विशेष-(वीडियो रिपोर्ट) मकर संक्रांति पर डायबिटिक भी खा सकेंगे तिलकुट, शुगरफ्री तिलकुट से मार्केट गुलजार

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पटना Live डेस्क। मकर संक्रांति पर्व को लेकर शहर के बाजार गुलजार हो गए है। पर्व पर प्रयुक्त होने वाले खाने-पीने की चीजों से बाजार पट गया है। सब्जियों से लेकर चूरा,गुड़,चीनी,भूर्रा,तिलकुट,पापड़ी,गजक,मस्का बाज़ार की रौनक बढ़ा रहे है। तिथियों को लेकर असमंजस की स्थिति में लोग पारंपरिक रूप से 14 एवं 15 जनवरी को भी मकर संक्रांति पर्व मनाएंगे।
दुकानदारों को आमतौर पर पर्व-त्योहारों का इंतजार रहता है। पर्व-त्योहार पर उपयोग में आने वाली वस्तुओं की बढ़ी मांग को देखते हुए दुकानदार भरपूर स्टाक कर ग्राहक से पूरी कीमत वसूलते हैं। मूल रूप से मकर संक्रांति के पर्व में शुद्ध-सात्विक भोजन चूडा-दही की प्रधानता है। शाम में खिचड़ी का प्रयोग होता है। चूडा-दही के साथ विविध प्रकार की सब्जियां भोजन में शामिल की जाती है। भोजन में तिलकुट,पापड़ी,गजक-मस्का भी शामिल करने का प्रचलन बढ़ा है। पहले तिलकुट गया से मंगाया जाता था। अब इसके प्रचलन में आने के बाद गया से कारीगर मंगवा कर होटल, दुकान वाले महीनों पूर्व से तिलकुट बनवाना शुरु कर देते हैं।
वही,बात अगर राजधानी की करे तो पटना सिटी अंचल के भगत सिंह चौक समेत सिटी के बाजारों में इन दिनों तिलकुट का बाजार गर्म है।मकर संक्रान्ति आते ही दुकानदार एक पखवाड़े पूर्व से ही तिलकुट बनाने में जुट जाते है। साल में एक बार आने वाले इस त्यौहार को लेकर राजधानी में दूर- दूर से आये तिलकुट कारीगरोद्वारा तिलकुट कूटने में जुट जाते है और इस व्यवसाय से वे अपने परिवार का निर्वाह करते है। तिलकुट कारीगरों द्वारा ना ना प्रकार के स्वादिष्ट तिलकुट बनाये जा रहे है। मूलतः चीनी,गुड़,मलाई, मावा, ड्राई-फ्रूट वाले तिलकुट लोगो में विशेष तौर से लोकप्रिय है लेकिन इस बार डायविटीज के मरीज भी मकर संक्रान्ति के दिन दही-चुडा के साथ तिलकुट खा सकते है। इसको लेकर तिलकूट के व्यवसाय करने वालो द्वारा शुगर फ्री तिलकूट भी बनाना और बेचना शुरू कर दिया है।ऐसे में शुगर की बीमारी से पीड़ित लोग भी इस पर्व में तिलकूट खा सकते है। ये शुगर फ्री वाली तिलकुट काफी मशहूर हो रहे है और इसकी मांग की खूब है।

इस बाबत पटना सिटी चौक का मशहूर केशरिया तिलकुट दूकान से दूर-दूर के लोग तिलकुट ले जातें हैं।सूबे के विधायक,सांसद और मंत्रियों के यहाँ भी इस दूकान से तिलकुट जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार मकर संक्रान्ति के दिन तील से बनी सामग्री खाना विशेष फल दाई माना जाता है। मकर संक्रान्ति के दिन ग्रहों के अधिपति सूर्य धनु राशी से मकर राशी में प्रवेश करते है।जिससे एक माह का लगा खरमास भी समाप्त हो जाता है और मकर संक्रान्ति के दिन से ही शुभ कार्य प्रारंभ हो जाते है।

 

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