Exclusive – क्या अब भी आप कहेंगे कि भारत में “फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेसन” पर पाबंदी है, शर्म से भी शर्मनाक !

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पटना Live डेस्क। अमूमन भारतीय मीडिया या तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग विगत 3 सालों से यानी केंद्र में नरेंद्र दामोदर दास मोदी के बतौर वजीरे आज़म हिंदुस्तान बनने के बाद से “अभव्यक्ति की स्वतंत्रता” पर हमला और न जानने क्या क्या पर पाबंदी की खबरें लिखता या फिर कहता आ रहा है। विपक्षी दलों ने भी “फ़्रीडम ऑफ एक्सप्रेसन” पर पाबन्दी का शगूफा जब तब उठता रहता है। खैर विपक्ष का काम है सरकार और सत्ता का विरोध करना। मोदी की नीतियों का विरोध करिये खूब करिये। ताबड़तोड़ करे पुरजोर करे। 24 घंटे और 365 दिन लगातार करे।पर क्या एक बुजुर्ग महिला जो एक माँ है। ममतामयी माँ है।उसका ऐसा भद्दा और गंदा चित्रण तो ना करे। हम वो लोग दुश्मन की माँ के भी अहित और सम्मान को ठेस नही पहुचाते।


लेकिन क्या अब भी आप उपरोक्त तस्वीरों को देखने के बाद भी यह कहने की हिम्मत कर सकते है कि भारत में फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेसन पर बैन लगा हुआ है ? नही न ! ये है वो स्वतंत्रता जिसका आप बेजा फायदा उठाकर देश के पीएम की 80 वर्षीय माँ की तस्वीर से छेड़झाड़ करते है। वो भी अपनी गिरी हुई मानसिकता का नग्न प्रदर्शन करते हुए।


हिंदुस्तान को अपनी तहज़ीब और रवायतों पर बड़ा नाज़ है। हमे गर्व होता है कि हम उस संस्कृति और रवायतों में पले बढ़े है जो हमें औरत की इज्जत करना सिखाता है। वही रिश्तों को निभाना और उसे सम्मान देना हमारी परंपरा रही है। हम वो लोग है जो मुल्क को मादरे वतन और माटी को माँ का दर्जा देते है। हम देश को भारत माता की उपाधि देते है।


लेकिन क्या ये ही वो फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेसन है जिसकी वकालत तमाम बुद्धिजीवी और तथाकथित अत्यंत पढ़े लिखे लोग करते है कि हिंदुस्तान में मोदीराज़ में ये खत्म हो गया है। तो आग लगा दीजिये इस फ्रीडम को जो किसी की माँ का सम्मान नही कर सकता है। माँ सिर्फ माँ होती है। चाहे गरीब की हो या अमीर की। रिक्शेवाले की या फिर देश के प्रधानमंत्री की उसका सम्मान होना चाहिए और हर कीमत पर होनी चाहिए।