बिहार सरकार ने भी निपाह वायरस से बचने के लिए जारी की एडवाइजरी, ऐसे करें बचाव

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पटना Live डेस्क। भारत के केरल में निपाह वायरस के कहर को देखते हुए बिहार सरकार ने भी अलर्ट जारी किया है। बिहार सरकार ने शनिवार को लोगों को इस खतरनाक वायरस से बचने के लिए एक एडवाइजरी जारी की है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले केरल, कर्नाटक,हिमाचलप्रदेश,दिल्ली एनसीआर और उतराखंड समेत कई राज्यों में अलर्ट जारी किया जा चुका है। इन राज्यों के बाद गुरुवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी आम जनता और स्वास्थ्य सेवा कर्मियों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। गौरतलब है कि केरल में इस वायरस के चलते 12 लोगों की मौत हो चुकी है।

चमगादड़ नहीं हैं निपाह वारयस के मुख्य कारण

बता दें कि निपाह वारयस के बारे में आई एक रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है कि इस संक्रमण के फैलने का मुख्य कारण चमगादड़ नहीं हैं। अधिकारियों ने केरल में 12 जान लेने वाले निपाह वायरस के फैलने के पीछे चमगादड़ के होने की बात से इनकार किया है। बता दें कि भोपाल में उच्च सुरक्षा पशु रोग प्रयोगशाला में चमगादड़ और सूअरों के कुल 21 नमूने भेजे गए थे, जिनमें सभी परिणाम नकारात्मक पाये गए।

कहां से आया है निपाह वायरस

सबसे पहले मलेशिया के कंपंग सुंगाई निपाह से इस वायरस की जानकारी मिली इस कस्बे के नाम पर ही इस वायरस का नाम निपाह रखा गया। भारत मेें सन2001 में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी मेें निपाह वायरस से लोगों के बिमार होने के मामले सामने आए। हाल ही में भारत में इस वायरस ने केरल से दस्तक दी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस वायरस के प्रभाव से केरल में एक दर्जनों लोगों की मौत हो गई है।

निपाह वायरस

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक निपाह एक ऐसा वायरस है जो चमगादड़ों से इंसानों में फैलता है। यह जानवरों और इंसानों दोनों में गंभीर बीमारियों की वजह बन सकता है। इस वायरस का मुख्य स्रोत फल खाने वाले चमगादड़ (फ्रूट बैट) हैं। इन्हें फ्लाइंग फॉक्स के नाम से भी जाना जाता है।

बिहार में स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवायजरी

देश के विभिन्न राज्यों में निपाह वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए बिहार के स्वास्थ्य विभाग ने भी एलर्ट और एडवायजरी जारी की है। इस एडवायजरी में निम्न बातोें का जिक्र किया गया है।

इस बिमारी के प्रमुख लक्षण

अचानक बुखार का आना,सिर दर्द,मांसपेशियों में दर्द , मानसिक भ्रम का होना,उल्टी जैसा महसूस होना अथवा उल्टी आना।निपाह वायरस मस्तिष्क ज्वर से भी जुड़ा है। इससे मस्तिष्क में सूजन को सकती है।निपाह वायरस से ग्रस्त मरीज 24 से 48 घंटे में कोमा में भी जा सकता है।

कैसे फैलता है निपाह वायरस

चमगादड और सुअर जैसे जानवर इस वायरस के वाहक है। संक्रमित जानवरों के सीधे संर्पक में आने या इनके संपर्क में आने या इनके संपर्क में आई वस्तुओं के सेवन से निपाह वायरस का संक्रमण होता है।निपाह वायरस से संक्रमित इंसान भी संक्रमण को आगे बढाता है।निपाह वायरस के पॉजिटिव मरीजों की देखभाल की जानी चाहिए और जरूरत पड़ने पर उन्हें स्पेशल चिकित्सा कक्ष में भर्ती कराना पड़ सकता है।

मरीजों की जांच ELSIA की ओर से NIV पुणे में की जाती है।

बचाव के तरीके

चमगादड़ों वाले इलाकों में अत्यधिक सावधानी बरतें।
सुअर अथवा सुअरों के संपर्क में रहने वाले लोगों से दूर रहे।गिरे हुए अथवा जानवरों के जूठे फल खाने से बचें।
केरल से आने वाले फलों को अच्छी तरह धोकर खाएॅं।
केले आम एवं खजूर को लेकर विशेष सर्तक रहें।

ताड़ी का सेवन न करे

वायरस का प्रकोप कम होने तक ताड़ एवं खजूर के रस ताड़ी नीरा का सेवन न करें।यदि फल व सब्जियों पर जानवरों के काटे का निशान होतो उन्हें खरीदने से बचे।
अच्छी तरह से पका हुआ और साफ सुथरा घर का खाना खाएॅं।स्वच्छता का पूरी तरह से ध्यान रखे।

बचाव के तरीके

#चमगादड़ों वाले इलाकों में अत्यधिक सावधानी बरतें।
#सुअर अथवा सुअरों के संपर्क में रहने वाले लोगों से दूर रहे।गिरे हुए अथवा जानवरों के जूठे फल खाने से बचें।
#केरल से आने वाले फलों को अच्छी तरह धोकर खाएॅं।
#केले,आम एवं खजूर को लेकर विशेष सर्तक रहें।
#वायरस का प्रकोप कम होने तक ताड़ एवं खजूर के रस ताड़ी नीरा का सेवन न करें।
#यदि फल व सब्जियों पर जानवरों के काटे का निशान होतो उन्हें खरीदने से बचे।
#अच्छी तरह से पका हुआ और साफ सुथरा घर का खाना खाएॅं।
#स्वच्छता का पूरी तरह से ध्यान रखे।