खुलासा(Exclusive) स्टील सिटी से सत्ता शीर्ष से स्टील की मजबूत जोड़ तक आईएएस आनंद किशोर

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पटना Live डेस्क। वर्त्तमान दौर में बिहार के सबसे चर्चित आईएएस आनंद किशोर सबके निशाने पर है। वर्त्तमान में बीएसईबी के चेयरमैन सहित 3 महत्वपूर्ण जिम्मेदारिया निभा रहे है। पटना के डिविजनल कमिश्नर और जेल आईजी के तौर पर भी आंनद नियुक्त है। तो जाहिर सी बात है। हर आमो खास सत्ता शीर्ष के इस चहेते अफसर के बाबत जानने को बेकरार है।

                         1996 में यूपीएससी में 8वीं रैंक हासिल कर आईएएस बने आनंद किशोर मूल रूप से बिहार के ही वाशिंदे है।संयुक्त बिहार और अब झारखंड के बोकारो के इस्पात विद्यालय सेक्टर 6 से मैट्रिक पास करने वाले आनंद ने धनबाद जिले में टॉप किया था। सनद रहे कि इनकी माँ इसी विद्यालय में हिंदी पढ़ाया करती थी। शुरू से ही पढ़ाई लिखाई में बेहद होशियार आनंद ने फिर पटना साइंस कॉलेज में आईएससी में एडमिशन लिया और आईआईटी परीक्षा में पहले ही प्रयास में सफलता पाई और प्रतिष्ठित आईआईटी कानपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में  बीटेक और एमटेक किया।


पहली नौकरी एक मल्टीनेशनल में मिली और यूएसए में काम करने का अवसर पर आनंद देश मे ही काम करना चाहते थे। तो एक निजी फर्म में काम करने के साथ यूपीएससी की तैयारी शुरू की। वर्ष  1995 में पहले प्रयास इनको 163 या फिर शायद 172वी रैंक हासिल हुई और बातौर आईपीएस इनका सेलेक्शन हुआ। पर इन्होंने जॉइन नही किया और फिर एक बार फिर वर्ष 1996 में इन्होंने फिजिक्स(प्रीलिम्स) और फिजिक्स और मैथेमेटिक्स(मेंस) विषय से यूपीएससी में पूरे भारत मे 8वां रैंक हासिल करते हुए बातौर आईएएस अपने सपने को साकार किया। नियति का संयोग इनको बिहार कैडर ही मिला।


फिर बातौर डीएम आंनद मुज़फ़्फ़रपुर
और फिर नालंदा में इन्होंने ने अपने कार्यकाल को पूरा किया। उल्लेखनीय है कि ये वही दौर था जब नीतीश कुमार केंद्र में रेल मंत्री के पद पर थे और बातौर डीएम आंनद नालंदा यानी नीतीश कुमार के गृह जिले और सांसदीय क्षेत्र में तैनात रहे। यही से इनका मधुर रिश्ता वर्त्तमान मुख्यमंत्री से बेहद आत्मीय बना। फिर कालांतर में सुबे की सियासत ने करवट ली और नीतीश कुमार सुबे के मुख्यमंत्री बन गए। फिर क्या था आंनद किशोर सरकार के प्रिय बनकर राजसत्ता में महती भूमिकाएं निभाते रहे। जेल आईजी और फिर पटना के डिविजनल कमिश्नर बने।अपनी गति पर चल रहा था।


वर्ष 2016 में टॉपर्स घोटाले की गूंज ने बिहार के शिक्षा व्यवस्था चुले ही हीला दी। तो फिर एक बार सत्ता के चहेते इस आईएएस को बातौर बीएसईबी चेयरमैन नियुक्त कर शिक्षा व्यवस्था को सुधारने की जिम्मेदारी मिली। वजह बताई गई बेदाग कॅरियर रिकॉर्ड और बेहद काबिल आईएएस के हाथों सुबे की शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करना। पदग्रहण करने के वक्त आनंद किशोर ने भी कई वायदे और ताबड़तोड़ बदलाव किए।


ख़ैर वो वक़्क्त भी आया और टॉपर्स
घोटाले के साये में वर्ष 2017 का इंटर का रिजल्ट भी जारी किया गया। दावे के राते न सोने का और फुल प्रूफ रिजल्ट का किया गया पर सुबे को मिला। बीएसईबी द्वारा 238 करोड़ खर्च करने के बाद 8 लाख फेल छात्र और अब तक सुबे में 19 छात्रों की अकाल मौत। फिर तो जैसे सुबे में कोहराम ही मच गया। जिसकी आंच लगतारा तेज़ होती जा रही है। सियासी बवंडर बढ़ता ही जा रहा है। साथ ही अब तो मैट्रिक परीक्षा परिणाम को लेकर भी डाटा हैकिंग के शगूफे उछाले जा रहे है।


हालात ये बन गए है कि बोर्ड में घपले और घोटालों के बाबत लगतारा खुलासे जारी है। कॉपियों की जांच का सच किरच किरच कर बाहर निकल रहा है। वही बीएसईबी द्वारा टेंडर में ब्लैक लिस्टेड कंपनियों को ठेका पट्टा देंने जैसे तमाम खुलासे सामने आ रहे है। उल्लेखनीय है कि फरवरी 14 से फरवरी 25 के बीच बिहार बोर्ड की परीक्षा आयोजित की गई थीं। इस बार 13 लाख से ज्यादा छात्रों ने 12वीं की परीक्षा दी थी।