Big News -(वीडियो) बिहार के “दारूबाज” चूहे 8 लाख लीटर शराब पीकर बीमार होने के बाद “दवाबाज़ी” में जमकर ग्लूकोज़ पी रहे है

0
57

बृज भूषण कुमार,ब्यूरो प्रमुख, पटनासिटी

पटना Live डेस्क। बिहार में करामाती चूहों का आतंक चरम पर है ये हम नही कह रहे बल्कि सूबे की सुशासन सरकार के नुमाइंदे स्वीकारते है। दरअसल यह घटना सूबे के चूहे के गज़ब के करामाती होने का एक और प्रमाण है।बिहार में है पूर्ण शराबबंदी बता दें कि 5 अप्रैल, 2016 से बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है। अतः बिहार के विभिन्न हिस्सों से पुलिस और उत्पाद विभाग ने तकरीबन 5 लाख लीटर विदेशी शराब जब्त की, वहीं 3 लाख लीटर से ज्यादा देसी शराब भी पुलिस ने जब्त की तदुपरांत बरामद शराब को विभिन्न थानों के मालखाने में रखा गया है ताकि कोर्ट के आदेश के बाद उसे नष्ट किया जा सके। पिछले 13 महीनों के दौरान पुलिस के द्वारा पूरे राज्य से 9.15 लीटर शराब बरामद की गई। पर बरामद करने वाले थानेदारों ने सभी शराब की बोतलों को लेकर अजीब गरीब खुलासा करते हुए पुलिस मुख्यालय को एक रिपोर्ट पेश किया जिसमें यह बताया गया कि अधिकांश का शराब की बोतल मालखाना पहुंचने से पहले नष्ट हो गई और जो मालखाना पहुंची उसे चूहे पी गए। खैर अब इतनी बड़ी मात्रा में शराब पीने के बाद चूहों की तबियत खराब हों ना ही था तो अब  राजधानी पटना के सरकारीअस्पताल के दवा भण्डारण रूम से मरीजों की दवा पीने लगे है।

ताजा मामला राजधानी के दूसरे सबसे  बड़े अस्पताल नालंदा मेडिकल कॉलेज का है। NMCH में जहाँ गरीब लाचार मरीजों को पर्याप्त दवा उपलब्ध नहीं होती है वही चूहों ने इमरजेंसी वार्ड के दवास्टोर में रखी दवाइयो के बोतल को काट कर उसमे भरी लाखो रुपये मूल्य की दवाई को पीने में महारत हासिल कर ली है।
ये दावा है अस्पताल में दवा स्टोर में कार्यरत परिचायिका का। चूहों से परेशान उनका कहना है की इस स्टोर का दरवाजा टूटे रहने के कारण चूहा आराम से स्टोर मे घुस जाते है और दवा की बोतलों को काट कर दवा पी जाते है। यहां तक की मरीजों को चढ़ाये जाने वाले स्लाइन (पानी की बोतल) जिसमे गलूकोज की मात्रा पाई जाती है उसे तो चूहे बड़े आराम से पी जाते है। ऐसे में स्टोर में रखे स्लाइन चढाने वाली बोतल (दवाइया ख़त्म) हो जाती है। इस कारण स्टोर इंचार्ज के साथ-साथ NMCH के मरीजों को दवाइयां मिलने में परेशानी बढ़ जाती है। साथ ही स्टोर इंचार्ज को उन दवाईयो का हिसाब देने में भी परेशानी होती है  हलाकि की स्टोर इंचार्ज ने इस सम्बन्ध में स्टोर इंचार्ज का दावा है कि उन्होंने अस्पताल प्रशासन को इस कि सूचित कर चुके है।
वही अस्पताल अधीक्षक डॉ० ए० पी० सिंह भी इस बात की ताकीद करते हुए चूहों को बड़ा करामाती और शरारती कहते है। साथ ही कुबूलते है कि चूहे दवा का नुकसान कर रहे है।चूहों से बचाव के लिए स्टोर के  टूटे दरवाजे की मरम्ती का काम कराया जायेगा और उन्हें पकड़ने के लिए पिजरे का उपयोग किया जाएगा।जिससे कुछ हद तक चूहे के आतंक से निजात मिलेगी।
यानी एक बार फिर बिहार के करामाती चूहे के द्वारा दवा पी जाने की बात सामने आ रही है।यानी चूहो के नाम पर स्टोर की दवाओ की बन्दरबाट का मामला समेटने की कवायद तो नही की जा रही है? सवाल बड़ा है सुशासन की सरकार है लेकिन एक बार फिर चूहों ने बड़ा घोटाला कर दिया है। यही “दारूबाजी” के बाद “दवाबाज़” चूहे सुशासन में दहशत का पर्याय बन गए है।