‘हम बिहार में सत्ता में 11 करोड़ जनता के हित में काम करने के लिए आए थे,ना कि हम किसी इंडिविजुअल को डिफेंड करने के लिए आए थे – जेडीयू महासचिव संजय झा

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पटना Live डेस्क। सूबे की सियासत में महागठबंधन पर महासंकट लगातार बढ़ता ही जा रहा है। गठबंधन के दो बड़े दलों जेडीयू और आरजेडी के बीच की दरार और चौड़ी होती जा रखइ है। जेडीयू ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी कीमत पर वो अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं कर सकती। जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव संजय झा ने साफ कर दिया कि ‘हमारी सरकार चले या ना चले लेकिन, हम मूल्यों के साथ समझौता नहीं कर सकते हैं।

                      महागठबंधन में तनातनी के बीच संजय झा का बयान काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।उनके बयान से साफ है कि भले बिहार में सरकार रहे या ना रहे, सरकार के ऊपर भले ही संकट क्यों ना आ जाएं लेकिन, किसी भी कीमत उनकी पार्टी अपने मूल्यों और सिद्धांतों से समझौता नहीं करने वाली।

संजय झा का कहना है कि ‘हम बिहार में सत्ता में 11 करोड़ जनता के हित में काम करने के लिए आए थे, ना कि हम किसी इंडिविजुअल को डिफेंड करने के लिए आए थे।’जेडीयू महासचिव ने जेडीयू विधायक दल की बैठक का हवाला देते हुए बताया कि ‘मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने विधायकों और दूसरे नेताओं को संबोधित करते हुए साफ कर दिया है कि जो भी चार्जेज तेजस्वी यादव के खिलाफ लगे हैं उन पर तेजस्वी तथ्य और प्रामाणिक तरीके से जवाब दें।


संजय झा ने बताया कि ‘नीतीश कुमार ने बैठक के दौरान रेल मंत्री रहते अपने इस्तीफे का जिक्र भी किया। बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि जब गायसाल में रेल दुर्घना हुई थी तो उस वक्त मैंने खुद रेल मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था. उस वक्त तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने बाद में फिर अपने मंत्रिमंडल में शामिल भी कर लिया था।’बकौल संजय झा खुद जेडीयू ने इस तरह की मिसाल पेश की है। अब आरोपों पर तेजस्वी को तथ्यों के साथ प्रामाणिक तरीके से सफाई देने की जरूरत है।
जेडीयू की बैठक में नीतीश कुमार ने साफ संदेश देने की कोशिश की।संजय झा का कहना है कि ‘नीतीश कुमार का संदेश साफ था, उनका चालीस साल का लंबा राजनीतिक करियर रहा है,12 साल तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे हैं, इसके पहले केंद्र में मंत्री रह चुके हैं, लेकिन, उनकी पूंजी गुड गवर्नेंस और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जीरो टोलरेंस की नीती रही है।ये उनका ट्रैक रिकार्ड रहा है।”
खासतौर से बिहार के मुख्यमंत्रित्व काल के दौरान उन्होंने राज्य को एक ब्रांड के तौर पर स्थापित किया। खोई हुई बिहारी अस्मिता को वापस लेकर आए. किसी अच्छे कारण से बिहार की गिनती एक बेहतर प्रदेश में होने लगी।ऐसे में नीतीश चाहते हैं कि उनके डिप्टी सीएम अब अपने ऊपर लगे आरोपों का सामने आकर जवाब दें।