Exclusive (खुलासा)16 जुलाई को ना जश्न होता न 28 अगस्त को संतोष झा का विकेट गिरता,सलाखों के पीछे से रुंधे गले से उसने जारी किया फरमान

पटना Live डेस्क। बिहार के सबसे खूंखार,दुर्दांत और दुःसाहसी गैंगों में शुमार रहे संतोष झा मुकेश पाठक गैंग ने कभी अपने दहशत और खुरेजी से सरकार की चूले हिला दी थी। लेकिन जब गैंग टूटा तो दोनों सरगना एक दूसरे के खून के प्यास हो गये। जिसकी परिणति हुई कि पहले शार्प शूटर और फिर बीते मंगवार को यानी 28 अगस्त को संतोष झा को तकरीबन 2 बजकर 40 मिनट पर मौत के घाट उतार दिया गया। झा को सरेआम सीतामढ़ी सिविल कोर्ट में अपनी पेशी देकर अपने साथ एक अन्य कैदी विकास झा उर्फ कालिया के साथ हथकडी लगाए लौटने के दौरान पुलिस के पहरे में परलोक भेज दिया गया।
सरगना संतोष झा पर मुकेश के भेजे गए 3 शूटरों के दस्ते ने ताबड़तोड़ फायरिंग की। इस फायरिंग में संतोष को एक गोली सिर में और दूसरी गोली सीने में लगी। गोली लगते ही संतोष झा ने दम तोड़ दिया। वही अफ़रातफ़री का फायदा उठाते हुए हमलावर वहां से फरार होने लगे तो एक अपराधी मय हथियार पुलिस द्वारा पब्लिक के सपोर्ट से धर दबोचा गया।  सीतामढ़ी पुलिस के हत्थे चढ़े अपराधी की पहचान विकास के तौर पर की गई है। इसकी जामा तलाशी में पुलिस को एक पिस्टल, खाली मैगजीन,18 गोलियां, पांच सौ के 3 नोट ,एक 5 रुपये का सिक्का, दो चाभियां मिली है। वही साथ रहे आर्यन उर्फ शकील अपने साथी समेत भाग निकलने में सफल रहा।                                
गिरफ़्तार विकास मूल रूप से पूर्वी चम्पारण के चकिया थाना क्षेत्र के कुंवआ गांव का निवासी है।पुलिस उससे गहन पूछताछ कर रही है। अब सीतामढ़ी पुलिस को संतोष झा हत्याकांड को अंजाम देने वाले शूटरों और उनके इतिहास भूगोल का भान हो चुका है गिरफ़्तारीख़ातिर ताबड़तोड छापेमारी भी शुरू हो चुकी है।मोतिहारी जेल में सजायाफ्ता मुकेश पाठक से भी जल्द ही पूछताछ की जा सकती है।

संतोष झा की हत्या से जुड़े खुलासे के तहत सर्वप्रथम पटना Live ने अपने पाठकों को संतोष झा हत्याकांड के महज 2 घंटे के अंदर बात दिया था कि संतोष झा की हत्या की साज़िश मोतिहारी जेल में बंद मुकेश पाठक ने रची और उसने ही अपने शूटरों के जरिये कांड क्या अंजाम दिलाया है। पढ़े …

