बड़ी खबर – जदयू के अस्तित्व पर मंडराते काले बादल, पूर्व सांसद उदय नारायण चौधरी ने की जमुई में समर्थकों संग बैठक

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पटना Live डेस्क। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और जदयू के वरिष्ठ नेता उदय नारायण चौधरी द्वारा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा-जदयू गठबंधन सरकार की कई मुद्दों पर आलोचना कर बगावती तेवर अपना चुके हौ। वही गुरुवार को भी फिर एक बार जदयू के पूर्व सांसद रहे उदय नारायण चौधरी ने आरक्षण के मुद्दे पर सूबे की सरकार की कड़ी आलोचना की है। जमुई के परिसदन में अपने खास समर्थकों के साथ बैठक कर आगे अपने सियासी रुख का इशारा कर दिया है। साथ ही इस बैठक के कई सियासी मायने मतलब निकाले जा रहे है। पूर्व विधान सभा अध्यक्ष के समर्थकों का दावा है कि अब आरपार की लड़ाई की तैयारी की जा रही है। सूबे में दलितों हितों से किसी प्रकार का समझौता नही किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि इस बैठक में जमुई के पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष ब्रह्मदेव रावत भी शामिल हुए।
जिले में बने इस सियासी समीकरण को लेकर जदयू खेमें में अंदरूनी खलबली मची हुई है। उल्लेखनीय है कि एक दिन पहले ही जिले में जदयू का कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें  बिहार के गन्ना विकास मंत्री सह जमुई जिले के प्रभारी मंत्री, सांसद रूदल राय,पूर्व मंत्री दामोदर रावत शामिल हुए थे।

हां, मैं बागी हूँ – उदयनारायण चौधरी

विदित हो की जदयू के वरिष्ठ नेता उदय नारायण चौधरी ने बीते शुक्रवार को राजधानी पटना एएन सिन्हा संस्थान में वंचित वर्गों की आर्थिक, सामाजिक और रोजगार की वर्तमान स्थिति पर विचार संगोष्ठी को संबोधित करते हुए चौधरी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा-जदयू गठबंधन सरकार की कई मुद्दों पर आलोचना करते हुए कहा कि मैं सच बोल रहा। किसी को लगता है कि यह बगावत है, तो मैं बागी हूं।
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार सरकार ने दलित छात्रवृत्ति योजना बंद कर दी है। यह दलित विरोधी कदम है। इसके खिलाफ हम आंदोलन कर रहे।साथ ही सूबे में पूर्व विधान सभा अध्यक्ष ने आंकड़ों के जरिए दलितों की हालत पर बोलते हुए उन्होंने कहा था कि दलितों की बस्ती में पीने को पानी नहीं उपलब्ध नहीं है। देश के जेलों का आंकड़ा देखा जाए तो इसमें कुल 36 फीसदी दलित बंद हैं। जानकारी के अभाव में ये छोटे-छोटे मुकदमों के चलते जेल में बंद हैं। साथ ही उन्होंने इशारों इशारों में ही कहा कि नागपुर वालों (आरएसएस का मुख्यालय नागपुर में है) द्वारा प्रमोशन में आरक्षण खत्म करा दिया गया। केंद्र सरकार मौन है। बिहार में करोड़ों दलित आज भी बेघर हैं। बेघर दलितों पांच डिसमिल जमीन देने की योजना वर्षों फाइलों से बाहर नहीं निकली और अब भी सरकारी फाइलों में कैद हैं।
साथ ही पूर्व सांसद अपने रुख पर उठ रहे सवालों के बाबत कहा था कि जदयू के ही कुछ नेता उन्हें बागी कह रहे। इस बाबत उनका कहना रहा कि सच कहना अगर बगावत है, तो समझो हम बागी हैं। जदयू में मुझे कुछ भी समझा जाए पर मैं दलितों को न्याय दिलाने के लिए अंतिम दम तक लड़ता रहूंगा संघर्ष करता रहूंगा।