हाजीपुर: रुपए की लालच ने महनार BDO और लेखा सहायक को किया अंधा,घूस की रकम के साथ ही निगरानी ने धर दबोचा

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विनय कुमार गुप्ता/हाजीपुर

पटना Live डेस्क. जब भ्रष्टाचार का नशा सर पर सवार हो जाए..तो वो ना तो पद देखती है..ना प्रतिष्ठा देखती है..और शायद पारिवारिक संस्कार भी लोग भूल जाते हैं..घूसखोरी की शिकायत पर निगरानी के हत्थे चढ़ने वाले महनार के बीडीओ प्रमोद कुमार के बारे में सोचिए..बिहार सरकार की नंबर वन नौकरी..आगे..पीछे मातहतों की टोली…एक इशारे पर अर्दली तैयार..लेकिन जब रुपयों की भूख आदमी को लग जाती है तो वो सबकुछ एक झटके में ही भूल जाता है..और तो और दफ्तर में बैठे-बैठे ही वो कमजोर कड़ी ढूंढता है जिससे उसे घूस के रुपए कमाने में दिक्कत न हो..चुंकि मामला रुपयों का होता है इसलिए वो कमजोर कड़ी भी दफ्तरों में आसानी से दर्जनों की तादाद में मौजूद रहते हैं..जो एक अधिकारी को रुपए कमाने का रास्ता बताते हैं..वो एक दलाल की तरह काम करते हैं जो रुपए देने वाले और काम करने वाले अधिकारी के बीच एक कड़ी की तरह काम करता है….अब जरा  इस घूसखोर बीडीओ साहब का मामला जानिए..सरकार ने इनकी सुविधा के लिए क्या नहीं दिया है..एक बढ़िया सा दफ्तर..आने जाने के लिए गाड़ी..ड्राइवर..नौकर सबकुछ..लेकिन महनार के तो इस घूसखोर बीडीओ साहब की आंखों पर तो मानो पर्दा पड़ा था..वो तो रुपए कमाने के पीछे पड़ा था…रोज नए-नए ग्राहक ढूंढता था जो अपना काम कराने के बदले में इसे मुंहमांगी रकम देते थे…इस घूसखोर ने तो बकायदा दफ्तर के ही लेखा सहायक निक्की कुमार को अपना दलाल के तौर पर ठीक कर रखा था..जिसका मकसद था..ग्राहकों को ठीक करो.. तुम भी कमाओ और मुझे भी हजारों में रुपए पहुंचाओ..इस घूसखोर बीडीओ ने काम के हिसाब से रुपए फिक्स कर दिए थे..इसका दलाल लेखा सहायक ग्राहकों को प्रलोभन देता था..सही या गलत काम कराने का प्रलोभन और इसके बदले वसूलता था मनमाने रुपए….गलत काम कराने वाले तो इसके निशाने पर थे ही..साथ ही सही काम कराने वालों को भी ये दोनों खूब परेशान करते थे..जब काम कराने वाला इनके मुताबिक रुपए इन्हें पहुंचा देता था..तब वो इनका काम कर इन्हें देते थे..तबतक ये उनकी फाइल दबाकर बैठते थे..मतलब जबतक चढ़ावा ना आए तबतक किसी का काम मत करो..और उसे दुनियाभर के बेकार के नियमों और कानूनों में उलझा कर रखो…लेकिन कहा गया है न कि सौ चोट सोनार की तो एक चोट ही लोहार की…बस यही कहावत फिट बैठ गई इऩ दोनों घूसखोर अधिकारियों पर…दरअसल महनार के रहने वाले सोनू पासवान अपने काम के सिलसिले में बीडीओ से मिला..

 

चुंकि वो पूरे कागजात के साथ उससे मिला था सो उसे भरोसा था कि बिना किसी झंझट के उसका काम हो जाएगा..लेकिन उसकी सोच गलत निकली..जिसके उपर घूसखोरी के  रुपए कमाने का नशा सवार हो भला वो कहां मानने वाला था…एक-दो बार बुलाने पर सोनू ने सोचा कि काम के बदले में प्रखंड दफ्तर के चक्कर तो लगाने ही पड़ते हैं सो वो चक्कर लगाता रहा..बीडीओ साहब के आगे-पीछे करता रहा..तय योजना के मुताबिक बीडीओ कभी उसे अपने पास बुला लेते तो कभी उसे लेखा सहायक के पास भेज देते…ऐसा सिलसिला कुछ दिनों तक चलता रहा..और एक दिन अचानक उसके सर पर आफत की बिजली टूट गई जब लेखा सहायक ने उससे खुलेआम घूस की मांग कर डाली…पसोपेश में पड़े सोनू ने लेखा सहायक को मनाने..समझाने की तमाम कोशिशें की..अपने सारे कागजात दिखाए..लेकिन भला घूसखोर कहां मानता है कोई बात…लेखा सहायक ने सोनू से साफ कह दिया कि बिना रुपए के यह काम होना बेहद मुश्किल है…हैरानी की बात यह है कि सोनू को लेखा सहायक ने यह खुलकर कहा कि इस काम में चालीस हजार रुपए लगेंगे…तभी यह काम होगा….लेखा सहायक ने यह भी कहा कि इन चालीस हजार रुपयों में से बीडीओ साहब 30 हजार रुपए लेंगे और वो खुद 10 हजार रुपए लेगा…इतने सारे रुपयों की बात सुन सोनू पहले तो काफी गिड़गिड़या ..मन्नतें कीं..लेकिन भला घूसखोर कहां सुनता है किसी की…बात न बनती देख सोनू ने दोनों को रुपए देने की बात मान ली..लेकिन दफ्तर से बाहर होते ही उसने यह ठान लिया वो इन दोनों को सबक सिखकर ही दम लेगा…बस क्या था सोनू ने पटना निगरानी से संपर्क किया और सारी घटनाओं की जानकारी दी..निगरानी ने सोनू को सारा मामला समझाया और तय योजना के मुताबिक काम करने की सलाह दी..बस क्या था तय समय के मुताबिक सोनी चालीस हजार रुपए लेकर महनार ब्लॉक पहुंचा और लेखा सहायक से जाकर मिला…सोनू ने खुद से घूसखोर बीडीओ को रकम देने की बात कही..लेखा सहायक भी सोनू की बात मान गया और बात पक्की हो गई..इधर निगरानी की टीम भी मौके पर पहुंच  चुकी थी..सोनू ने बीडीओ के दफ्तर में रुपए निकालकर जैसे ही बीडीओ और लेखा सहायक को दी..निगरनी ने दोनों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया..और उनसे घूस में दिए हुए रुपए भी बरामद कर लिए…..