(Exclusive – जेल की तस्वीर)पटना में थानेदार से ज्यादा रुआब रखता है,जघन्य तिहरे हत्याकांड का आरोपी है थाने का प्राइवेट ड्राइवर, अवैध हथियार से लेकर दंबगई का सोशल मीडिया पर करता है बखान

पटना Live डेस्क। सूबे के अधिकांश थानों में पुलिस की जीप और जिप्सियों की स्टेयरिंग प्राइवेट ड्राइवरो के हाथो के इशारे पर घूमती है। पहले से ही पुलिसकर्मियों की कमी से जूझते बिहार पुलिस के वाहनों को जुगाड़ वाले चालक ही चलाते है। चुकी ये हालात पूरे राज्य में है तो राजधानी के हालात भी इससे जुदा नही है। पटना के भी अधिकांश थानों की गाड़ियों की स्टेयरिंग प्राइवेट ड्राइवर के हाथ मे है।इन चालको का न तो थाने को इतिहास पता है न भूगोल। बस थानों को तो इन ड्राइवरों के वर्त्तमान से मतलब है जो गाड़ी ठीक से चला ले और चाटुकारिता कर थाना स्टाफ को खुश रखे।चुकी विभाग में ड्राइवरों की बेहद कमी है और थानों को पेट्रोलिंग करने से लेकर तमाम कानूनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना है थाना भी इन निजी वाहन चालकों पर बहुत हद तक निर्भर है।
पुलिस की कमरतोड़ ड्यूटी की वजह से जो ड्राइवर टीक जाते है धीरे धीरे खुद को पुलिस वाला ही समझने लगते है। फिर तो धीरे धीरे ये इतना एक्पर्ट हो जाते है की थाने की गाड़ी चलाने का पूरा-पूरा लाभ लेने लगते है। फिर तो थाने से जुड़े मामले में गैर वाजिब हस्तक्षेप भी करने लगते है।


बात राजधानी पटना की करे तो  ज्यादातर थानों के प्रभारी से ज्यादा भोकाल उनकी  जिप्सी चलाने वाला प्राइवेट चालक रखता है। अक्सर होता ये है कि थानेदार साहब के हाथ मे फाइल होती है। तो प्राइवेट चालक वायरलेस सेट संभालता है। चुकी थानेदार बदलते रहते है और ये निजी ड्राइवर थाने में लगातार जमे रहते है। नए थानेदार को इलाके की तमाम जायज नाजायज गतिविधियों से वाकिफ कराते है। साहब के मुहलगु हो जाते है फिर तो धीरे आम लोगों और थाने के स्टाफ तक को मौका मिलते ही चमकाते रहते है। हद तो तब हो जाता है जब पुलिस विभाग का चालक होने के बाद भी ये थानों में साहब की जिप्सी चलाते है।
विभिन्न थानों की गाड़ियों को चलाने इन  प्राइवेट चालकों को वेतन चाहे जितना मिलता हो, लेकिन थानेदार की गाड़ी चलाने का पूरा-पूरा लाभ मिलता है।इनकी कमाई का मुख्य जरिया मामूली मामले जैसे मारपीट पारिवारिक विवाद समेत अन्य मामलों में समझौता का प्रयास इन्ही प्राइवेट चालको की देख- रेख में ही होता है।

कुछ प्राइवेट चालक ऐसे भी हैं,जिन पर कई और बेहद खौफ़नाक गंभीर आरोप हैं उन्हें बेखटक थाने में बतौर ड्राइवर उन्हें रखा जाता है। ठीक ऐसा ही एक मामले का खुलासा राजधानी पटना के गर्दनीबाग थाने के प्राइवेट ड्राइवर के बाबत हुआ है। वर्त्तमान में गर्दनीबाग थाने में थाने की जीप और जिप्सी चलाने वाला विशाल सिंह नामक युवक राजधानी पटना के अंजाम दिए गए जघन्यतम हत्याकांडो में शुमार गर्दनीबाग के तिहरे हत्याकांड (बैंक मैनेजर,उनकी पत्नी और एक 4 साल के मासूम) की हत्या का मुख्य आरोपी है। इस युवक पर मुर्गा काटने वाले चाकू से चार साल के मासूम समेत 3 लोगो की निर्मम हत्या का आरोप है। 

                     कुख्यात विशाल मूल रूप से पटना के गर्दनीबाग थाना क्षेत्र के यारपुर राजपुताना, कालीबाड़ी का रहने वाला है। वर्त्तमान में कई महीनों से बातौर चालक गर्दनीबाग में ड्यूटी कर रहा है। बेहद दबंग शग़ल वाला यह युवक थाना क्षेत्र में अपना रौब एक थानेदार के रूप में दिखाता भी है। साथ ही पुलिस की नाक के नीचे बैठकर विशाल सिंह निरंतर अपने फेसबुक वाल पर अवैध हथियारों के साथ अपनी तस्वीर चस्पा कर अपनी दंबगई की नुमाइश करता आ रहा है।

यही नही इसके स्वर्गवासी पिता विजय सिंह को लोग विजय टाइगर के नाम से जानते थे। पूरे इलाके में दबदबा था। साथ ही अपनी दंबगई के वजह टाइगर कहलाता था। इलाके में चर्चित रहे विजय टाइगर 1999 से लेकर 2004 तक पटना पुलिस के टास्क फोर्स में बतौर सदस्य रहा था। दो बार उसे जिला प्रशासन की तरफ से सम्मानित भी किया गया था।लेकिन यह भी सच है कि बंगाली परिवार की हत्याकांड के उदभेदन में उसने अपने बेटों के खिलाफ ही पुलिस को अहम सुराग दिया था।इसी कारण दोनो बेटे उसकी जान के दुश्मन बन गए थे।


अब आप स्वयं अंदाज़ा लगा सकते है कि थाने की तमाम गोपनीय और संवेदनशील जानकारियां रखने वाले विशाल सिंह जैसे कुख्यात कितना बड़ा खतरा है पुलिसिंग के लिए। साथ ही जब इलाके का कुख्यात पुलिस के वाहन का ड्राइवर हो तो आम आदमी क्या सोचेगा पुलिसिया व्यवस्था के बाबत? वही जिन कंधो पर थाना क्षेत्र के आम शहरी से लेकर खास शहरी की अपराधियों और अपराध से सुरक्षित रखने की महती जिम्मेदारी हो उसको ही बगल में बैठाकर कुख्यात अपराधी इलाके में घूमे तो फिर आवम क्या सोचकर और समझकर खुद को सुरक्षित समझेगी ? हद तो ये की इतना नामचीन अपराधी के होने के बावजूद  क्या थाना प्रभारी को इसकी जानकारी नही है ??