Super Exclusive – दोस्त से दुश्मन बने गैंगेस्टर ने अपने शूटर भेज कराई संतोष झा की हत्या,पकड़ा गया अपराधी है मुकेश पाठक गैंग का है शूटर
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वही, संतोष झा की हत्या के कारण की तलाश में पटना Live टीम की तहकीकात ज्यो ज्यो आगे बढ़ रही है। यह पुख्ता जानकारी मिलती जा रही है कि संतोष झा की हत्या गैंग पर कब्जे और गिरोह को विभिन्न माध्यमो और रंगदारी के वसूली के जरिये पैसों पर संतोष झा के एकाधिकार को खत्म करने की वजह से हुई है। गिरोह से जुड़े लोगों का कहना है कि विभिन्न जेलों में बंद अपराधियों और शूटरों को न तो जेल खर्चे के लिए पैसे मिल रहे थे न ही उनका मुकदमा लड़ रहे वकीलों को उनकी फीस ही पहुचाई जा रही थी। तो दूसरी तरफ संतोष अपने गुर्गों के साथ जेल में भी ऐशो आराम से रह रहा था। इसको लेकर संतोष के खिलाफ विद्रोह का बिगुल मुकेश पाठक के नेतृत्व में बज़ चुका था और गिरोह दो फाड़ हो गया था।                       संतोष झा की कत्ल का कारण- जेल में जश्न
लेकिन जो सबसे बड़ा कारण बना वह है 16 जुलाई को बिहार के ही मोतिहारी कोर्ट परिसर में अभिषेक झा की हत्या। दरअसल विगत दिनों में संतोष और मुकेश की जंग में मारा गया कुख्यात शूटर अभिषेक झा मुकेश के पक्ष में मजबूती से खड़ा हो गया था। लेकिन मोतिहारी के ढाका अनुमंडल कोर्ट में पेशी के दौरान कैदी अभिषेक झा की गलती से अपने ही साथी अपराधियों द्वारा न्यायिक अभिरक्षा से भगाने के दौर हुई गोलीबारी में  गोली लगने से मौत हो गई थी।
लेकिन,अभिषेक की हादसे में हुई हत्या से मोतिहारी जेल में बंद मुकेश पाठक अंदर तक हिल गया। दरअसल कुख्यात संतोष झा शिवहर जिले के पुरनहिया थाने का रहने वाला था और अभिषेक भी शिवहर जिला के श्यामपुर भटहां थाना क्षेत्र के डुमरी गांव निवासी था। ये वही अभिषेक था जिसके कोर्ट परिसर में पेशी के दौरान संतोष झा के पाव छुकर आशीर्वाद लेने का वीडियो मीडिया की सुर्खियां बना था। लेकिन फिर भी अभिषेक ने संतोष का साथ छोड़कर मुकेश का दामन थाम लिया था।                        
अभिषेक झा की हत्या के बाद मुकेश पाठक व संतोष झा के बीच जारी मनमुटाव जो अबतक धीरे धीरे दुश्मनी की शक्ल ले चुका था अचनाक इस  दुश्मनी ने खूनी रुख अख्तियार कर लिया।
दरअसल अबतक संतोष और मुकेश पाठक दोनों मन ही मन एक दूसरे को खत्म करने की प्लानिंग करने में मुतमइन रहते थे पर खुलेआम कुछ भी नही दिखाई देता था। गैंग के अहम सदस्यों और अपराधियों में भी अब खुलकर मुकेश पाठक और संतोष झा के पीछे लामबंदी हो चुकी थी। यानी गिरोह में खेमेबाजी हो चुकी थी। गिरोह बट चुका था।

                 वही, गिरोह से जुड़े लोगों का दावा है कि ज़्यादातर शूटरों ने मुकेश पाठक का दामन थाम लिया था तो दूसरी तरफ गैंग से पर्दे के पीछे से जुड़े शातिरों और कुछ एक गैंग के सेकंड लाइन के शूटर संतोष झा के संपर्क में डायरेक्ट आ गए थे। दोनों खेमो में जोर आजमाइश और शह मात का खेल जारी था। तैयारियां दोनों तरफ से जारी थी,दोनों खेमा अब फरिया लेने की ताक में था। इसी बीच मुकेश पाठक गैंग को जानकारी मिली कि संतोष झा भी मुकेश पाठक पर हमले की साज़िश में पूरे जोरशोर से लगा है।

