सूबेे पर सीएम नीतीश कुमार की नजर,ले सकते हैं कोई बड़ा फैसला!

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सूबे की पल-पल बदलती राजनीतिक हालात पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नजरें टिकी हुई हैं. पहले तो राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को लेकर चली उठापटक के बीच ये कयास लगाए जा रहे थे कि ये गठबंधन टूट जाएगा और नीतीश कुमार दोबारा बीजेपी के पाले में चले जाएंगे. आरोपों-प्रत्यारोपों और तीखे राजनीतिक बयानबाजी के बाद मानो ये तय लग रहा था कि महागठबंधन की सरकार चंद दिनों की मेहमान है. बीजेपी ने भी नीतीश कुमार को अपने पाले में लाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी और पार्टी नेताओं ने एनडीए में लौटने को लेकर उन्हें खुला निमंत्रण दिया. लेकिन  जातिगत आधार पर बने गठबंधन की डोर शायद कुछ ज्यादा ही मजबूत होती है. तमाम आमंत्रणों के बाद भी नीतीश कुमार ने धैर्य दिखाया और पाला बदलने की बजाए मामले को निबटाना ही ज्यादा बेहतर समझा. पिछले कुछ दिनों से राजद-कांग्रेस नेताओं के तीखे बयानों के बाद महागठबंधन की गाड़ी एक बार फिर से पटरी पर लौट गई थी. बयानों के वार बंद हो चुके थे और नीतीश कुमार दोबारा विपक्षी एकता में खुद को शामिल करने की बात पुरजोर तरीके से कहने लगे थे. लेकिन राजनीति पल-पल बदलती संभावनाओं का खेल है.

लालू प्रसाद और उनके परिवार के खिलाफ सीबीआई के मुकदमे ने एक बार फिर से महागठबंधन की परीक्षा लेनी शुरु कर दी है. शायद इस बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ज्यादा संभलकर चलने की जरुरत होगी. वो महज बयान देकर इस मामले से पल्ला नहीं झाड़ सकते हैं. कारण है कि नीतीश कुमार ने खुद को सुशासन का सिपाही घोषित कर रखा है. साफ छवि वाले नीतीश कुमार के राजनीतिक सफर पर आज तक कोई दाग नहीं लगा है,और वो चाहेंगे कि आगे भी कोई उन्हें भ्रष्टाचार के पोषक के तौर पर ना जाने. तभी तो वो खुलेआम भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति की जोरदार वकालत करते हैं. लेकिन इस बार भ्रष्टाचार का आरोप सीधे उनकी सरकार में डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव पर लगा है. सीबाआई ने तेजस्वी यादव के खिलाफ आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया है. ऐसे में सूबे के मुखिया नीतीश कुमार के लिए ये बड़ी परीक्षा की घड़ी है. विपक्षी पार्टी बीजेपी ने तेजस्वी यादव को सरकार के से बर्खास्त करने के लिए दबाव बनाना शुरु कर दिया है.लेकिन उनकी बर्खास्तगी इतनी आसान भी नहीं है. नीतीश कुमार ये बेहतर जानते हैं कि अगर उन्होंने तेजस्वी यादव को बर्खास्त किया तो उऩकी सरकार चली जाएगी. और अगर उन्होंने तेजस्वी को मंत्रिमंडल से नहीं हटाया तो उनके भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस वाली इमेज पर निश्चित तौर पर धक्का लगेगा. ऐसे में उनका अगला कदम क्या होगा, ये देखने वाली बात होगी.

 

 

 

 

 

 

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