Exclusive-(वीडियो) हद है ! शर्मसार सुशासन और कचरे में इंसानी लाश

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मनोज कुमार, ब्यूरो कॉर्डिनेटर

पटना Live डेस्क। वो दर्द से तड़पती रही, हर राहगीर, पेड़ पौधे, पशु पक्षी और इंसान ने भी उसे देखा फिर आहे भरी प्रशासन को गाली दी और अस्पताल की अकर्मण्यता को कोसा और चलता बना। अमूमन  सुबे के सरकारी अस्पताल इंसान खातिर मुक्ति मुक्ति स्थल में तब्दील हो चुके है। आख़िर क्यो इस जवाब आप स्वयं तय करिये पर पहले ये वीडियों देख लीजिए …

मुजफ्फरपुर में स्थित श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज में हुई मानवता को तार-तार कर देने वाली एक ऐसी घटना घटी है जिसको देखकर देखकर और जानकर आपकी  रूह कांप जायेगी। इस मेडिकल कॉलेज के कैंपस के अंदर स्थित पार्क में एक बुजुर्ग महिला 15 दिनों तक पहले तड़पती रही। उसके बाद बुधवार को उसकी मौत हो गयी। जिंदा थी,तो किसी ने कुछ नहीं किया, मरने के बाद जो उसके शव के साथ किया गया वह पूरे समाज को झकझोर देने वाली घटना है। मुजफ्फरपुर में कचड़े के ठेले पर एक इंसानी जिस्म को जबरन ठूंसने की कोशिश कर रहे यह दोनों लोग, श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के कर्मचारी हैं।
जरा ध्यान आँखे खोलकर देखिए कैसे इंदोनो के द्वारा बुजुर्ग महिला के शव को कचरे के ठेले में ठूंसने की कोशिश की जा रही है। शायद ये दोनों कचरे और मानव शरीर मे अंतर करना भूल चुके है।यह दृश्य जिले के सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का है। जिस इंसानी जिस्म के साथ ऐसा व्यवहार कर रहे हैं, वह एक बुजुर्ग महिला का शव है।

जानकारी के मुताबिक बुजुर्ग महिला लावारिश थी,और उसके आगे पीछे कोई नहीं था। अस्पताल के माली की मानें तो वह पंद्रह दिनों से पार्क में तड़प रही थी। माली कंचन ने बताया कि उसने कई दिन जाकर अस्पताल के डॉक्टरों को इसकी सूचना दी, लेकिन किसी का दिल नहीं पिघला,अंततः बुधवार को दर्द की कराह से उस बुजुर्ग महिला को मुक्ति मिल गई और वो मर गई।

महिला की मौत के बाद भी अस्पताल प्रशासन नहीं जागा।सरकार द्वारा बनायी गयी लावारिस शवों के लिए कानून का ख्याल किसी को नहीं आया, जबकि नियमानुसार ऐसे शवों का पहले पोस्टमार्टम होता है।।साथ ही, शव ले जाने के लिए सरकारी मोर्चरी वैन होते हैं।इस वैन से ऐसे शवों को अंतिम संस्कार और पोस्टमार्टम के लिए ले जाया जाता है।अस्पताल प्रशासन ने शव ले जाने के लिए मोर्चरी वाहन की जगह कचरे के ठेले का प्रयोग किया।ज्ञात हो कि अज्ञात और लावारिस शव के अंतिम संस्कार के लिए सभी सरकारी अस्पतालों और कॉलेजों में पर्याप्त फंड होता है,लेकिन वह फंड कहां जाता है, इस शव के साथ जो हुआ, उसे देखकर आपको अंदाजा हो गया होगा। जिले की सिविल सर्जन ललिता सिंह कहती हैं कि ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए, क्योंकि हमारे पास मोर्चरी वैन है

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