और अपनो की गलती से अभिषेक झा मारा गया जब इसकी जानकारी  मुकेश पाठक को अपने सूत्रों से हुई तो वो बेचैन हो उठा और फिर क्या था पूरे लाव लश्कर के साथ सक्रिय हो गया और जवाबी हमले की तैयारियों में जुट गया। इस बात की तस्दीक मोतिहारी जेल के सूत्र भी करते है। मुकेश पाठक ने फिर संतोष का खेल खत्म करने की साज़िश के तहत अपने साथ मोतिहारी जेल में बंद अभिषेक को न्यायिक अभिरक्षा से भगाने की प्लानिंग की ताकि संतोष झा को मार गिराया जाय। 16 जुलाई को चुकी सजायाफ्ता अभिषेक को ढाका थाना के कांड सख्या 41/16 रंगदारी के मामले में कोर्ट में पेश होना था तैयारी कर ली गई। स्थानीय संपर्क के जरिये हथियार,पैसे और बाइक गिरोह से जुड़े 2 अपराधियों को मुहैय्या करा दिए गए।तय कार्यक्रम के अनुसार 16 जुलाई को पेशी के लिए अभिषेक झा को मोतिहारी सेंट्रल जेल से ढाका एसडीजेएम कोर्ट लाया गया, कैदी वैन के कोर्ट परिसर में पहुंचते ही अभिषेक ने शौचालय जाने की बात कही, तो कैदियों की सुरक्षा में गए हवलदार वशिष्ठ मुनि तिवारी व सिपाही वीरेन्द्र कुमार सिंह और एक अन्य सिपाही उसे शौच के लिए अनुमंडल कार्यालय लेकर गये और फिर वापसी के दौरान अचनाक गेट के समीप उसको भागने आये दोनों अपराधी आ धमके, आते ही उन्होंने हवलदार पर मिर्ची पाउडर फेंक दिया।
वही, अभिषेक हथकड़ी छुड़ाकर भागने का प्रयास करने लगा। हथकड़ी नहीं छोड़ने पर अभिषेक ने हवलदार के सिर पर हथकड़ी से प्रहार कर दिया। वहीं उसे छुड़ाने आए अपराधियों ने पुलिस पर ताबड़तोड़ गोलीबारी शुरू कर दी,जिसमें एक गोली अभिषेक झा को लग गई। गोलियां खत्म होने पर अपराधियों ने पिस्टल जवानों पर दे मारा जिससे एक सिपाही घायल हो गया। इधर, अभिषेक को गोली लगने के बाद न्यायालय में अफरा-तफरी मच गई, जिसका फायदा उठाकर अपराधी भाग निकले।
इधर, मुकेश पाठक की सारी तैयारी धरी की धरी रह गई उलटा गिरोह का एक बेहद दुःसाहसी और भरोसेमंद शूटर न्यायिक अभिरक्षा से भगाने के दौरान अपनो की ही गोली का शिकार हो गया। यह गैंग के लिए बड़ा झटका था। इस कांड से मुकेश पाठक सदमे की हालत में था वही अन्य सदस्य सन्न रह गए।
और फिर रात का वो जश्न                          मुकेश पाठक खेमा जहा सदमे की हालत में था वही दूसरी तरफ संतोष झा पासा उल्टा पड़ जाने से बेहद खुश हो रहा था। जेल सूत्रों का कहना है कि अभिषेक झा की हत्या ने मुकेश और संतोष के बीच दुश्मनी में घी का काम किया। रात को तो बाकायदा अपने बैरक में संतोष झा और उसके साथियों ने थाली पीटकर बाकायदा जश्न मनाया और जोर जोर से कह कहे लगाये। बैरक में मिठाईयां बांटी गई।
इधर, मुकेश पाठक अभिषेक की मौत से सदमे की हालत में था। संतोष झा द्वारा जेल में जश्न मनाया जाने से मुकेश पाठक के आंखों से आंसू छलक आये। रुंधे गले से उसने अपने साथियों से कहा “मेरा भाई चला गया”। अभिषेक की मौत से मुकेश अंदर से टूट गया और संतोष के जश्न ने उसके गम को गुस्से में तब्दील कर दिया और फिर मुकेश ने संतोष का विकेट गिराने की साज़िश रच डाली। यानी न जश्न होता न सतोष इतनी जल्दी मारा जाता।