प्रदेश कांग्रेस में राजनीतिक गुटबाजी चरम पर,लालू प्रसाद के ‘चिरकुट’ कहे जाने पर भड़के प्रदेश अध्यक्ष,कहा-‘राजद कांग्रेस को नहीं देता तवज्जो’

पटना Live डेस्क. महागठबंधन सरकार से बाहर होते ही प्रदेश कांग्रेस में घमासान मचा है…सत्ता सुख भोग चुकी कांग्रेस को सत्ता से एक झटके से बाहर हो जाना पच नहीं रहा है…पार्टी में गुटबाजी चरम पर है..माना जा रहा है कि पार्टी में तीन धड़े हैं…एक धड़ा वर्तमान अध्यक्ष अशोक चौधरी को समर्थन कर रहा है..दूसरा धड़ा वरिष्ठ नेता सदानंद सिंह का है..और तीसरा धड़ा इन दोनों से अलग किसी दूसरे को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की फिराक में है…पार्टी में बढ़ती टूट की आशंकाओं की खबरों के बीच कांग्रेस आलाकमान ने पहले तो प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं को दिल्ली बुलाकर उनसे बात की… और फिर उसके बाद खुद राहुल गांधी ने 27 में से 21 कांग्रेसी विधायकों को दिल्ली बुलाकर वन टू वन बात की…राहुल गांधी ने उनसे राज्य में कांग्रेस की समस्याओं पर बात की और विधायकों को कांग्रेसी विचारधारा को मानने की नसीहत भी दी…इस बैठक के बाद लग रहा था कि प्रदेश कांग्रेस में अब सबकुछ ठीक है…और पार्टी में फिलहाल कोई टूट नहीं होगी…लेकिन दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात के बाद वापस लौटे कुछ विधायकों ने खुले तौर पर पार्टी में टूट की खबरों को हवा दी…और इसका आधार बनाया राजद का साथ..भागलपुर से कांग्रेस विधायक अजीत शर्मा और बक्सर से कांग्रेस विधायक ने खुले तौर पर पार्टी को चैलेंज किया और कहा कि कांग्रेस को प्रदेश में राजद का साथ छोड़ देना चाहिए…हालांकि केंद्रीय नेतृत्व ने विधायकों की राय से ठीक उलट राज्य में राजद का साथ छोड़ने से साफ इनकार कर दिया…राहुल गांधी की इस दो टूक बात के बाद प्रदेश में असंतोष की लहर ने और जोड़ पकड़ लिया…और कुछ विधायक खुलकर पार्टी की नीतियों का विरोध करने लगे…पार्टी के स्थानीय नेताओं को इस बात का मलाल है कि आखिर कांग्रेस राजद का साथ छोड़ने को राजी क्यों नहीं है…वो भी उस हालत में जब राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद पार्टी विधायकों को कोई तरजीह नहीं दे रहे…यह बात पार्टी के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी की बातों से साफ जाहिर होती है…उन्होंने कहा कि विधायकों का एक्सपाइरी डेट 2020 है.. लेकिन कांग्रेस का नहीं… बिहार कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि लालू प्रसाद यादव कांग्रेस नेताओं को ‘चिरकुट’ कह रहे हैं… आलाकमान को सोचना चाहिए कि बिहार में कांग्रेस को कितनी गंभीरता से लिया जा जा रहा है…. महागठबंधन सरकार के दौरान सत्ता में  मिली भागीदारी पार्टी के नेताओं को बहुत रास आयी थी, लेकिन अचानक सत्ता से हट जाने के बाद कांग्रेस के कई विधायक यह बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं… बताया जा रहा है कि सदानंद सिंह गुट के कुछ विधायक और अशोक चौधरी गुट के विधायक लगातार जदयू के संपर्क में बने हुए हैं….विधायक यह बखूबी जानते हैं कि लालू प्रसाद के साथ उनका कोई राजनीतिक भविष्य नहीं है…और लालू प्रसाद अपने अंदाज में कांग्रेस के साथ व्यवहार करते हैं…ऐसे में कुछ विधायक चाहते हैं कि जेडीयू में मिल जाने से उनका राजनीतिक कैरियर संवर जाएगा…