पीएम नरेंद्र मोदी के बिहार दौरे को लेकर लालू प्रसाद ने साधा निशाना,कहा-‘हवाखोरी करने आ रहे हैं पीएम’

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पटना Live डेस्क. राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है. लालू प्रसाद ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी का बिहार आना तो एक बहना है. उन्होंने कहा कि जब बाढ़ का पानी उतर गया है तो वो पीड़ितों को देखने आ रहे हैं. पीएम पर निशाना साधते हुए लालू प्रसाद ने कहा कि वो लोगों को देखने नहीं बल्कि हवाखोरी के लिए आ रहे हैं. लालू ने कहा कि बिहार में हर साल बाढ़ आती है और पीएम मोदी इस साल बेहाल लोगों का हाल जानने आ रहे हैं.

उन्हें इसी साल क्यों याद आयी है बिहार के बाढ़ की? इस बार बांधों की दुर्दशा हुई है. इस बार बिहार के लोगों का दर्द आज ही समझ में आ रहा है इन लोगों को. केवल अपना स्वार्थ दिखता है.

लालू ने नीतीश कुमार और सुशील मोदी पर भी तीखा हमला बोला और कहा कि ये लोग सृजन घोटाले में आकंठ डूबे हुए हैं, और नीतीश कुमार अपना पाप छुपाने के लिए जाकर भाजपा के साथ मिल गए. उन्हें डर था कि सृजन घोटाले की पोल खुलेगी तो फंसना ही है और उसके बाद नरेंद्र मोदी तो छोड़ते नहीं इसीलिए जाकर उनसे मिल गए.

लालू ने कहा कि नीतीश सृजन घोटाले के साक्ष्य छिपा रहे हैं. एसआईटी का जिम्मा अपने स्वजातीय और चहेते अधिकारी को सौंपा है. सृजन घोटाले में मुख्यमंत्री मौनी बाबा बन गए है. वो जांच को बाधित करने और लोगों को गुमराह करने के लिए कार्य कर रहे हैं. मुख्यमंत्री बतायें कि जब 2013 में आर्थिक अपराध शाखा के संज्ञान में मामला आया. जांच हुई तो उस जांच रिपोर्ट का क्या हुआ? दोषियों पर कार्यवाई करने की बजाय उन्हें प्रोत्साहित क्यों किया गया?  सृजन घोटाले के जांच का आदेश देने वाले जिलाधिकारी का आनन-फानन में तबादला क्यों किया गया?

लालू प्रसाद ने बाढ़ राहत को लेकर भी सीएम नीतीश कुमार पर निशाना साधा और कहा कि पूरी बाढ़ त्रासदी में बिहार सरकार का अमानवीय और असंवेदनशील रवैया रहा. लोग मारे जा रहे हैं. मुख्यमंत्री बाढ़ बचाव की तैयारी करने की बजाय कुर्सी का जोड़-तोड़ और छवि का डेंट-पेंट करने में लगे थे. माना कि बाढ़ प्राकृतिक आपदा है लेकिन सरकार हर वर्ष बाढ़ और कटाव के नाम पर तटबंध निर्माण में हजारों करोड़ खर्च करती है लेकिन उसकी उपयोगिता ज़मीन पर नहीं दिखती.

बाढ़ के नाम पर भी घोटाला हुआ है. सरकार बाढ से मरने वालों के सही आंकड़े जारी नहीं कर रही है. समाचार पत्रों में दिखाया गया कि कैसे पुलिस की निगरानी में लाशो को नदी में फेंका जा रहा है? पीड़ित लोगों के प्रति सरकार का उदासीन रवैया है. सरकार से ज्यादा मदद तो गैर-सरकारी संस्थाये और कार्यकर्तागण लोग कर रहे है.