Exclusive – नीला ने किया “बिहार की सियासत का आसमान साफ” जारी रहेगा महागठबंधन, समीकरण तय

पटना Live डेस्क। बिहार समेत पूरे भारत और पड़ोसी मुल्को में भी अपनी गवई अंदाज़ में लच्छेदार भाषण, मसखरेपन वाले मिज़ाज़ और सियासी बाजीगरी के लिए खातिर प्रसिद्ध लालू प्रसाद यादव एक बार फिर कानूनी तौर पर सीबीआई के शिकंजे में फसते दिखाई दे रहे है। लेकिन इस बार मुसीबत बड़ी और बेहद जटिल है। लालू यादव के सियासी उर्ज़ को चारा घोटाले ने लील लिया तो दूसरी तरफ कानूनी लड़ाई और एक मामले में सज़ायाफ्ता होकर चुनावी प्रक्रिया से प्रतिबंधित होने का दंश झेल रहे लालू यादव के लिए सीबीआई फिर एक बार मुश्किलें खड़ी करती प्रतीत हो रही है। फिर एक बार दाव पर न केवल लालू है बल्कि पत्नी राबडी देवी के संग उनके छोटे बेटे का सियासी कैरियर भी है। साथ ही राजद के भविष्य पर भी कारे बादल मंडराते प्रतीत हो रहे है। अगर सियासी शगूफे बाजी और करतबों पर नज़र दौड़ाए तो हालात राजद के संकट को इशारा कर रहे है। लालू यादव दोतरफा हमले की भीषणता को झेल रहे है। परिवार और पार्टी दोनों संकट में है। लेकिन तारीख़े गवाह है लालू हर बार मुसीबतों से लड़कर जबरदस्त ढंग से वापसी करते है।

                       शुक्रवार को सीबीआई द्वारा 12 स्थानों समेत लालू राबडी के पटना स्थित निवास पर की गई छापेमारी और सूबे के डिप्टी सीएम तेजस्वी के भी एफआईआर में नामित होने के बाद सूबे की वर्त्तमान महागठबंधन सरकार के भविष्य रूपी आसमान पर कारे करे बादल और बिजलिया कड़कने लगी। वही विपक्ष ने ये समझा कि अब तो बस कुछ घंटों की मेहमान है वर्त्तमान सरकार लेकिन चारा घोटाले के एक मामले में पेशी पर रांची गए लालू के पटना से लौटते हो सियासी आसमान साफ होने शुरू हो गया। सबसे पहले लालू ने परिजनों को संबल दिया और अपने सियासी साथियों को शांत रहने और कानून का सम्मान करने का आदेश देते हुए बिलावजह बयानबाजी से दूर रहने का सख्त निर्देश दिया। फिर आई प्रेस से मुखातिब होने की बारी तो हर घटना को अपने फेवर में इस्तेमाल के मास्टर लालू ने सीबीआई रेड को भाजपा, आरएसएस और मोदी कि साज़िश बताकर कहा कि फाँसी पर चढ़ जाएंगे पर मोदी और शाह के अहंकार को तोड़ देंगे।

                            फिर बारी आई समर्थकों में जोशो खरोश को बढ़ाने का तो बड़ी लड़ाई खातिर तैयार रहने को बोला की बीजेपी के साथ आर-पार की लड़ाई का एलान किया। कल रात में लालू यादव अपने परिवार के साथ समर्थकों से मिले। लालू परिवार को अपने बीच पाकर उनके समर्थकों ने जमकर नारेबाजी की।


फिर बारी आई महागठबंधन के भविष्य पर उठते सवालों और डिप्टी सीएम के एफआईआर में नामित होने के बाद नीतीश कुमार के स्पष्ट रुख की मेरी कैबिनेट में को चार्जशीटें व्यक्ति मंत्री पद पर नही रह सकता है। मामला चुकी खुद के बेटे के सियासी भविष्य और सूबे की सरकार के विपक्ष की गोद मे जाकर बैठने के डर का था। लालू यादव ने वक्त की नजाकत को समझते हुए। अपनी हर सियासी मूव का आंकलन और राजद के अंदर बनते एक अवांछित दबाव समूह और विपक्षियों की चाल में फसते कुछ के बाबत जानकारी इकट्ठा की। पल पल बदल रहे सियासी माहौल और सूबे की सरकार में शामिल राजद के मंत्रियों (सिवाय अब्दुलबारी सिद्दीकी वो भी बुलाने पर आए) की लालू आवास से अनुपस्थिति रहे। अब दबाव लालू पर था महागठबंधन को बचाने का तो लालू ने नीतीश कुमार जो राजगीर प्रवास है को स्पष्ट कर दिया है कि तेजस्वी चार्जशीट में नामित होने से पहले ही मंत्रिमंण्डल से इस्तीफा दे देंगे।

साथ ही लालू ने पार्टी के बेहद सम्मानित अल्पसंख्यक नेता और वर्त्तमान सरकार में वित्त मंत्री के ओहदे पर मौजूद अब्दुल बारी सिद्दीकी का नाम बतौर उपमुख्यमंत्री आगे बढ़ा दिया है। यानी फिर एक बार अपनी सियासी चालो के जरिये फिर एक बार बॉल को नीतीश के पाले में डाल दिया है। साथ ही राजद में टूट के बन रहे समीकरण को भी एक झटके में आधारविहीन कर दिया है।