बड़ा खुलासा(सीसीटीवी)-आईएएस ने सोमवार को ही कर थी खुदकुशी, एक विज्ञापन से शव तक पहुची पुलिस

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पटना Live डेस्क।बिहार के सुपौल जिले के मूल निवासी दिल्ली से लापता आईएएस जितेंद्र झा अपनी ईमानदारी के लिए अपने साथियों के बीच बेहद चर्चित और लोकप्रिय रहे। द्वारिका सेक्टर 9 स्थित उनके घर का मंजर शोकमय बना हुआ है। उनकी पत्नी और बच्चे का रो रोकर बुरा हाल हो गया है। नन्हे बच्चे बार बार अपनी मां से पूछ रहे हैं कि मां पापा कब आएंगे? मूल रूप से बिहार के सुपौल जिला के वीणा बभनगामा गांव के जितेन्द्र झा एचआरडी मिनिस्ट्री मे फाइनेंशियल (कंट्रोलर ऑफ अकाउंटस) अधिकारी थे। वे बीते सोमवार की सुबह से लापता थे।सोमवार की सुबह वो दिल्ली के द्वारका सेक्टर 9 स्थित अपने आवास से बाहर निकले थे।लेकिन वापस नहीं लौटे थे और जब लौटे तो निष्प्राण होकर।
द्वारका साउथ इलाके में सोमवार से लापता मानव संसाधन विकास मंत्रालय में तैनात आईसीएएस (इंडियन सिविल अकाउंटस सर्विसेज) अधिकारी जितेंद्र कुमार झा का शव रेलवे ट्रैक से बरामद हुआ। आईसीएएस अधिकारी जितेन्द्र झा का शव पालम इलाके में रेलवे ट्रैक से मिला। उनका शव सोमवार की देर रात ट्रैक पर पड़ा मिला था। यानी घर से निकलने के बाद तकरीबन 12-14 घंटों तक जितेंद्र ने खुद से जद्दोजहद की और फिर अपनी इहलीला समाप्त कर ली। गुरुवार को पुलिस ने शव की शिनाख्त की है।उधर,परिवार के सदस्य और आईएएस की पत्नी द्वारा दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल के मोर्चरी में फिलहाल शव जितेन्द्र का होने को लेकर शक जता गया पर फिर शुक्रवार को आखिरकार उन्होंने ने भी शव को जितेंद्र का ही बताया। शुरुआत से ही पुलिस का दावा है कि जितेन्द्र का एक सुसाइड नोट भी उन्हें मिला है। जिसमें उन्होंने अपनी मौत के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया है। 
पुलिस के अनुसार जितेन्द्र झा परिवार सहित द्वारका सेक्टर-9 शिवालिक अपार्टमेंट में रहते हैं। वह 1998 बैच के आईसीएएस(इंडियन सिविल अकाउंटस सर्विस) के अधिकारी हैं। फिलहाल वह सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में कार्यरत थे। साथ ही इंडियन इंस्टीट्यूट आफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में उनका प्रशिक्षण चल रहा था। बीते सोमवार की सुबह लगभग दस बजे वह अपने घर से सिगरेट पीने की बात कहकर निकले थे। लेकिन वापस नहीं लौटे। सोमवार रात उनकी पत्नी ने द्वारका साउथ थाने में उनकी गुमशुदगी दर्ज कराई थी। पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी खंगाला तो वो दिखे थे।

उधर सोमवार रात लगभग 12 बजे पालम इलाके में पुलिस को रेलवे ट्रैक पर एक शव मिला। शव के गर्दन से नीचे का हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका था। शव के पास से कोई ऐसी वस्तु नहीं थी, जिससे उसकी शिनाख्त हो सके। पुलिस ने शव को शिनाख्त के लिए शवगृह में सुरक्षित रखवा दिया। गुरुवार को इस शव की शिनाख्त के लिए रेलवे पुलिस की तरफ से विज्ञापन दिया गया। यह विज्ञापन देखकर द्वारका साउथ पुलिस ने उनसे संपर्क किया।उन्होंने बताया कि यह शव द्वारका साउथ से लापता जितेन्द्र का लग रहा है। द्वारका पुलिस ने शवगृह में जाकर जब शव को देखा तो उसकी शिनाख्त जितेन्द्र झा के रूप में की। पुलिस ने शाम को परिवार के सदस्यों को भी शव देखने के लिए बुलाया। उन्होंने शव को देखकर स्पष्ट तौर पर उसे जितेन्द्र का शव नहीं माना। उधर द्वारका पुलिस का दावा है कि उन्हें एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें जितेन्द्र ने अपनी मौत के लिए किसी को जिम्मेवार नहीं ठहराया है। पुलिस उपायुक्त का दावा है कि जितेंद्र ने ट्रेन के आगे कूदकर जान दी है।सोमवार से लापता जितेंद्र का शव मंगलवार को पालम के पास रेलवे ट्रैक से ही बरामद हो गया था,लेकिन रेलवे पुलिस व स्थानीय पुलिस में तालमेल नहीं होने के कारण बृहस्पतिवार को शव की पहचान हो सकी।शुरू में शव की हालत देखकर परिजन पहचान करने से इनकार कर रहे थे,बाद में पहचान की। पुलिस को एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है,जिसमें उन्होंने मौत के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया है। शुक्रवार को शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। द्वारका जिला पुलिस उपायुक्त शिबेश सिंह ने बताया कि 1998 बैच के आईसीएएस अधिकारी जितेंद्र कुमार झा परिवार के साथ द्वारका सेक्टर-9 में रहते थे। इनके परिवार में पत्नी भावना व दो बच्चे हैं।