भयंकर बाढ़ के चलते करीब सवा करोड़ की आबादी प्रभावित,मृतकों की तादाद में बढ़ोतरी,मदद पहुंचाने में जुटी राज्य सरकार

पटना Live डेस्क. राज्य के कोसी और सीमांचल इलाकों में भारी बारिश के चलते कई नदियां उफान पर हैं. खासकर नेपाल के तराई इलाके में हो रही बारिश ने इन इलाकों में रहने वाले लोगों की परेशानियों को और बढ़ा दिया है. नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के चलते बाढ़ की हालत गंभीर होती जा रही है. राज्य के कुल 17 जिलों के 159 प्रखंडों में बाढ़ का पानी फैल गया है जिसके चलते करीब एक करोड़ लोग प्रभावित हुए हैं. वहीं इस विनाशकारी बाढ़ के चलते कुल 160 लोगों के मौत की खबर है. अररिया जिले में सबसे ज्यादा 40 लोगों की मौत हुई है,जबकि किशनगंज में 10, पूर्णिया में नौ,कटिहार में सात,पूर्वी चंपारण में 11,पश्चिम चंपारण में 23,दरभंगा में चार, मधुबनी में आठ, सीतामढ़ी में 13, शिवहर में तीन, सुपौल में 11, मधेपुरा में नौ, गोपालगंज व सहरसा में चार-चार, मुजफ्फरपुर में एक, खगड़िया में तीन तथा सारण में दो व्यक्ति की मौत हुई है.

बाढ़ प्रभावित इलाकों से पानी से घिरे 4.64 लाख लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है. इसके अलावा इन क्षेत्रों में 1,289 राहत शिविर खोले गए हैं, जिसमें करीब 3.92 लाख लोग शरण लिए हुए हैं. उन्होंने बताया कि 1,765 सामुदायिक रसोई खोली गई है, जिसमें करीब साढ़े तीन लाख से ज्यादा लोगों को खाना खिलाया जा रहा है.

इधर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अधिकारियों से बाढ़ से प्रभावित परिवारों को समय पर राहत देने को कहा है. साथ ही कुछ और नए इलाकों में खाने के पैकेट गिराने के आदेश दिए हैं. शुक्रवार को पटना में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बाढ़ से संबंधित समीक्षा बैठक में नीतीश ने कई और महत्वपूर्ण निर्देश दिए.

समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने शुक्रवार की रात तक किशनगंज से अररिया होते हुए बहादुरगंज जाने वाली सड़क को ‘रि-स्टोर’ करने का निर्देश पथ निर्माण विभाग को दिया. उन्होंने कहा कि इस सड़क के बनने से बाढ़ राहत व बचाव कार्य युद्धस्तर पर किया जा सकेगा. इस काम के लिए ‘बर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन’ की सहायता लेने को भी कहा है, जिससे क्षतिग्रस्त सड़कों, पुल-पुलियों की मरम्मत में आसानी हो.

मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए चलाए जा रहे राहत और बचाव कार्य को और तेज करने का निर्देश दिया.

इधर, राज्य की कई प्रमुख नदियों के जलस्तर में कमी आई है, जिससे बाढ़ का पानी कई इलाकों से निकल रहा है, लेकिन अब भी कई स्थानों पर नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं.

नियंत्रण कक्ष में प्रतिनियुक्त सहायक अभियंता शेषनाथ सिंह ने शुक्रवार को आईएएनएस को बताया कि वीरपुर बैराज में कोसी नदी का जलस्तर 1.60 लाख क्यूसेक दर्ज किया गया, जबकि वाल्मीकिनगर बैराज में गंडक का जलस्तर 1.52 लाख क्यूसेक दर्ज किया गया.

इधर, बागमती नदी डूबाधार, सोनाखान और बेनीबाद में, जबकि कमला बलान नदी झंझारपुर में खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं. अधवाड़ा समूह की नदियां भी कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं.

विभाग के एक अधिकारी ने दावा किया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर चलाए जा रहे हैं. हालांकि उन्होंने कहा कि कई इलाकों को बाढ़ का पानी निकल रहा है, तो कई नए इलाकों में फैल भी रहा है.

उन्होंने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों की मदद के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और सेना के जवानों को लगाया गया है.