बड़ी खबर – लुटेरे से कुख्यात शूटर बने बिहार, यूपी के मोस्टवांटेड शूटरों में शुमार कुख्यात पप्पू श्रीवास्तव को यूपी एसटीएफ ने दबोचा

0
466

पटना Live डेस्क।बिहार के गोपालगंज जिले के थाना विशम्‍भरपुर के मटिहनियां का रहने वाला कुख्‍यात और मोस्‍टवांटेड संजीत श्रीवास्तव उर्फ रंजीत रंजन श्रीवास्तव उर्फ प्रमोद रंजन श्रीवास्तव उर्फ पप्पू श्रीवास्तव को यूपी एसटीएफ ने लखनऊ से चिनहट थाना अंतर्गत एक किराये के मकान स्थित उंसके गुप्त ठिकाने से धर दबोचा है। काफी लंबे समय से पप्पू अपनी पहचान छुपाकर यूपी की राजधानी लखनऊ में रह रहा था। बताया जाता है कि पप्पू बिहार के दुर्दान्त माफिया सरगनावों में शुमार सतीश पाण्डेय और पूर्व विधायक राजन तिवारी गिरोह खातिर शूटर का काम करता रहा है। पप्पू ने इन माफियाओं द्वारा उपलब्ध करायी गयी एके-47 से भी कई घटनाओ को दिनदहाड़े और सरेआम न केवल अंज़ाम दिया है बल्कि अपनी दुःसाहसीक वारदातों से पुलिस को भी लगातार हलकान करता रहा है। पप्पू द्वारा अंज़ाम दी गई वारदातों और खुरेजियों के दौरान गोपालगंज और सीवान में गम्भीर कानून-व्यवस्था की स्थिति भी उत्पन्न हो चुकी है। टीम ने मंगलवार को लखनऊ से गिरफ्तार किया।

ट्रक लूट से एके 47 तक का सफरपप्पू श्रीवास्तव ने बताया कि वह वर्ष 1993 में चीनी  लदे हुई ट्रक की लूट में पहली बार जेल गया था। इसके बाद अपने गांव के स्थानीय थाने विशम्भरपुर में गुटबन्दी सम्बंधी हुई मारपीट और हत्या के प्रयास में सक्रिय रूप से शामिल होने पर उसका नाम एक बेहद तेजी से उभरते हुए दुःसाहसी अपराधी के रूप में चर्चित होने लगा था। इसी दौरान उसकी दोस्ती जेल आने जाने के क्रम में गोपालगंज के कुख्यात गिरोहबाज सतीश पांडेय के सबसे विश्वस्त अरविंद ओझा से हो गई। पप्पू के वारदातों और साहस को देखते हुए शुरुआती दिनों में जेल जाने और जमानत कराने का प्रबंध और खर्चे अरविंद ओझा के मार्फत सतीश पांडेय द्वारा इंतजाम किया गया। फिर रोजमर्रे का खर्चा दे कर गोपालगंज के माफिया अपराधी सतीश पाण्डेय ने उसे अपने लिए काम करने को तैयार कर लिया। और एक दिन अरविंद ने पप्पू श्रीवास्तव को सतीश पाण्डेय के लिए वारदातों को अंजाम देने वाले कोर ग्रुप शामिल कर लिया। अब पप्पू सतीश पांडेय गिरोह का गुर्गा बन चुका था। बेहद हिम्मती और दुःसाहसी पप्पू धीरे धीरे गिरोह में तरक्की करने लगा। कट्टा से होता हुआ एके 47 से पहली हत्या               पप्पू ने आगे बताया कि वर्ष 2002 में पहली बार उसने एके 47 से फायर करते हुए अनिल राय की हत्या की थी, जिससे सतीश पाण्डेय का ठेकेदारी सम्बन्धी विवाद था। दिनांक 26 दिसंबर 2005 को गोपालगंज में ठेकेदार जेपी यादव की हत्या के लिए एक बार फिर एके 47 का इस्तेमाल किया। इसी दिन अपने साथियों अजय सिंह, आशुतोष राय और पिन्टू राय के साथ जेपी यादव की हत्या करने के बाद लौटते समय रास्ते में इत्तेफाक से नवल तिवारी दिख गया। नवल से पप्पू की पुरानी रंजिश थी। फिर क्या था सही मौका देखकर पप्पू ने नवल तिवारी की भी रिवाल्वर से ताबड़तोड़ कई गोलियां मार हत्या कर दी। जबकि उसकी पीठ पर टंगे बैग में एके 47 मौजूद थी। इसके बाद एके 47 से एक बार फिर बृजेश राय की हत्या पप्पू ने कर डाली।पप्पू श्रीवास्तव ने बताया कि राजन तिवारी ने झारखण्ड से अपने सम्पर्क के माध्यम से 3 लाख रुपये में एक एके-47  खरीदी थी।।जिसको लाने के लिए वह जीप से गया था और लौटते समय आरा में हथियार सहित पकड़ा गया और राजीव रंजन के गलत नाम से जेल चला गया। राजन तिवारी के गैंग सदस्यों विकास तिवारी और गौतम राय के साथ उसने जमशेदपुर के साकची थाना अंतर्गत एक बड़े बिजनेस मैन का अपहरण किया था, जो बड़ी फिरौती के बाद छोड़ा गया। इस सम्बन्ध में दर्ज मुकदमें में वह वांछित चल रहा है।

पप्पू श्रीवास्तव ने बताया कि वर्ष 2006 में सिवान में एक लूट के बाद सतीश पाण्डेय सहित गैंग के लोग स्थानीय भीड़ और पुलिस पार्टी द्वारा घेर लिये गए थे। खुद को और अन्य सभी को घिरता देख तब पप्पू ने सतीश पाण्डेय के आदेश पर पुलिस सर्किल इन्सपेक्टर पर एके-47 से ताबड़तोड़ फायर किया था। इन फ़ायरिंग मे मैरवा इन्सपेक्टर योगानन्द सिंह मारे गए थे। इस मुकदमे में भी वह अबतक फरार चल रहा है।
वर्ष 2014 में एक बार फिर सतीश पाण्डेय, जदयू विधायक अमरेन्द्र पाण्डेय और अजय मिश्रा के साथ उसने एके-47 से गोपालगंज के प्रतिष्ठित राजनीतिज्ञ कृष्णा शाही पर हमला किया था,जिसमें वह बच गये थे। इसके अतिरिक्त भी पप्पू श्रीवास्तव पर हत्या,बलवा जैसी गम्भीर धाराओं के मुकदमे दर्ज हैं। इनमें भी वह फरार चल रहा है। कुशीनगर में राजेश तिवारी की हत्या में भी वह वांछित है, जिसकी जांच सीआइडी कर रही है।

सतीश पांडेय के पास6 तो राजन के पास भी AK-47

पप्पू ने जो सबसे बड़ा खुलासा करते हुए यह भी बताया कि माफिया सरगना सतीश पाण्डेय के पास एक समय 6 एके -47 ₹ थी, जो हत्या करने के लिए गिरोह के शूटरो और अन्य गिरोहों को भी भाड़े पर दी जाती थी। वही पूर्व विधायक और बाहुबली राजन तिवारी के पप्पू का दावा है कि उनके गिरोह के  पास भी कई एके-47 रायफलें थीं।