ब्रेकिंग(खुलासा )- प्याज व्यवसायी हत्याकाण्ड में पटना पुलिस को मिले अहम सुबूत, सीसीटीवी फुटेज से खुलेगा हत्यारो का राज, ज़मीन विवाद से जुड़ रहे है तार

पटना Live डेस्क। पटना सिटी निवासी सह फतुहा में प्रसिद्ध प्याज व्यवसायी सह राजद के एमएलसी प्रत्याशी रहे पप्पू यादव को अज्ञात अपराधियो ने फतुहा स्टेशन गुमटी के पास ताड़तोड़ कईं गोलिया मार दी। गंभीर स्थिति में अस्पताल ले जाने के क्रम में पप्पू की मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए है। घटना की स्चना मिलते ही फतुहा थाना पुलिस सहित कई वरीय पुलिस अधिकारी घटना स्थल पर पहुच गए है। राजद के नेता स्टेशन रोड में अपने आवास से निकलकर प्रतिदिन की भांति चाय पीने निकले थे, तभी बाइक सवार दो अपराधियों ने गोली मार दी। पटना ले जाया गया जहाँ इलाज के दौरान पप्पू यादव की मौत हो गई।

               वही घटना के बाद एसएसपी मनु महाराज ने फतुहा थानाध्यक्ष को लाइन हाज़िर करते हुए,अनुसांधन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हत्याकांड में पटना पुलिस को अहम सुराग सीसीटीवी फुटेज के तौर पर मिला है। पप्पू यादव को जहां गोली मारी गई है वहां से 200 मीटर आगे एक सीसीटीवी लगा है। उसी सीसीटीवी में हत्या कर भाग रहे बाइक सवार अपराधियों के फुटेज मिले है।

वही सूत्रों का कहना है कि मकतूल पप्पू यादव की हत्या के पीछे ज़मीनी विवाद हो सकता है। इस बाबत जानकारों का दावा है कि पिछले साल  रेलवे कॉलोनी निवासी नवल यादव और पप्पू यादव के बीच कबीरपंथ से जुड़ी एक ज़मीन को लेकर विवाद हुआ था। उल्लेखनीय है कि नवल यादव का एक भतीजा छोटू है जो अपराधी प्रवृत्ति का है। वही नवल यादव कबीर पंथ के उस जमीन के टुकड़े को जहा अपना बता रहे थे वही मकतूल पप्पू यादव कबीर पंथ के उस गरीब खेमे के समर्थन कर रहे थे। इसी विवाद में पिछ्ले साल यानी वर्ष 2016 के मार्च अप्रैल के महीने में एक व्यक्ति की हत्या भी कर दी गई थी।


तब से ही नवल यादव और पप्पू यादव में तनातनी की स्थिति बनी हुई थी। वही स्थानीय लोगो के अनुसार नवल का भतीजा छोटू कई आपराधियों की संगति में रहता है। उसका आपराधिक रिकॉर्ड भी है। वही पप्पू यादव को कत्ल करने दोनों युवकों ने अपना मुँह ढक रखा था और घटना को अंजाम देकर रेलवे कॉलोनी की ओर भागे जिस तरफ नवल यादव का घर है। इन कड़ियों को देखते हुए कयास लगाए जा रहे है कि इस हत्याकांड में छोटू जो नवल का भतीजा है उसकी संलिप्तता कही न कही तो है ही या फिर मुँह छिपाने को लेकर लोगो का तर्क है कही न कही अपराधी स्थानीय रहे होंगे जिन्हें पहचाने जाने का डर भी रहा होंगा।