढ़ता ही चला गया…

राजकुमार 2015 में नामांकन लेने के बाद हर दिन छह घंटे पढ़ाई करते थे… हिंदी में एनओयू की पाठ्य सामग्री होने के कारण उन्हें शुरुआती दिनों में थोड़ी परेशानी हो रही थी.. उन्होंने बताया कि पहले सभी पाठ्यक्रम को अंग्रेजी में ट्रांसलेट किया.. परीक्षा अंग्रेजी माध्यम से ही दी..

एमए में नामांकन लेने के बाद लिम्का बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड ने उन्हें देश में सबसे अधिक उम्र का विद्यार्थी घोषित किया था.. इसके लिए उन्हें प्रमाणपत्र सौंपा गया था.. अब परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद सबसे अधिक उम्र में एमए की डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थी का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया है…