देखिये (एक्सक्लूसिव वीडियो) फिर एक बार फूटा “पारस का पाप” इलाज़ के नाम पर इलाज से अधिक लूट का अड्डा बना फाइव स्टार अस्पताल

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पटना Live डेस्क। बिहार की राजधानी पटना के राजा बाजार में स्थित फाइव स्टार अस्पताल एक बार फिर अपनी करतूतों और गैर जिम्मेदाराना हरकतों को लेकर सुर्खियों में है। उल्लेखनीय है कि यही वो अस्पताल है जिसपर पिछले साल वर्ष 2016 के अगस्त महीने की 16 तारीख ककुछ लोगों ने अस्पताल प्रबंधन पर आरोप लगाए हैं कि डॉक्टर मौत के बाद भी एक वृद्ध महिला का इलाज करते रहे। बताया जाता है कि सीतामढ़ी जिले के सिमरा गांव की 62 वर्षीय शैल देवी को इलाज के लिए पारस अस्पताल में 6 अगस्त को भर्ती कराया गया था। अस्पताल में 14 अगस्त तक शैल देवी को एडमिट रखा गया। 14 अगस्त को उन्हें अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई। शैल देवी चेकअप के लिए 15 अगस्त को वापस अस्पताल पहुंची। इस बार उन्हें यह कहकर भर्ती किया गया कि उनकी हालत चिंताजनक है। शैल देवी के बेटे प्रवीण चंद्र का आरोप लगाया था कि  हालत को चिंताजनक बताकर उनकी मां को आईसीयू में भर्ती करवाया गया और फिर मिलने पर रोक लगा दी गई थी। प्रवीण कहते हैं, ‘मरीज की हालत पूछने पर डॉक्टर सिर्फ बहाना बनाते रहे और कई तरह की बीमारी होने की बात करते रहे.’ इस बीच अचानक शीला देवी की बेटी जबरन आईसीयू में चली गई तो पाया कि मानीटर पर पल्स रेट और हार्टबीट जीरो था। बावजूद इसके डॉक्टर बेवजह उसका इलाज करते रहे। प्रवीण ने बताया था कि जब उन्होंने इस बाबत डॉक्टरों से बात की तो पूरी टीम उनसे उलझ गए थे। प्रवीण चंद्र का आरोप है कि उनकी मां की मौत हो चुकी थी उसके बाबजूद पारस अस्पताल प्रबंधन उनके शव को सुपुर्द करने के बजाय उनका इलाज करती रही। प्रवीण ने इस बाबत शास्त्रीनगर थाना में पारस अस्पताल प्रबंधन पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज करवाया था। साथ ही उस पूरे मामले का एक वीडियो खूब वायरल हुआ था। …देखे वो वीडियो

वही ताज़ा मामले में पटना यूनिवर्सिटी के गोल्‍ड मेडलिस्‍ट स्‍टूडेंट संजीत की मौत मामले में बात काफी आगे बढ़ गई। पिछले दो दिनों से पटना के छात्र इस मामले में आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि पटना के पारस अस्‍पताल में इलाज घोर लापरवाही हुई। जबकि इलाज के नाम पर लाखों रुपये वसूले गये थे।
पारस के खिलाफ  छात्रों के आंदोलन को आवाज देने को जन अधिकार पार्टी (लो) के राष्‍ट्रीय संरक्षक व मधेपुरा के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्‍पू यादव सड़क पर उतर आये।पहले पटना यूनिवर्सिटी जाकर मृत संजीत के दोस्‍तों से मिले।इसके बाद धरना देने को पारस अस्‍पताल पहुंच गये। पारस अस्‍पताल वे अचानक आये थे।काफी संख्‍या में संजीत के साथी व पार्टी कार्यकर्ता थे।


अस्‍पताल आते ही पप्‍पू यादव धरना पर बैठ गये। जोर से नारेबाजी होने लगी।अस्‍पताल में हड़बड़ी पैदा हुई। पप्‍पू यादव सीधा आरोप कर रहे थे कि इलाज की लापरवाही के कारण संजीत की मौत हुई है।गड़बड़ इलाज कर अस्‍पताल प्रबंधन ने लाखों रुपये वसूले हैं। उन्‍होंने आरोप किया कि पटना का पारस और रुबन अस्‍पताल इन दिनों इलाज से अधिक लूट का अड्डा बना हुआ है। इसके कारण पब्लिक में आक्रोश है।

पप्‍पू यादव के आंदोलन में शामिल होते ही अस्‍पताल प्रबंधन को उनके साथ बातचीत करने के लिए विवश होना पड़ा और इस बड़े अस्पताल के निदेशक डा. हई ने लंबी बातचीत की। फिर पप्‍पू यादव डा. हई और अस्‍पताल प्रबंधन को लेकर मीडिया से बातचीत में अपने आरोपों को उन्‍होंने फिर से दोहराते हुए कहा कि संजीत के ट्रीटमेंट की फाइल उन्‍होंने देखी है। यह फाइल कहीं से इस बात को प्रमाणित नहीं करती कि जब वह पारस अस्‍पताल आया था, तब किडनी और पैंक्रियाज ने काम करना बंद करना दिया था। एडमिशन रिपोर्ट में बुखार ही लिखा है।
पप्‍पू यादव ने डा. हई के सामने ही इस बात का एलान किया कि अस्‍पताल प्रबंधन इस बात को राजी हुआ है कि वह मृत संजीत के भाई को 8 लाख रुपये की वापसी करेगा। यह काम अगले कुछ दिनों में जल्‍दी से किया जाएगा। पूरे मामले की चिकित्‍सकीय जांच के लिए दिल्ली से डाक्‍टरों की टीम बुलाई जाएगी, जो संजीत के इलाज को पूरा जानेगी। फिर कोई दोषी पाये गये तो उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। उन्‍होंने कहा कि इस मामले को वे आगे भी देखते रहेंगे। पारस और रुबन अस्‍पताल को अपना रवैया बदलना होगा।आगे और कोई शिकायत मिली तो फिर से वे सड़क पर पीडि़त लोगों के साथ उतरेंगे।