शराबबंदी की धज्जियां उड़ाते नशे में धुत पूर्णिया के जिला कल्याण पदाधिकारी गिरफ्तार,शराब पी कर लौट रहे पीएनबी के ब्रांच मैनेजर भी धराए

पटना Live डेस्क. ये हैं सरकार के बड़े अधिकारी..शासन ने घूमने को गाड़ी दी है..बड़ा सा ऑफिस दिया है..और मातहतों की टीम भी…जब भला इतनी सारी सुविधाएं मौजूद हों तो फिर नियमों और कानूनों की कौन पूछे…सरकार ने जिम्मेदारी दी है कानून के पालन की….लोगों से कानून के पालन करवाने की..लेकिन ये अधिकारी महोदय तो खुद ही टल्ली हो गए…खुद की मर्जी हुई तो सोचा कानून जाए भांड़ में..पहले अपने गले को तर कर लिया जाए..आखिर जब आदत लगी है तो वो भला जाएगी कैसे…और वो भी जब साल भर से ज्यादा शराबबंदी के हो गए…सरकार ने पीने पर पाबंदी लगा दी… अधिकारी महोदय ने भी यह सोचा कि चलो चुपके-चुपके तो बहुत हो गए चलो आज खुल्लमखुल्ला ही हो जाए..आखिर कानून भी अपना..और सरकार भी अपनी..अधिकारी महोदय के सपनों की भनक जब यार दोस्तों को लगी तो वो भी साथ हो लिए…दोस्तों ने भी सोचा जब अपना यार ही सरकार का बड़ा अधिकारी हो तो भला उन्हें कौन छेड़ेगा…सो उनके साथ जाकर गला तर करने में क्या बुराई है…अधिकारी महोदय के दफ्तर के खास मातहतों ने भी सोचा कि यही मौका है..आखिर अधिकारी के साथ पीने का मौका बार-बार कहां मिलता है… जाने यह मौका आगे आएगा भी नहीं…सरकार हैं..सरकारी गाड़ी है…तो क्यों न इसका मजा लूट लिया जाए…बस क्या था..अधिकारी महोदय अपने लाव लश्कर और सरकारी गाड़ी के साथ चल पड़े गला तर करने….सोचा बिहार में तो खुलकर पी नहीं पाएंगे तो क्यों न चला जाए पड़ोसी राज्य बंगाल…आखिर दिक्कत क्या थी..गाड़ी थी ही..और साथ देने वाले थे ही..बस क्या था चल पड़े पूर्णिया के जिला कल्याण पदाधिकारी राजेश वर्मा..स्थानीय पंजाब नेशनल बैंक के ब्रांच मैनेजर आनंद कुमार झा..

और अधिकारी महोदय के दफ्तर के ही दो मातहत…सरकारी गाड़ी ली…जिसपर लिखा है बिहार सरकार..मतलब था कि कोई रोके ना..कोई टोके ना..चारों ने अपनी जगह पर पहुंचकर पहले जमकर पी…..लगा मानो वर्षों के प्यासे हों..साथी दोस्तों ने भी जमकर दावत उड़ायी…और जब मन नहीं भरा तो साथ में ले ली एक दर्जन से ज्यादा विदेशी शराब की बोतलें…सोचा यहां तो पी ही चुके..अब दूसरा राउंड घर पहुंचकर हो जाए तो क्या खराबी है…बड़ी ही सलीके से शारब की बोतलों को गाड़ी में छुपाया जिससे किसी को पता नहीं चल सके…और फिर चल पड़े..अपने मंजिल की ओर…लेकिन शराब के नशे में धुत इऩ चारों को कहां पता था कि आफत यहां इनका इंतजार कर रही है…पूर्णिया से पहले कुछ दूरी पर पुलिस ने वाहन चेकिंग का अभियान चला रखा था…सो अधिकारी महोदय की गाड़ी भी पुलिस के चेकिंग के चक्कर में पड़ गई..उन्हें तो भरोसा था कि यह तो सरकारी गाड़ी है इसे भला कौन रोकेगा…लेकिन पुलिस ने भी जांच करने की मानो कसम खा रखी थी…और जब पुलिस ने जांच की तो वो भी भौंचक्का रह गई…गाड़ी पर बैठे जिला कल्याण पदाधिकारी राजेश वर्मा पूरी तरह टुन थे…साथ में बैठे पीएनबी के ब्रांच मैनेजर आनंद झा भी होश में नहीं थे..और अधिकारी महोदय की ऑफिस के दो क्लर्क भी शराब के नशे में धुत थे…हाल यह था कि शराब के नशे में धुत ये लोग पुलिस की बातों का सही तरीके से जवाब भी नहीं दे पा रहे थे… पुलिस ने इन्हें टल्ली हालत में ही हिरासत में लिया और गाड़ी की जांच की…जांच के दौरान ही पुलिस को शराब की और पंद्रह बोतलें गाड़ी में छुपाकर रखी मिलीं…

पुलिस की हिरासत में आते ही अधिकारी महोदय के होश ठिकाने आ गए..फिर शुरु हुआ रौब का खेल…पहुंच का खेल..पैरवी का खेल..अधिकारी महोदय ने सारी जुगत लगा ली लेकिन पूर्णिया के एसपी ने भी शायद कसम खा रखी थी..अधिकारी महोदय की एक न सुनी और चारों को भेज दिया जेल…