Super Exclusive – मुजफ्फरपुर के पूर्व मेयर समीर कुमार हत्याकांड में शम्भू मंटू गिरोह के सुजीत और गोविंदा नामक शूटर्स की पहचान हुई, राकेश सिंह गिरफ्तार

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पटना Live डेस्क। बिहार के मुजफ्फरपुर में रविवार 23 सितम्बर को सरेआम सरेशाम बाइक सवार दो बदमाशों ने मुजफ्फरपुर के मेयर रह चुके समीर कुमार और उनके ड्राइवर की एके 47 से गोली मारकर हत्या कर दी। इस घटना ने मुजफ़्फ़रपुर पुलिस के शहर की सुरक्षा खातिर लगातार मुस्तैद रहने के दावों पर समीर की हत्या के कुछ घण्टों बाद घटनास्थल के समीप एक निजी स्कूल के सीसीटीवी के कैमरे से मिले वीडियो फुटेज ने प्रश्न चिन्ह लगा दिया।
दरअसल,मिले सीसीटीवी फुटेज ने मुजफ्फरपुर पुलिस के शहर की सुरक्षा खातिर पेट्रोलिंग और मुस्तैदी के दावों की बखिया उधेड़ कर रख दी है। अपराधी शहर के सबसे वीभत्स हत्याकांड को अंजाम देकर चलते बने और स्थानीय थाना को घटना स्थल पर पहुचने में आधा घण्टा लग गया और एसएसपी मुजफ्फरपुर को साढ़े नौबजे फुर्सत मिली घटना स्थल पर पहुचने की।
खैर बात सीसीटीवी के फुटेज की करे तो अपराधी किस कदर बेखौफ थे कि आराम से बाइक पर सवार होकर आए। तय स्थान पर बाइक रोकी और इंतज़ार करने लगे। शायद उन्हें पल पल की जानकारी से अवगत कराया जा रहा था, इस बीच कई छोटे बड़े वाहन गुजरे और फिर जैसे ही समीर कुमार की हुंडई पहुची हत्यारों ने बाइक कार के आगे लगा दी और फिर उन्होंने हथियार को ब्रस्ट पर डाल कर समीर और उनके ड्राइवर को भून कर रख दिया।                       
घटना के बाद आईजी सुनील कुमार ने पूरे हत्याकांड की जांच के लिए एसएसपी हरप्रीत कौर और एसपी सिटी उपेंद्र नाथ शर्मा के नेतृत्व में जांच टीम बना दी है। पुलिस ने सबसे पहला काम  समीर के मोबाइल की कॉल डिटेल निकाल जांच को आगे बढ़ा दिया है। घटना स्थल के आस-पास के लोगों के पूछताछ की जा रही है और समीर के पुराने दुश्मनों के साथ ही शहर और आस-पास में सक्रिय अपराधी गैंगों की भी तफ्तीश की जा रही है। शुरुआती इनपुट्स के बीना पर पुलिस एक शख्स जब समीर कुमार के मोबाइल CDR को खंगाला तो धीरे धीरे अहम सुराग मिलने लगे। मामले की तह तक जाने के क्रम में पुलिस को बेहद अहम सुराग हाथ लगे है।
दरअसल, मुजफ़्फ़रपुर के पूर्व मेयर रहें समीर कुमार उत्तर बिहार के सबसे कुख्यात अंडरवर्ल्ड सरगनाओं में शुमार रहें विपिन ईश्वर उर्फ विपिन सिंह उर्फ प्रोफेसर के खासमखास रहे। उल्लेखनीय है कि  कुख्यात विपिन ईश्वर उर्फ विपिन सिंह उर्फ प्रोफेसर उत्तर बिहार के सबसे कुख्यात टेंडर माफिया में शुमार किया जाता है। इसके सबसे विश्वस्त सहयोगी के तौर पर समीर कुमार रहे थे। बात अगर मुजफ्फरपुर करे तो किस ठेकेदारों से कितना कमीशन लेना है और उक्त काम किसको मिलेगा यह सब समीर कुमार तय करते थे। एक बार समीर जिसके नाम पर सहमति जता देते थे, अपराध जगत का प्रोफेसर आँख मुंद कर मुहर लगा देता था।

