बड़ी खबर (exclusive) महागठबन्धन की टूट के बाद बिहार कॉंग्रेस में भूचाल एक पूर्व मंत्री के नेतृत्व में 27 में से 18 विधायकों ने किया फैसला थामेंगे एनडीए का हाथ !

पटना Live डेस्क। बिहार की सियासत में जबरदस्त उठापटक जारी है। लंबे गतिरोध के बाद आखिरकार नीतीश कुमार की सियासी पार्टी जदयू ने महागठबन्धन
को छोडक़र भाजपा नीत एनडीए के दामन थाम लिया है। आज ही नीतीश कुमार ने विधान सभा में बहुमत हासिल कर लिया। लेकिन जो सबसे बड़ी खबर अभी अभी मिल रही है उसके अनुसार बिहार कॉंग्रेस में बड़ी टूट हो गई है। महागठबन्धन के बैनर तले विधानसभा चुनाव में कॉग्रेस ने 27 सीटों पर जीत हासिल किया था। लेकिन अब एक कोंग्रेसी पूर्व मंत्री के नेतृत्व में डेढ़ दर्जन विधायकों ने बदलाव की तैयारी कर ली है। सब कुछ तय कार्यक्रम के अनुसार रहा तो अगले कुछ घंटों में ये दल बदल हो जाएगा।18 विधायको ने बागी तेवर अपनाते हुए बगावत का झंडा थाम लिया है।
लेकिन बिहार की वर्त्तमान सियासी उथलपुथल और सत्ता परिवर्तन यानी सत्ता से बेदखली का सबसे बड़ा असर कांग्रेस पर पड़ा है। यानी गठबंधन की टूट में सबसे बडी हार कॉंग्रेस की होती दीख रही है।महागठबंधन में मचे बवाल के बीच से बहुमत की लकीर खींचते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भाजपा के सहयोग से दोबारा सत्ता कब्जा लिया है।


बिहार में सत्तासीन होने के बाद भाजपा के नेता स्पष्ट कहते हैं कि यह कांग्रेस मुक्त भारत की ओर बढ़ता पार्टी का एक और कदम है। बिहार में नीतीश के अचानक लिए गये इस फैसले से यदि किसी की जमीन खिसक गयी है,तो वह केवल कांग्रेस है। मात्र 14 से 16 घंटे के अंदर ही नीतीश ने छठी बार मुख्यमंत्री की शपथ ले ली।बिहार में महागठबंधन के गठन और जदयू,राजद और कॉंग्रेस की जुगलबन्दी में सबसे बड़ा फायदा बिहार कॉन्ग्रेस को ही हुआ था। इस गठबंधन के तहत कांग्रेस की उर्वर हुई जमीन को देखें, तो यह पहला मौका था,जब कांग्रेस जैसे-तैसे बिहार में खड़ी हो पायी थी।बाकी देश में जो पार्टी का हाल है, वह किसी से छुपा हुआ नहीं है। अब इस महागठबंधन के टूटने का भी सबसे बड़ा असर कांग्रेस पर पड़ा है।पार्टी पूरी तरह से सत्ता से बेदखल हो गयी है।भाजपा के घुसपैठ से कांग्रेस को होने वाला नुकसान भी डबल हो गया है।राजनीतिक पंडित कहते हैं कि यह महागठबंधन ही है जिसके बूते कांग्रेस बिहार में जैसे तैसे खड़ी हो गयी थी।


लेकिन अब कॉंग्रेस सत्ता से बेदखल तो हुई है उसके भविष्य के सपने चकनाचूर हो गए है। रही सही कसर अब विधायक दल में टूट की खबर ने कॉंग्रेस को सूबे में पुनः जमींनोजद्द करने की शुरुआत कर दी है। अब देखना है बागी बने कॉंग्रेस के 18 विधायको को कैसे और कब तक काबू करती है।लेकिन सूत्रों का दावा है कि अपने भविष्य और वर्त्तमान का आकलन कर 18 विधायकों ने अब फाइनल फैसला ले लिया है। यानी वापसी के सारे रास्ते बंद कर सभी ने एक साथ एनडीए के दामन थामने का मन बना लिया है। अब देखना है कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और  पूर्व शिक्षा मंत्री इस टूट से पार्टी को कैसे बचाते है या फिर  इस टूट को रोकने ख़ातिर कॉंग्रेस क्या कदम उठाती है।
वही सूत्रों का दावा है कि इसी लिए बीजेपी-जेडीयू गठबंधन की सरकार ने शपथ ग्रहण में केवल सीएम और डिप्टी सीएम ने ही शपथ ली है। ताकि नई आवक यानी कॉंग्रेस के बागी विधायकों को भी मंत्रीमंडल में एकोमोडेट किया जा सके।अभी ये तय नहीं हुआ है कि राज्य में कौन-कौन से मंत्री बनेंगे। यानी बागियों का इंतज़ार जारी है।