गया: चंदा सचदेव ने कहा,’दोषी को न हो फांसी,जब अर्जुन अभिमन्यू को नहीं ला पाए तो मैं कैसे बेटे को ला सकती हूं’

पटना Live डेस्क. गया के बहुचर्चित आदित्य सचदेवा हत्याकांड में रॉकी यादव को दोषी करार दिया गया है और उसके खिलाफ सजा का एलान 6 सितंबर को किया जाएगा…लेकिन इस बीच दोषी करार दिए जाने के बाद रॉकी की सजा को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं लोगों की जुबां पर है..कोई उम्र कैद तो कोई उसे फांसी देने की बात कह रहा है..लेकिन मृतक आदित्य की मां चंदा सचदेवा के मन में अभी भी रॉकी के लिए संवेदनाएं हैं..चंदा सचदेव कहती हैं कि नौजवान और होनहार बेटे को खोने की पीड़ा क्या होती है, यह मुझसे बेहतर कौन जान सकता है? मेरे कलेजे के टुकड़े को मार दिया गया.. मेरा सीना हर दिन फटता है, पर इसका बदला मैं किसी और मां के बेटे को फांसी दिलाकर क्यों लूं? यह कोई सजा नहीं है.. न्यायालय दूसरे तरीके से भी दंड दे सकता है पर रॉकी को सजा-ए-मौत ना दी जाए.. जब भगवान कृष्ण अभिमन्यु को वापस नहीं ला सके तो मैं अपने लाडले को कैसे वापस ला सकती हूं? मुझे पता है, मेरा आदित्य अब कभी नहीं आएगा.. मेरी आंखें उसे कभी देख नहीं पाएंगी..मेरे परिवार को आदित्य की मौत का गहरा सदमा लगा है.. मैं अब भी अपने लाडले को दूर नहीं समझती.. रोज उसकी तस्वीर को सिरहाने रखकर सोती हूं.. मेरी तरह आदित्य की बहनें भी राखियां भेजती हैं.. अपने भाई की तस्वीर को तिलक लगाती हैं..आदित्य के हत्यारों को उनके गुनाह की सजा मिलेगी या नहीं, इसको लेकर मेरे, आदित्य के पिता, उसकी दादी अन्य परिजनों के मन में बार-बार सवाल कौंध रहे थे.. एक बार भरोसा तब डिगा था जब रॉकी को जमानत मिल गई.. लगा था कि सच्चाई की जगह बाहुबल और धनबल की जीत हो जाएगी..आदित्य की मां ने कहा कि घटना के वक्त आदित्य के साथ रहे उसके चारों दोस्त गवाही के दौरान मुकर गए.. क्या करते, वे भी मजबूर थे जबकि उनकी आंखों के सामने यह सब हुआ था.. उनके मुकर जाने के बाद मुझे फिर लगा कि शायद न्याय नहीं मिल पाए.. लेकिन सरकार, न्यायालय और पुलिस-प्रशासन ने अंतत: सच्चाई को मुकाम पर पहुंचा दिया.. न्यायालय के फैसले के बाद मुझे लगा कि मानवता और इंसाफ आज भी जिंदा है..