Super Exclusive – रालोसपा के सुधीर ओझा पर की भाभी ने लगाया अर्धनग्न करने का आरोप,रसूख की वजह से इंसाफ खातिर दर दर भटक रही पीड़िता

पटना Live डेस्क। मुज़फ़्फ़रपुर ज़िला के सदर थाना क्षेत्र के लहलादपुर ,पताही निवासी निर्मला ओझा ने रालोसपा के एक बड़े नेता एवं अधिवक्ता सुधीर ओझा पर गंभीर आरोप लगाया है।निर्मला ओझा का कहना है कि वो अपने पताही ग्राम स्थित अपने पुस्तैनी घर का मरम्मत का कार्य करवा रही थी। तभी उनके चचेरे देवर सुधीर ओझा एवं उनका परिवार निर्मला ओझा पर धावा बोल दिया। वही घर का काम बंद करने की धमकी देने लगा।वही निर्मला ओझा के द्वारा मना करने पर उनका चचेरा भतीजा अमरजीत कुमार उनपर कुदाल से जानलेवा हमला किया ,अपितु अपने सूझ बूझ से निर्मला ओझा ने अपनी जान बचाई।                                                                                          तत्पश्चात सुधीर ओझा अपने हाथ मे पानी का पाइप लेकर निर्मला ओझा पर पटाने लगा जिससे निर्मला ओझा पूरी तरह भींग गई और ठंड से कापने लगी।निर्मला ओझा ने बताया कि उसके बाद सुधीर ओझा, उनका बेटा शुशांत ओझा,अमरजीत कुमार और उनके सहयोगी उनको जान से मारने के नियत से जबरदस्ती घर के भीतर ले गए। मानवता को शर्मशार करते हुए उनलोगों ने निर्मला ओझा को अर्धनग्न कर बेइज्जत किया। निर्मला ओझा के जोर जोर से चिल्लाने के कारण अगल बगल के लोग एकत्रित होने लगे। तब जाकर सुधीर ओझा  उन्हें घर से बाहर निकाल कर अचेता अवस्था मे बाहर छोड़ दिया । निर्मला ओझा ने बताया कि शुशांत ओझा ने घर मरम्मती के लिए रखे 20 हज़ार रुपया उनके पर्स से निकाल लिया। वही सुधीर ओझा ने निर्मला ओझा के गले का चैन झपट्टा मार कर धमकी दिया कि वो वकील होने के साथ साथ राजनीतिक व्यक्ति है।उनको सरकारी बॉडी गार्ड मिला हुआ है। इस कारण इस घटना की जानकारी कही भी देने से कोई कार्यवाई नहीं होगी । वही सुधीर ओझा ने निर्मला ओझा को जान से मारने की धमकी भी दी। निर्मला ओझा ने बताया कि घटना के पश्चात वो उसी अवस्था में सदर थाना पहुँची और घटना की जानकारी थानाध्यक्ष को दिया। आपको बता दे कि निर्मला ओझा के पुत्र भास्कर ओझा ने बताया कि सदर थाना में उनकी प्राथमिकी दर्ज कर लि गई है। जिसका नंबर 694/17 है।

अपितु अभी तक कोई उचित कार्यवाई नहीं हुई है क्योकि एक अधिवक्ता एवम पार्टी में उच्चतम पद पर होने की वजह से और लगातार एक के बाद एक अधिकारीयों पर मामला दर्ज करवाना सुर्खियों में रहना इनकी आदत है जिसके डर से भी पदाधिकारी डरे सहमे अपना काम करने में विश्वास रखते है उलझने में नही। थक हार कर निर्मला ओझा ने महिला आयोग का दरवाजा खटखटाया है।
गौरतलब है कि राजनीतिक पहुँच के साथ साथ अधिवक्ता सुधीर ओझा पर कानून क्या कार्यवाई करती है ? क्या निर्मला ओझा को इंसाफ मिलेगा ? इन तमाम सवालों का जबाब आनेवाला समय ही बतायेगा।