अंडरवर्ल्ड का प्रोफेसर – नाम से थर्राता था दरभंगा

विपिन ईश्वर या विपिन सिंह ने जब अपनी पढाई मारवाड़ी कॉलेज में कर रहा था। इसी बीच उसकी प्रेमिका को गुड्डू नामक एक शोहदे ने छेड़ दिया। लेकिन चुकी उस वक्त विपिन शहर में नही था। बात आई गई हो गई। लोगबाग भूल गए पर कुछ दिनों बाद घर से लौटकर विपिन ने गुड्डू गोली मारी,लेकिन वह बच गया। इस गोली कांड के जो गवाह बने उसे भी उसके घर जाकर विपिन ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस क्रम में विपिन को उक्त वक्त के ओपीध्यक्ष ने उसे पकड़ा। पूरी रात उसे पिटाई लगी। पुलिस पूछती रही कि तुम्हारा नाम विपिन सिंह है न ? विपिन का जवाब था,नहीं मेरा नाम विपिन ईश्वर उर्फ प्रोफेसर है। आखिरकार पुलिस ने पूरी रात पूछताछ कर सुबह में छोड़ दिया। इस घटना के बाद विपिन यहां से फरार हो गया। भागने के बाद इसने ठीकेदारी को अपना लक्ष्य बना लिया। नाम थोड़ा बहुत हो चुका था। तब इसने उस दौर में अपने तीन शूटरो करतार सिंह,राकेश सिंह, बबलू सिंह दुधपीवा के दम पर अपरधजगत पर बतौर
बेताज बादशाह राज़ किया।
फरारी के दौरान अपने एक सम्बन्धी बछवाड़ा निवासी भूषण सिंह के बॉडीगॉर्ड रहे करतार से दोस्ती हुई और करतार-विपिन के लिए काम करने लगा और चर्चित हो गया। करतार विपिन उर्फ प्रोफेसर का नाम इस जिलो के अलावा अन्य जिलो में चर्चित हो गया। ठेकेदारी पेशा में उसका प्रवेश हुआ।इंजीनियरों को धमकाना एवं टेंडर मैनेज करना उसके आपराधिक दुनिया का इतिहास बना। रंगदारी नहीं देनेवालों को राकेश,बबलू,करतार द्वारा धमकी दी जाती थी। रंगदारी से मिले पैसे को दिल्ली, मुंबई जैसे जगहों पर जमीन खरीद कर उपयोग किया। बीयर फैक्ट्री, दवा फैक्ट्री यहां तक कि मथुरा में विपिन ने तारकोल की फैक्ट्री जमा लिया।
इसी बीच विपिन ने वर्ष 2008 में तात्कालीन एसपी सुनील कुमार झा के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।साक्ष्य एवं गवाह नहीं रहने के कारण कुछ ही दिनों में जेल से बाहर निकला और समाज की मुख्य धारा से जुड़ गया। लेकिन अपने दुर्दान्त शूटरों के दम पर अपराध जगत का यह बेताज बादशाह रहा अंडर वर्ड के प्रोफेसर के आगे अपराध जगत का दुर्दान्त से दुर्दान्त शूटर हो या आपराधिक गिरोह का सरगना चु  करने की भी औकात भी नही रखता है। हालात ये है कि लाख उछल कूद के बाद भी अपराधजगत से जुड़ा चाहे कितना भी बड़ा नाम हो प्रोफेसर वीपीन सिंह के आगे नतमस्तक रहते है। इसी कुख्यात डॉन के विश्वस्त सहयोगी समीर सिंह रहे। शहर में समीर के सहयोगी के तौर पर अहियापुर के गुड्डू और विश्वनाथ सिंह ठेकेदार रहते थे। वही ,दूसरी तरफ अखाड़ाघाट के कारोबारी विनोद हसारिया के घर पर टेंडर माफिया का  दरबार सजता था।
वही, दूसरी तरफ  दरभंगा और मधुबनी में टेंडड माफिया प्रोफेसर विपिन ईश्वर का काम पूर्व विधायक प्रभाकर चौधरी देखते थे।राकेश कुमार, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार किया हैं वह डॉन वीपीन सिंह का  बेहद चहेता शूटर था।

