हाँ मैं राबिया थी मिया की बेटी……….. मैं निर्भया नहीं हूँ  जिसे देश ने अपनी बेटी समझ कर इंसाफ की आवाज़ उठाई थी…..72 घंटे बाद भी नीम ख़ामोशो है क्यो?

कुलदीप भारद्वाज, पटना

पटना Live डेस्क। एक मुस्लिम लङकी से मोहब्बत में मारे गए अंकित सक्सेना की हत्या से अभी देशवासियों के दिमाग को झकझोर ही रहा था कि एक मियां की बेटी जो अपनी कमाई से ही देश के बहुसंख्यक आबादी के यहाँ अपने बेटे के साथ रहकर बच्चों को शिक्षा देकर जिंदगी गुजार रही थी कि उसे इतनी दर्दनाक मौत का अचानक से शिकार होना पङेगा यह कभी उसके जेहन में भी नहीं आया होगा। आता भी कैसे अपने पति से अलग होने के बाद राबिया ने यही सोच कर श्रीवास्तव जी के मकान में किराए पर रहने चली गयी कि मैं भारत की बेटी हूँ और निर्भया के परिवार की सदस्य हूँ।

यह दरिदंगी और क्रुरता का चरम घटित हुआ है। पड़ोसी राज्य उत्तरप्रदेश के प्रतापगढ़ में। घटना जनपद के नगर कोतवाली क्षेत्र में नई दिल्ली के निर्भयाकांड जैसी जघन्य वारदात सामने आई है। जहां दुष्कर्म में असफल रहने पर दबंगों ने महिला की क्रूरता से निर्मम पिटाई कर दी। अत्यधिक रक्तस्राव के कारण महिला की उपचार के दौरान इलाहाबाद के स्वरूपरानी अस्पताल में मौत हो गई। पुलिस शव का पोस्टमार्टम स्वरूपरानी अस्पताल में ही पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया। पुलिस कार्रवाई के लिए तहरीर का इंतजार कर रही है। घटना शनिवार देर रात्रि की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पूरा शेख गांव में महराज श्रीवास्तव के घर किराए पर रहने वाली राबिया बानो चालीस साला पत्नी अबरार फुलवारी स्थित न्यू एंजिल्स इंटर कालेज में काम करती थी। पति ने उसे छोड़ दिया था। वह बेटे अरमान के साथ रहती थी।बेटा ट्रक चालक है, इसलिए अक्सर बाहर रहता है। राबिया रात लगभग आठ बजे रिश्तेदार सलीम के साथ कमरे पर थी। दोनों खाना खा रहे थे। आरोप है कि इसी दौरान टेऊंगा निवासी गुड्डू नशे की हालत में पहुंचा और गाली गलौज करने लगा। सलीम के टोकने पर वहा से लौट कर चला गया।
कुछ देर बाद सलीम भी चला गया। रात लगभग साढ़े नौ बजे गुड्डू समेत चार-पांच लोग पहुंचे और राबिया से अश्लील हरकत करने लगे। दुष्कर्म का प्रयास किया। विरोध करने पर लोहे के राड से पीट-पीट कर उसे बेदम कर दिया। शोर सुनकर किसी पड़ोसी ने राबिया की भाभी गुड़िया को फोन पर अनहोनी की जानकारी दी। मायके वालों ने 100 नंबर पर फोन किया। पुलिस वालों के साथ मायके वाले आनन फानन पहुंचे और पुलिस की जीप से राबिया को जिला अस्पताल लाया गया। यहां से उसे इलाहाबाद स्थित एसआरएन अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहां इलाज के दौरान तड़के साढ़े चार बजे उसकी मौत हो गई। सीओ सिटी रमेशचंद्र का कहना है कि गुड्डू समेत चार लोगों को हिरासत में लिया गया है।

