शराबबन्दी का दिखने लगा असर सड़क दुर्घटनाओं में 60% कमी

पटना Live डेस्क। सूबे के मुखिया नीतीश कुमार द्वारा
5 अप्रैल 2016 से बिहार में पूर्ण शराबंदी का साहसिक फैसले का राज्य में पॉजिटिव नतीजे सामने आने शुरू हो गए हैं। राज्य में सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में 60 प्रतिशत की भारी कमी नोटिस की गई है। अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को मिले अप्रकाशित डेटा के अनुसार, 2015 में बिहार में सड़क दुर्घटनाओं में 867 लोगों की मौत हुई थी वही शराबबन्दी लागू होने के बाद वर्ष 2016 में यह संख्या घटकर महज 326 हो गई।

सूबे में सड़क दुर्घटनाओं में भारी कमी होने का आंकड़ा उस वक़्त आया है जब नेशनल और स्टेट हाइवे के 500 मीटर के दायरे में शराब की दुकानों पर पाबंदी से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर केंद्र और राज्य सरकारें, दोनों ही पशोपेश में हैं।साथ ही जब पूरे देश मे यह चर्चा चहु ओर है कि शराब बैन से सड़क हादसों में क्या सच मे कमी आती है ? वही  नीतीश सरकार द्वारा लागू पूर्ण शराबबंदी के बेहद सकारात्मक नतीजे आने से अब यह चर्चा और जोर पकड़ती प्रतीत हो रही है।
वही इस आकड़ो के बाबत बिहार पुलिस के वरीय अधिकारियों द्वारा भी इस बात की ताकीद की जा रही है कि पूर्ण शराबबंदी ने वाकई सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं और मौतों की संख्या को कम कर दिया है। इस बात की ताकीद बिहार में वर्ष 2016 में सड़क दुर्घटनाओं में 2015 की तुलना में 541 मौतें कम दर्ज की गई हैं। सनद रहे कि पिछले साल यानी 2016 में ही 5 अप्रैल को पूर्ण शराबबंदी लागू की गई है। वही जानकारो द्वारा इस कमी का कारण राज्य में शराब की बिक्री पूरी तरह से बैन होना माना जा रहा है।


दूसरी तरफ विश्व स्वास्थ्य संगठन की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार पूरी दुनिया में सड़क हादसों और दुर्घटनाओं की मुख्य वजह शराब पीकर गाड़ी चलाना है। संपन्न देशों में 20% लोग शराब पीकर गाड़ी चलाते हुए पाए गए जबकि मध्यम आय वाले देशों में 69% लोग ड्रंक ड्राइविंग करते हुए पाए गए।
वही इन आकड़ो के बाबत सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ रोहित बलूजा ने कहा,’बिहार में सड़क दुर्घटानाओं में मौतों की कमी को सराहना मिलनी चाहिए। हालांकि, सड़क पर हुई तमाम मौतों की वैज्ञानिक जांच नहीं की गई है। अतः यह आंकड़ा पूर्णतया सत्य तो नही बल्किअविश्वसनीय ज्यादा प्रतीत होता है। सड़क दुर्घटनाओं के वास्तविक कारण जानने के लिए हमें बेहद वैज्ञानिक जांच पद्धति से सड़क हादसों के हर पहलू की जाँच करनी होगी। तभी ये आंकड़ा विश्वसनीय कहा जायेगा या कहा जा सकता है।
ड्रंक ड्राइव सड़क सुरक्षा के लिए एक बेहद बड़ा खतरा होने के कारण भारत मे  मोटर व्हीकल लॉ को बेहद कारगर और प्रभावी बनाने खातिर फर्स्ट टाइम शराब पीकर गाड़ी चलाते हुए पकड़े जाने  पर 10 हजाए रुपए और दूसरी बार पकड़े जाने पर 15 हजार रुपए फाइन वसूलने का प्रावधान किये जाने का प्रस्ताव पारित हुआ है।