           डॉन को करोड़ों अरबों की रंगदारी आती थीं। नहीं देने पर जहानाबाद के ठेकेदार मदन सिंह उर्फ मनन सिंह की हत्या डॉन वीपीन सिंह के आदेश पर राकेश सिंह ने लाइन होटल पर कर दिया था। इसमें सरकारी इंजीनियर भी मारा गया था। सुत्र बताते हैं की तत्कालीन मेयर समीर कुमार ने ही ठेकेदार की हत्या करने का इशारा किया था।
पूर्व मेयर समीर कुमार को मुजफ्फरपुर के कारोबारी भरोसेमंद समझते थे। हर एक लफड़े का समाधान समीर कुमार द्वारा किया जाता था। समीर कुमार की तरक्की आर्थिक और समाजिक खूब हुई। ठेकेदारी के सेटिंग के बाद जमीन में कदम बढ़ाया तो क्या मजाल की कोई रोड़ा बनें। चुकी पहले का किये हुये का शोर था। इधर शम्भू-मंटू गिरोह भी जमीन में कूद पड़ा । मुजफ्फरपुर में गिरोह ने सैकड़ों एकड़ जमीन अपने नाम किया है तो लफड़ेला को सुलझाने के लिए भी लोग पहुंचते थे। कई लफड़ले जमीन पर, अब समीर कुमार और शम्भू-मंटू गिरोह में टकराव शुरू हो गया था। बात प्रोफेसर वीपीन सिंह तक पहुंची ,समझौता कर समाधान करने की कोशिश की गयी लेकिन दिल से बात नहीं बनी।मुजफ्फरपुर में जमीन कारोबार का बड़ा फील्ड था, जिसपर शम्भू-मंटू एकक्षत्र राज चाहते थे । इसके लिए समीर कुमार को हटाने के अलावा और कोई दूसरा चारा नहीं था। आका ने खाका तैयार किया और फुल प्रुफ प्लानिंग बना डाली। समीर कुमार का चैप्टर क्लोज़ करने की जिम्मेवारी शूटर गोविंद को मिली। इसमें कई और अपराधियों को भी शामिल किया गया। सीसीटीवी फुटेज में जो मोटरसाइकिल चलाते दिख रहा है वो, गोविंद का बेहद करीबी अपराधी सुजीत कुमार हैं। वहीं एके47 से ताबड़तोड गोलीबारी करने वाला गोविंद हैं।दोनों ही शम्भू-मंटू गिरोह के बेहद विश्वस्त और दुर्दान्त शूटर है।                  वहीं दूसरे मुजफ़्फ़रपुर पुलिस द्वारा मोतिहारी के चकिया से पिस्टल के साथ गिरफ्तार राकेश सिंह एके 47 से हत्याकांडों को अंजाम देने में महारत हासिल रखता है राकेश सिंह पूर्व में एके 47 से झंझारपुर में कई मजदूरों को एक साथ हत्या कर दिया था।राकेश सिंह प्रोफेसर वीपीन सिंह का बेहद खास और शुरुआत स जुड़ा शार्प शूट रहा हैं। पूर्व विधायक प्रभाकर चौधरी का भी समर्थक रहा हैं।

प्रोफसर ने 2008 में किया था आत्मसमर्पण
अपराध जगत के दुर्दान्त प्रोफेसर ने जब तात्कालिक SP सुनील कुमार झा के सामने वर्ष के 2008 में आत्मसमर्पण किया। जेल गया तो साक्ष्य एवं गवाह नहीं रहने के कारण कुछ ही दिनों में जेल से बाहर निकला और समाज की मुख्य धारा से जुड़ गया। उल्लेखनीय है कि विपिन ईश्वर ने जब सरेंडर किया तो मात्र 6 माह के अंदर दर्जनों मामले में जेल से रिहा हो गया था। इस दौरान प्रोफेसर खातिर वकील से लेकर जेल तक का मैनेजमेंट पूर्व मेयर समीर कुमार ने ही किया था।