बड़ी खबर – हड़ताल पर गए पर गए 80 हजार संविदा स्वास्थ्यकर्मियों का कांट्रैक्ट समाप्त करने का फरमान जारी, नही झुकेंगे हड़ताली दी सामूहिक आत्मदाह की धमकी

पटना Live डेस्क। पिछले 3 दिनों से बिहार में समान कार्य के लिए समान वेतन और सेवा परमानेंट करने जैसी तमाम मांगों के साथ राज्य भर के 80 हजार से भी ज्यादा  चिकित्सा कर्मी पिछले बेमियादी हड़ताल पर हैं।इसी बीच बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने बुधवार को हड़ताली कर्मियों का वर्क कांट्रैक्ट समाप्त करने का फरमान जारी कर दिया है।
स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव आर के महाजन ने बुधवार को राज्य के तमाम डीम और सिविल सर्जन को निर्देश जारी किया है कि हड़ताली चिकित्सा कर्मियों की जगह संविदा पर नए चिकित्सा कर्मियों की बहाली की जाए। साथ ही कार्य बहिष्कार करने वाले चिकित्सा कर्मियों के वेतन भुगतान को रोक दिया जाए। इस बाबत प्रधान सचिव ने बुधवार को विभाग की एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद सभी जिलाधिकारी और सिविल सर्जन को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि इन चिकित्सा कर्मियों के वर्क कांट्रैक्ट को तत्काल प्रभाव से खत्म कर उनकी जगह नए कर्मियों की कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्ति की जाए।


उल्लेखनीय है कि कॉन्ट्रैक्ट पर बिहार सरकार ने डॉक्टर से लेकर नर्स,एएनएम, हेल्थ मैनेजर,फार्मासिस्ट, ओटी असिस्टेंट, टेक्नीशियन, डाटा ऑपरेटर काउंसलर  समेत निचले स्तर के तमाम चिकित्साकर्मी भी शामिल हैं।प्रधान सचिव ने राज्य में तैनात जिलाधिकारियों व सिविल  सर्जन को यह भी निर्देश दिया है कि कार्य बहिष्कार करने वाले तमाम संविदाकर्मियों के वेतन भुगतान पर भी रोक लगा दिया जाए।
वही दूसरी तरफ कॉन्ट्रैक्ट पर बहाल हड़ताली चिकित्साकर्मियों ने भी सरकार की इस धमकी के आगे नहीं झुकने का निर्णय लिया है। साथ ही यह भी कहा है कि सरकार का अगर यही तुगलकी फरमान रहा तो सभी निविडकर्मी सामूहिक आत्मदाह कर लेंगे। इधर, स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव ने भी अपना रुख कड़ा करते हुए जिलाधिकारियों और सिविल सर्जनों को लिखे अपने पत्र में स्पष्ट तौर पर लिखा है कि यदि हड़ताली चिकित्सा कर्मी किसी भी अस्पताल की स्वास्थ्य सेवा को प्रभावित या बाधित करते हैं या बाधित करने की कोशिश करते है तो उनके खिलाफ थाने में मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
एक ओर जहां सरकार ने अपना फरमान जारी कर दिया है।वही, दूसरी तरफ हड़ताली कॉन्ट्रैक्ट चिकित्साकर्मी भी सामूहिक आत्मदाह की धमकी देकर खुल कर मैदान में आगए है। अब देखना है सरकार के इस फरमान और 80 हजार हड़ताली कर्मचारियों की मांग का क्या नतीजा निकलता है।