रोचक खबर– आर (R) पर भारी बिहटा की थानेदारी, अबतक 3 निलंबित एक बीमार अब आये है रंजीत कुमार

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पटना Live डेस्क। बिहार की राजधानी पटना के सबसे तेजी से विकसित होते थानाक्षेत्रों में नंबर एक पोजिशन पर काबिज बिहटा थाना क्षेत्र “आर” अक्षर से शुरू होने  वाले नाम के थानेदारों खातिर बिलकुल अशुभ साबित होता प्रतीत हो रहा है। ये महज़ संयोग हो सकता है पर अब तक इस थाने की कमान संभालने वाले लगातार 4 थानेदारों के नाम आर से शुरू होते रहे है और सभी के सभी बेहद बेआबरू होकर थाने से रुकसत हुए। एक तो बिहटा थाना आते ही बीमारी की चपेट में आकर इसको अलविदा कह गए। यानी “आर” पर “बी” की वक्र दृष्टी पड़ रही है। अब जरा इस थाने में आये थानेदारों की और उनके नाम और हश्र की चर्चा कर आपको उनसे मुखातिब करादे, ताकि आप भी बिहटा थाने के इस रोचक तथ्य से अवगत हो जाये है।                                                                                           अगर पिछले थानेदारों की बात करे तो  शुरुआत करते है- राजबिन्दु प्रसाद है। बेहद काबिल तजुर्बेकार अफसर में शुमार जिन्होंने राजधानी पटना के जक्कनपुर, गांधी मैदान जैसे महत्वपूर्ण थानों की कमान सफलता पूर्वक संभाली लेकिन बिहटा की कमान संभाली और फिर निलम्बित कर दिए गए। कारण कई और कितने भी रहे हो नाम की शुरुआत “आर” से ही रही।                                        फिर बारी आई रमेश कुमार की बिहटा की थानेदारी मिलते ही कुछ ही दिनों में रक्तचाप और थाने के तनाव से रोगग्रस्त हो गए। फिर क्या था जान है तो जहान बिहटा की थानेदारी से पिंड छुड़ाकर निकल लिए। खैर फिर बारी आई राजीव नगर के थानेदार रहे 2009 बैच के तेजतर्रार दरोगा रमाकांत तिवारी का। उल्लेखनीय है इनका भी नाम “आर” से ही शुरू होता है। खैर,तमाम उछल कूद और मेहनत मशक्कत के बावजूद रमाकांत तिवारी भी सस्पेंड हो गए।
बिहटा एक बार फिर नए थानेदार के इंतजार में पलक पावड़े बिछाकर खाली कुर्सी को निहारता रहा।खैर इंतजार के बादल जल्द ही छट गए और राघव दयाल को थानेदारी सौपी गई। संयोग देखिये इनका भी नाम “आर” से ही शुरु होता है।बिहटा की थानेदारी काटो भरा ताज साबित होने लगा है। राघव दयाल भी तेजतर्रार होने के अलावे मझे हुए खाकीधारी है। लेकिन संकट यह है कि “आर” अक्षर वालो को बिहटा बिलकुल भी मुफीद साबित नहीं हो रहा है। सबकुछ ठीकठाक था बालू और बिहटा ठीकठाक चल रहे थे कि अचानक बिहटा बाज़ार में एक बड़े व्यापारी से रंगदारी की मांग की गई। मामला गंभीर था एसएचओ बिहटा राघव दयाल यह बात वरीय अधिकारियों से न जाने क्यो छुपाली और तय दिन रंगदारी न मिलने पर अपराधियों  ने सुबह सुबेरे ही बिहटा बाजार में मेडिसिन कारोबारी पर उसके दुकान में ही ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी गई। इस आपराधिक वारदात ने राघव दयाल की बलि ले ली। फिर गोलियों की तड़तड़ाहट ने इनकी थानेदारी निगल ली और दयाल भी निलंबित होकर थाने से विदा हो गए।इस तरह 2017 में बिहटाथाना के अबतक कुल 3 थानेदार निलंबित और एक बिमारी से ग्रसित होकर को अलविदा कह गये है। संयोग देखिये चारो के नाम का पहला अक्षर आर ही है।                                                                                         वही बिहटा थाना “आर” अक्षर वाले थानेदारों के लिए बेहद अशुभ साबित हो रहा है। अब तक 3 निलंबित एक बीमार अब आये है रंजीत कुमार। संयोग देखिये फिर वही हो रहा है नए थानेदार का नाम भी आर से शुरू हो रहा है। इंतजार करिये क्या ये सिलसिला टूटेगा या फिर ? समय ही इसका जवाब देगा    वैसे वर्त्तमान थानेदार यानी इंस्पेक्टर रंजीत कुमार बेहद तेजतर्रार और अनुसंधान में माहिर माने जाते है। साथ ही बतौर दानापुर थानाध्यक्ष कई हत्याकांडों का खुलासा करते हुए अपनी काबिलियत को साबित कर एसएसपी मनु महाराज के भरोसेमंद इंस्पेक्टरों में शुमार करते है।