Big News – HC ने लालू यादव को दी बड़ी राहत प्रोविजनल बेल 17 अगस्त तक बढ़ाई

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पटना Live डेस्क। झारखंड हाई कोर्ट ने लालू प्रसाद और जगन्नाथ मिश्र की प्रोविजनल बेल की अवधि बढ़ा दी है। जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की कोर्ट ने लालू यादव की छह सप्ताह और जगन्नाथ मिश्र की 25 जुलाई तक जमानत की अवधि बढ़ाई है। लालू की ओर से कोर्ट को बताया कि एशियन हार्ट संस्थान में उनका फिशचुला का ऑपरेशन 24 जून को हुआ है। रिकवरी में तीन माह का समय लगेगा। इसके बाद लालू यादव के वॉल्व और क्रोनिक किडनी का इलाज होना है। उन्हें प्रतिदिन 70 यूनिट इंसुलिन के साथ अन्य दावा दी जा रही है। सीबीआई में इसका विरोध करते हुए कहा कि फिशचुला का ऑपरेशन एम्स और रिम्स में हो सकता था। जिस पर कोर्ट ने कहा कि जब इस बीमारी के बारे में पता था और लालू इन अस्पतालों में भर्ती थे तो ऑपरेशन क्यों नहीं किया गया।
लालू की ओर से 4 माह तक बेल की अवधि बढ़ाए जाने की मांग की गई। कोर्ट ने 17 अगस्त तक बेल की अवधि बढ़ाई है। अगली सुनवाई के दौरान लालू की मेडिकल रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करनी है। बीमार लालू की ओर से अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी,चितरंजन कुमार और देवर्षि मंडल ने पक्ष रखा।              
विदित हों कि चारा घोटाला मामले में सजायफ्ता लालू यादव की जमानत अवधि रांची हाईकोर्ट ने बढ़ाकर तीन जुलाई तक कर दी थी। इस जमानत याचिका पर आज सुनवाई हुई है। यह मामला हाइकोर्ट के कॉज लिस्ट में 31,35 और 48 नंब पर सूचीबद्ध है। बीमारी की वजह से लालू यादव को 11 मई से 6 हफ्तों की बेल मिली थी।
इसके बाद लालू यादव इलाज के लिए मुंबई और बेंगलुरु भी गए थे। इलाज के दौरान उनकी बड़ी बेटी राज्यसभा सांसद मीसा, बड़े बेटे तेज प्रताप और बहू एश्वर्या हमेशा उनके साथ थे। इसके पहले लालू यादव अपने बड़े बेटे तेज प्रताप की शादी में शामिल होने के लिए एक सप्ताह के पैरोल पर बाहर आए थे। लालू यादव दिल्ली के एम्स सहित कई जगहों पर अपना इलाज करा चुके हैं, लेकिन अभी उनकी तबियत पूरी तरह से ठीक नहीं हुई है।    

लालू यादव हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, किडनी, हार्ट की समस्या सहित कई अन्य बीमारियों से पीड़ित हैं। पहले भी उनका इलाज रांची के एम्स में किया गया है। लालू यादव ने बेहतर इलाज के लिए जमानत याचिका दायर की थी। वह जमानत पर हैं। लालू यादव को पिछले साल 23 दिसंबर को चारा घोटाले में सजा हुई थी। इसके बाद उन्हें चारा घोटाले के दो और मामले में दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई थी।