घटना के बाबत पुलिस का कहना है कि शनिवार की रात आधा दर्जन लोग उसके घर में घुसे और दुष्कर्म करने की कोशिश की। राबिया ने इसका विरोध किया, तो उसके साथ बुरी तरह मारपीट की। राबिया की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग उसके घर की ओर दौड़े। अंदर पहुंच कर सभी हैरान रह गए। बुरी तरह चोटिल राबिया के शरीर के कई अंगों से रक्तस्राव हो रहा था। हाथ पैर टूटकर पूरी तरह से झूल रहे थे। आनन-फानन में लोगों ने उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल भिजवाया। जहां प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने इलाहाबाद रेफर कर दिया।

एसआरएन मेडिकल कॉलेज में हुई मौत

आसपास के लोगों ने ही राबिया को गंभीर हालत में इलाहाबाद ले जाकर एसआरएन मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया। जहां घंटों जिन्दगी की जंग लड़ने के बाद उपचार के दौरान आखिरकार राबिया ने दम तोड़ दिया। रविवार की अहले सुबह उसने आखिरी सांस ली।

वीभत्स हो गए थे शरीर के कई अंग

दरिन्दों ने अपनी अस्मत बचाने की कोशिश में राबिया के उपर कितना जुल्म ढाया, उसके शरीर पर लगी चोटें इसकी गवाही दे रही हैं। राबिया के शरीर पर कई जगह वीभत्स चोट के निशान थे। कई अंगों पर चोट इतनी गहरी थी कि मांस दिख रहा था। पैर जगह-जगह से टूटकर मुड़ गया था, वहीं हाथ के कुल्हे से भी अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा था

…..जी मैं उसी निर्भया की बात कर रहा हूँ जिसे राबिया की तरह ही कुछ दरिंदों ने अपनी हवस के आगे बेबस कर मौत की नीन्द सुला दिया था। निर्भया के परिवार के साथ पूरा भारत खङा हो गया था होना भी चाहिए था। काश ! राबिया के साथ भी मादरे वतन भारत आज खङा हो जाए तो मुमकिन है कि जालिमों को उसके किए की सजा मिल जाए। ….. लेकिन ऐसा दरिंदगी की इंतहा के 72 घंटे बाद भी कहीं से भी होता दिखाई नहीं दे रहा है। न कोई सुगबुगाहट है न मीडिया में इसको लेकर मुहिम आखिर क्यों ?
देश साम्प्रदायिक शक्तियों और चोर उचक्कों के हाथों का खिलौना जो बन गया है। उसे इंसानियत,मानवता,लोकतंत्र,संविधान और मिल्क से क्या मतलब है। उसे तो बस नफरत की सियासत कर देश को कमज़ोर करने और देशवासियों के दिमाग में धर्म,जातिवाद का जहर घोलकर राजनीति की कुर्सी हथियाने से मतलब है।
जिस प्रकार से निर्भया के न्याय की लङाई लङी गई उसी प्रकार से राबिया के न्याय की लङाई लङी जाए तो देश को जो लोग कमज़ोर कर रहे हैं उसके मुँह पर तमाचा भी लगेगा और लोकतंत्र भी बचेगा।
ख़्वातीनो हज़रात भाइयों बहनों वक्त खमोशी तोड़ने का है। कहीं ऐसा न हो कि निर्भया, राबिया के बाद अगला नम्बर हमारी मां, बहन, बेटी, बेटा का हो।
देश को तोङने,बाँटने और धर्म जातिवाद का जहर घोलकर राजनीति करने वाली शक्तियों को समय रहते ही उखाड़ फेंकने की आवश्यकता हैआपको हमको खामोशी तोङनी ही होगी क्योंकि हमारी खामोशी का परिणाम ही है कि ऐसी शक्तियां अपने हर घिनौने काम करने में सफल होती जा रही है। जिससे मुल्क कमज़ोर हो जाए। तो आईये एक आन्दोलन निर्भया की दूसरी बहन राबिया मिया की बेटी जो भारत की मूल निवासी थी उसके न्याय के लिए करें।