सरकार में सबकुछ ठीक ठाक! न इस्तीफा देंगे और न बर्खास्त होंगे तेजस्वी!

बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव पर सीबीआई के एफआईआर के बाद भी महागठबंधन में सबकुछ ठीक ठाक है. नीतीश कुमार से कुछ चौंकाने वाले फैसलों की उम्मीद लगाए राजनीतिक पंडितो को रटा रटाया जवाब ही मंगलवार को सुनने को मिल सकता है. न तो तेजस्वी इस्तीफा देंगे और न ही इस सरकार पर कोई आफत आने वाली है, राजद विधायक दल की बैठक में तेजस्वी यादव के इस्तीफा नहीं दिए जाने पर फैसला हो चुका है. ये फैसला कर आरजेडी विधायकों ने महगठबंधन में शामिल दूसरे सबसे बड़े दल जेडीयू का काम भी काफी हद तक आसान कर दिया है. जरा बयानों पर गौर कीजिए. राजद के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी कहते हैं कि बैठक में तेजस्वी के इस्तीफे पर कोई चर्चा ही नहीं हुई. ये बैठक तो देश की वर्तमान राजनीति और राष्ट्रपति चुनाव को लेकर बुलायी गयी थी. एक दूसरे कद्दावर नेता कहते हैं नीतीश कुमार ने रविवार को ही सीबीआई छापेमारी को लेकर लालू प्रसाद को फोन किया था और तेजस्वी यादव के काम की प्रशंसा की थी. इशारा साफ है अंदरखाने ही सारी चीजें साफ हो चुकी हैं. न तो तेजस्वी इस्तीफा देने जा रहे हैं और न ही नीतीश उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर करने जा रहे हैं. नीतीश की चुप्पी का गंभीर मतलब निकालने वाले लोग भी इस बदलाव से अचंभित हैं. जाहिर है ये अंदेशा तो था ही कि राजद विधायक दल एक सुर से तेजस्वी से इस्तीफा नहीं देने की बात कहेगा. लेकिन नीतीश कुमार की चुप्पी के कई मायने निकाले जा रहे थे. ये कयास लगाए जा रहे थे कि नीतीश कुमार भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेंगे और वो अपनी पुरानी जीरो टॉलरेंस वाली नीति ही बनाए रखेंगे. लेकिन राजद विधायक दल की बैठक ही कई कयासों को विराम लगा देती है. नीतीश भी इस बात को बखूबी समझ रहे होंगे कि तेजस्वी को मंत्रिमंडल से हटा देना इतना आसान नहीं है. वहीं कांग्रेस का इस मसले पर राजद के साथ पूरी तरह से साथ रहना भी कहीं न कहीं नीतीश कुमार को ये सोचने पर मजबूर किया होगा कि अगर इस गठबंधन के विपरित कोई कदम उठाया तो शायद वो अकेले पड़ जाएंगे.
सूबे की राजनीति में फिलहाल नीतीश बीजेपी के साथ जाना पसंद नहीं करेंगे. उन्हें लगता है कि अगर वो राजद से गठबंधन तोड़ फिर से बीजेपी के साथ गए तो उससे पार्टी का परंपरागत वोट छिटक सकता है. मुस्लिम वोटरों की नाराजगी तो दिखेगी ही. साथ ही सहानुभूति वोट भी राजद के पाले में जा सकता है.
हालांकि मंगलवार को नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी के सभी विधायकों और सांसदों की बैठक बुलाई है. कहा जा रहा है कि फैसला उसी बैठक के बाद तय होना है. लेकिन जिस तरह के सिग्नल मिल रहे हैं उससे ये अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि फिलहाल महागठबंधन में सबकुछ ठीक है और लालू और नीतीश की दोस्ती इसी तरह चलती रहेगी.